स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के जवाब से लगा बड़ा झटका, आंदोलन कर रहे दुखी अतिथि शिक्षकों ने राज्यपाल को पत्र लिखकर मांगी इच्छा मृत्यु
School Education Minister Gajendra Yadav's reply came as a big shock; agitating guest teachers wrote a letter to the Governor seeking euthanasia.
रायपुर : छत्तीसगढ़ के अतिथि शिक्षकों ने राज्यपाल से इच्छा मृत्यु मांगी है. अतिथि शिक्षकों ने राज्यपाल को पत्र लिखकर मिलने की मांग की है. उनका कहना है कि वे प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री के बयान से दुखी हैं. नौकरी में प्रताड़ना से तंग आ चुके हैं. इसलिए मजबूरी वश ऐसा कदम उठाने की सोच रहे हैं. फिलहाल लोकभवन से उन्हें कोई जवाब नहीं मिला है.
क्यों नाराज है अतिथि शिक्षक
प्रदेश में 1538 अतिथि शिक्षक हैं। जो साल 2018 से नियमितीकरण सहित 4 मांगो को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. सरकार बनने से पहले पार्टियां उनसे नियमितीकरण का वादा करती हैं. लेकिन सरकार बनते ही उनकी मांगों को दरकिनार कर दिया जाता है.
गजेंद्र यादव ने खुद लिखा था लेटर
2023 में प्रदेश में भाजपा सरकार बनी दुर्ग से गजेंद्र यादव विधायक चुने गए. इसके बाद गजेंद्र यादव ने स्कूल शिक्षा सचिव को पत्र लिखकर अतिथि शिक्षकों को नियमित करने की अनुशंसा की थी. लेकिन अब जब वे स्कूल शिक्षा मंत्री हैं तो नियमों का हवाला दे रहे हैं. कहना है कि यह नहीं हो पाएगा. अतिथि शिक्षक संघ की प्रदेश अध्यक्ष अन्नपूर्णा पाण्डेय का कहना है कि मंत्री क्यों पलट गए. हमे उनसे उम्मीदें हैं.
मोदी की गारंटी का था वादा
मंत्री के अलावा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरणदेव सिंह, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल ने उनकी मांगों को जायज ठहराते हुए, स्कूल शिक्षा सचिव को नियमित करने कहा था. दुर्ग लोकसभा सांसद ने तो अपने वचनपत्र मोदी की गारंटी में उल्लेख किया था कि जीतने के 100 दिन में नियमितीकरण को लेकर कमेटी बनाएंगे। ये भी वादा अधूरा रह गया.
सदन में उठा था सवाल
इनके नियमितीकरण का मामला सदन में भी उठा था. कांग्रेस विधायकों ने मंत्री पूछा नियमितीकरण का वादा मोदी की गारंटी में था। तो, सरकार उसे लागू क्यों नहीं कर रही? स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का कहना था कि अतिथि शिक्षक दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी नहीं है. इसलिए उनका नियमितीकरण संभव नहीं होगा। जिसके बाद सदन में जोरदार हंगामा भी हुआ.
2022 में बढ़ा था वेतन..
साल 2018 में अतिथि शिक्षकों की तरफ से नियमितीकरण की मांग उठी. जिसे 2019 चुनाव से पहले कांग्रेस ने भरपूर समर्थन दिया था. साल 2022 में इनके वेतन में 2000 रुपए की बढ़ोतरी जरूर की गई थी. लेकिन नियमितीकरण फिर भी नहीं हुआ. हालांकि कांग्रेस के समय स्कूल शिक्षकों की नियुक्ति की गई। जिसमें सैकड़ो की तादाद में अतिथि शिक्षक नौकरी पा गए.
निजी संस्था कर रही थी वेतन घोटाला
2016 में इनकी नियुक्ति नक्सल प्रभावित क्षेत्र के लिए की गई थी. लेकिन तत्काल सरकार ने योजना का संचालन एक निजी कंपनी को दे दिया. इसके बाद यह ठेका कर्मचारियों के रूप में सेवा देने लगे. सरकार प्रति अतिथि शिक्षक के अनुसार ठेका कंपनी को पैसा देती. फिर बाद में ठेका कंपनी अतिथि शिक्षकों को भुगतान करती.
लेकिन, खुलासा हुआ कि ठेका कंपनी सरकार के द्वारा दिए गए पैसे में से लगभग 50% राशि खुद रख ले रही है. जिसके कारण से कंपनी को सालाना करीब 100 करोड़ से ज्यादा का मुनाफा हो रहा है. कांग्रेस सरकार ने ठेका कंपनी को हटाकर इन्हें शाला विकास समिति के अंदर ला दिया.
दिन के हिसाब से मिलती है सैलरी
वैसे तो अतिथि शिक्षकों के लिए 20 हजार रुपए मासिक वेतन तय है. लेकिन इनसे दैनिक वेतन भोगी के रूप में काम लिया जा रहा है. इन्हें ना तो छुट्टी मिलती है और ना ही अन्य भत्ते दिए जाते हैं. अटेंडेंस नहीं मिलने होने पर 600 रु डेली के हिसाब से काट लिए जाते हैं. गर्मी के 45 दिन भी इन्हें सैलरी नहीं दी जाती है.
अतिथि शिक्षकों की मांगे
इनकी 4 मांगो में पूरे 12 महीने का वेतन है. प्रति महीने 2 सी एल अवकाश की पात्रता हो. जिसके कारण मनमाना बधुआ मजदूर की तरह सैलरी न काटा जाए. कैशबुक का संधारण हो.. 10 साल सेवा पूरी करने वालों को नियमित किया जाए. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार महिला अतिथि शिक्षकों को मातृत्व अवकाश भी नहीं मिलता.
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