अंधविश्वास का कहर, आकाशीय बिजली से झुलसा तो गले तक गोबर में गाड़ा, घंटों तड़पता रहा जिंदगी और मौत के बीच, फिर ले गए अस्पताल, हालत नाजुक

Wrecked by superstition burnt by lightning buried in cow dung up to his neck kept agonizing between life and death for hours then taken to hospital condition critical

अंधविश्वास का कहर, आकाशीय बिजली से झुलसा तो गले तक गोबर में गाड़ा, घंटों तड़पता रहा जिंदगी और मौत के बीच, फिर ले गए अस्पताल, हालत नाजुक

अम्बिकापुर : छत्‍तीसगढ़ के सरगुजा से हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. जहां अंधविश्‍वास एक युवक की जान पर बन आया है. दरअसल युवक पर आकाशीय बिजली गिर गई. इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया. जिसे अंधविश्‍वास के चलते परिजनों ने गोबर के गड्ढे में डाल दिया. जहां वह घंटों तड़पता रहा. घंटों बाद 108 एंबुलेंस की मदद से उसे अस्‍पताल पहुंचाया गया.  यह पूरा मामला मैनपाट ब्लॉक के ग्राम सुपलगा का है.
मिली जानकारी के मुताबिक सरगुजा संभाग के अम्बिकापुर जिले में आज भी लोग अंधविश्‍वास में जी रहे हैं. अंधविश्‍वास की वजह से बनवारी मझवार की जान को खतरा है. वह गंभीर अवस्‍था में अस्‍पताल में भर्ती है. जहां उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है.
घंटों बेहोश पड़ा रहा युवक
आकाशीय बिजली की चपेट में आने से युवक गंभीर रूप से घायल हो गया और झुलस गया. इसके बाद परिजन उसे घंटों गोबर के गड्ढे में गाड़े रहे. युवक उसी गोबर के गड्ढे में घंटों बेहोश रहा. इसके बाद गांव के किसी व्‍यक्ति ने युवक की हालत देखी.
उस व्‍यक्ति ने 108 एंबुलेंस को फोन किया. इसके बाद एंबुलेंस पहुंची. जिसकी मदद से युवक को अस्पताल में भर्ती कराया.
पहले भी सामने आ चुकी है अंधविश्‍वास की घटनाएं
छत्‍तीसगढ़ में यह अंधविश्‍वास का पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई घटनाएं सामने आ चुकी है. इन घटनाओं बच्‍चों को कुपोषण से मुक्‍त करने के लिए लोहे की गरम रॉड से जलाना. इतना ही नहीं लोगों तंत्र मंत्र के चक्‍कर में भी एक दूसरे की हत्‍या कर देते हैं.
इसके अलावा अंधविश्‍वास इतना कि किसी व्‍यक्ति के बीमार होने की हालत में उसे पंडा, पडियार के चक्‍कर में रहते हैं. उसे अस्‍पताल तक नहीं पहुंचा पाते हैं. इससे कई ग्रामीणों की जान भी जा चुकी है.
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गांवों में आज भी यह मान्यता है कि आकाशीय बिजली से झुलसे लोगों को गोबर में गाड़ देने से बिजली का प्रभाव कम हो जाता है. यहां तक कि मृत व्यक्ति भी जिंदा हो जाता है.
इसी मान्यता के मुताबिक उन्होंने घायल बनवारी मझवार को गोबर से भरे गड्ढे में डालकर उसके शरीर पर लेप लगा दिया था. ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग इसे ट्रिक को अपनाते हैं. समय पर अस्पताल नहीं पहुंचने से कई लोगों की मौत भी हो जाती है.