पुल का निर्माण शुरू भी नहीं हुआ, 3 लाख रुपये की निकासी, पंचों को ही जानकारी नहीं, पंचायत में सरपंच-सचिव की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

Bridge construction hasn't even begun, yet ₹3 lakh has been withdrawn; even the panchayat members were unaware—serious questions raised regarding the roles of the Sarpanch and Secretary.

पुल का निर्माण शुरू भी नहीं हुआ, 3 लाख रुपये की निकासी, पंचों को ही जानकारी नहीं, पंचायत में सरपंच-सचिव की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

गरियाबंद : गरियाबंद जिला में ग्राम पंचायत भुजियामुड़ा में पुल निर्माण के लिए स्वीकृत करीब 15 लाख रुपये की राशि में से 3 लाख रुपये निकाले जाने का मामला अब सवालों के घेरे में है. ग्रामीणों का आरोप है कि जिस निर्माण कार्य के नाम पर राशि निकाली गई. मौके पर उस राशि के अनुरूप कोई स्पष्ट निर्माण कार्य दिखाई नहीं दे रहा है.
मामले में ग्राम पंचायत के सरपंच तानेश्वर कंवर एवं सचिव सुभांगी उपाध्याय की भूमिका को लेकर ग्रामीणों ने सवाल खड़े किए हैं. सबसे गंभीर सवाल यह है कि अगर पुल निर्माण का वास्तविक कार्य मौके पर शुरु ही नहीं हुआ था. तो 3 लाख रुपये की राशि किस आधार पर निकाली गई?
ग्रामसभा में जानकारी देने का दावा, पंचों को ही जानकारी नहीं
मामले में सरपंच की ओर से बताया गया कि राशि निकासी और  कार्य के बारे में ग्रामसभा में जानकारी दी गई थी. लेकिन दूसरी तरफ ग्रामीणों और पंचायत के पंचों से जानकारी लेने पर कथित रूप से कई लोगों ने कहा कि उन्हें इस राशि की निकासी और उसके उपयोग के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं है. ऐसे में अब ग्रामसभा की कार्यवाही स्वयं जांच का महत्वपूर्ण बिंदु बन गई है.
क्या वास्तव में ग्रामसभा आयोजित हुई थी?
क्या पुल निर्माण और राशि निकासी का प्रस्ताव ग्रामसभा में रखा गया था?
प्रस्ताव में 3 लाख रुपये के उपयोग का उल्लेख है या नहीं?
कार्यवाही रजिस्टर में किन-किन लोगों के दस्तखत हैं?
इन सवालों का जवाब पंचायत के दस्तावेजों से ही सामने आ सकता है.
सरपंच का बयान भी जांच के घेरे में
सरपंच की तरफ से बताया गया कि निर्माण के लिए गिट्टी और सीमेंट मंगाया गया था. लेकिन बारिश होने की वजह से उसे वापस कर दिया गया. यहीं से मामले में एक और बड़ा सवाल खड़ा होता है.
अगर वास्तव में गिट्टी और सीमेंट खरीदा गया था. तो उसके बिल, भुगतान की जानकारी, सप्लायर का नाम, सामग्री की मात्रा और पंचायत के स्टॉक रजिस्टर में दर्ज विवरण सामने क्यों नहीं लाया जा रहा?
और अगर सामग्री वापस कर दी गई थी तो सामग्री वापस करने का सबूत क्या है?
भुगतान वापस हुआ या नहीं ?
रिफंड पंचायत के खाते में जमा हुआ या नहीं ?
इन सभी बिंदुओं की वित्तीय जांच जरुरी है.
मौके पर निर्माण कहां ?
ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर पुल निर्माण के नाम पर ऐसा कोई स्पष्ट कार्य दिखाई नहीं दे रहा है. जिससे 3 लाख रुपये के खर्च की पुष्टि हो सके. अगर वास्तव में निर्माण कार्य हुआ है तो तकनीकी विभाग के रिकॉर्ड में उसका Measurement Book (MB), माप, कार्य की मात्रा, कार्य की प्रगति और भुगतान का आधार मौजूद होना चाहिए.
सिर्फ लेआउट होने से निर्माण कार्य पूरा होना प्रमाणित नहीं होता है. इसलिए अब सबसे बड़ा सवाल है कि लेआउट के बाद मौके पर वास्तविक कार्य कितना हुआ ?
1 अगस्त को 3 लाख की निकासी, जांच में सामने आएगा असली सच
बताया जा रहा है कि 1 अगस्त 2026 को 3 लाख रुपये की राशि निकाली गई.
ऐसे में जांच एजेंसी को उस तारीख के आसपास के सभी रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए. पंचायत के बैंक खाते से राशि किस माध्यम से निकली. किसे भुगतान किया गया. किस बिल के आधार पर भुगतान हुआ और भुगतान के बाद मौके पर कितनी सामग्री या निर्माण कार्य हुआ इन सभी सवालों का जवाब रिकॉर्ड से मिल सकता है.
अगर बैंक रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर पाया जाता है. तो मामला गंभीर वित्तीय अनियमितता की दिशा में जा सकता है.
मानसून के बीच निर्माण की स्थिति पर भी सवाल
पुल निर्माण के लिए बारिश का मौसम शुरू होने के बाद वास्तविक निर्माण कार्य किस तरह किया गया. यह भी जांच का विषय है. हालांकि सिर्फ मानसून होने से निर्माण असंभव नहीं माना जा सकता. लेकिन अगर पंचायत का दावा है कि बारिश की वजह से निर्माण सामग्री वापस करनी पड़ी, तो उस दावे की पुष्टि दस्तावेजों और मौके के निरीक्षण से होना जरूरी है. इसलिए मौसम को आधार बनाकर निष्कर्ष निकालने के बजाय कार्य की वास्तविक तारीख, इंजीनियर का लेआउट, MB, मस्टर रोल, सामग्री खरीद और भुगतान रिकॉर्ड की जांच ही सच्चाई सामने ला सकती है.
जनपद पंचायत CEO से निष्पक्ष जांच की मांग
अब पूरे मामले में जनपद पंचायत CEO की जिम्मेदारी बड़ी अहम हो जाती है. अगर शिकायत आधिकारिक रूप से सामने आती है तो मामले की सिर्फ कागजी जांच के बजाय मौके का भौतिक सत्यापन एवं वित्तीय-तकनीकी जांच कराना जरुरी होगा.
पंचायत की कैशबुक
बैंक स्टेटमेंट और भुगतान विवरण
बिल एवं वाउचर
सामग्री खरीदी एवं स्टॉक रजिस्टर
ग्रामसभा की कार्यवाही पुस्तिका
संबंधित प्रस्ताव एवं पंचों के दस्तखत
मौके का पंचनामा और फोटो/वीडियो
संबंधित इंजीनियर की तकनीकी रिपोर्ट
अनियमितता साबित हुई तो हो सकती है कार्रवाई
अगर जांच में यह साबित होता है कि पंचायत की राशि बिना कार्य, गलत भुगतान, फर्जी/अपूर्ण दस्तावेज, नियम विरुद्ध निकासी या राशि के दुरुपयोग के माध्यम से खर्च की गई है,.तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, राशि की वसूली और परिस्थितियों के मुताबिक अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम के तहत पंचायत पदाधिकारियों की जवाबदेही और पंचायत की राशि से हुई क्षति की वसूली के प्रावधान मौजूद हैं. हालांकि किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने से पहले सक्षम अधिकारी द्वारा जांच और संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाना जरुरी है.
सबसे बड़ा सवाल पुल से पहले 3 लाख का हिसाब कौन देगा ?
भुजियामुड़ा पंचायत में मामला सिर्फ 3 लाख रुपये की निकासी का नहीं है. असल सवाल यह है कि 15 लाख रुपये के पुल निर्माण के लिए स्वीकृत राशि में से निकाले गए 3 लाख रुपये का वास्तविक उपयोग कहां और कैसे हुआ ?
अगर कार्य हुआ है तो मौके पर दिखाई देना चाहिए.
अगर सामग्री खरीदी गई है तो बिल और स्टॉक रजिस्टर में दर्ज होना चाहिए.
अगर ग्रामसभा में जानकारी दी गई है तो ग्रामसभा की कार्यवाही में दर्ज होना चाहिए.
और अगर राशि खर्च की गई है तो हर रुपये का हिसाब पंचायत के रिकॉर्ड में होना चाहिए.
अब ग्रामीणों की नजर जनपद पंचायत CEO की जांच पर है. क्या मौके का सत्यापन होगा? क्या 3 लाख रुपये की निकासी का पूरा हिसाब सार्वजनिक होगा? क्या ग्रामसभा के रिकॉर्ड की जांच होगी? और अगर वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार सरपंच-सचिव पर कार्रवाई तथा राशि की वसूली होगी?
इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा.
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