कबीरधाम में आजादी के जश्न के दौरान मारपीट, एक दूसरे पर बरसाए मुक्के, वीडियो वायरल, दीपक बैज- राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था का नमूना

Fight during Independence Day celebrations in Kabirdham, punches rained on each other, video goes viral, Deepak Baij- An example of the deteriorating law and order situation in the state

कबीरधाम में आजादी के जश्न के दौरान मारपीट, एक दूसरे पर बरसाए मुक्के, वीडियो वायरल, दीपक बैज- राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था का नमूना

कबीरधाम : छत्तीसगढ़ के कबीरधाम में जिला स्तरीय स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह के दौरान दो पक्ष आपस में भिड़ गए. एक तरफ मंच पर देशभक्ति का रंग बिखर रहा था. वहीं दूसरी तरफ मैदान में बहस करते-करते कुछ लोग हाथापाई पर उतर आए. यह पूरी घटना वहां मौजूद लोगों ने अपने मोबाइल में कैद कर ली. जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
मिली जानकारी के मुताबिक विवाद के दौरान भारी पुलिस बल मौजूद होने के बावजूद स्थिति को कंट्रोल करने में देरी हुई. इससे अफरा-तफरी का माहौल बन गया. इससे समारोह का गरिमा पूर्ण वातावरण बाधित हो गया.
इस मौके पर स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह अतिथियों के सामने सांसद संतोष पाण्डेय, एसपी कलेक्टर सभी मौजूद थे. बता दें कि कबीरधाम जिला मुख्यालय के आचार्यपंथ श्री गृंधमुनि नाम साहेब शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय मैदान में 79वां स्वतंत्रता दिवस समारोह हर्षोल्लास, उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया. सांसद संतोष पाण्डेय ने मुख्य समारोह में ध्वजारोहण कर तिरंगे को सलामी दी.
लोगों का कहना है कि जब राष्ट्रीय पर्व जैसे पावन अवसर पर वह भी पुलिस की सख्त मौजूदगी में इस तरह की घटनाएं हो सकती हैं. तो आम दिनों में सुरक्षा का भरोसा कैसे किया जाए.
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग हैरानी और नाराज़गी जता रहे हैं। उनका कहना है कि स्वतंत्रता दिवस जैसे मौके पर संयम बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है. लेकिन कुछ लोगों ने लापरवाही और आक्रामकता दिखाकर जिले की छवि को धूमिल किया है.
मौके पर पकड़े गए लड़के के बारे में पुलिस का कहना है कि वह सूखे नशे के प्रभाव में था. कार्यक्रम के दौरान सामने की कतार में बैठने को लेकर विवाद बढ़ा और झगड़े में बदल गया. घटना में किसी को कोई चोट नहीं आई. और सभी के नाबालिग लड़कों को पुलिस ने समझाइश देकर छोड़ दिया.
इस घटना ने न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. बल्कि सुरक्षा इंतज़ामों की कमजोरी को भी उजागर कर दिया है. फिलहाल मारपीट के कारणों को लेकर प्रशासन की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. स्थानीय लोग अब सीधे प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा से सवाल कर रहे हैं कि जब आपके अपने होमटाउन में कानून-व्यवस्था लड़खड़ा रही है. तो इसे सुधारने के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे? यह घटना जिले की सुरक्षा व्यवस्था के प्रति आम जनता के भरोसे को हिला देने वाली साबित हो रही है.
नेता दीपक बैज ने कहा कि कबीरधाम में स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह अतिथियों के सामने सांसद संतोष पाण्डेय, एसपी कलेक्टर सभी थे. ऐसे कार्यक्रम में उनके सामने जिस तरह से मारपीट की गयी. उपद्रवी एक दूसरे को पीट रहे थे. यह बताने के लिए काफी है कि राज्य की कानून व्यवस्था कितनी बदहाल हो चुकी है. सरकार और पुलिस का खौफ अपराधियों में नहीं है. 
दीपक बैज ने कहा कि राज्य के आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन पर अधिकार को बेदखल करने का काम भाजपा सरकार कर रही है. प्रदेश के अनेक जिलों के आदिवासियों के द्वारा धारित जमीनों के सरकारी रिकार्ड गायब किये जा रहे हैं. ताकि आदिवासियों के जमीन पर दावों को खारिज किया जा सके.
आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों में प्रमाणित है कि बस्तर जिले में विगत 1 साल के भीतर ही दुर्भावना पूर्वक 2788 वनाधिकार कम हो गए. जनवरी 2024 तक व्यक्तिगत वन अधिकार पट्टों की संख्या 37958 थे जो मई 2025 तक घटकर 35180 रह गई. सिर्फ बस्तर जिले में ही एक साल के भीतर 2788 आदिवासी परिवारों के अधिकार छीन लिए गए. इसी तरह राजनांदगांव जिले में सामुदायिक वन अधिकार पट्टे की कुल संख्या पिछले साल की तुलना में आधी रह गई है. बीजापुर जिले में भी हर महीने लगातार कटौती परिलक्षित है. 20 महीने की सरकार के दौरान एक भी नया वन अधिकार पट्टा यह सरकार जारी नहीं कर पाई है. उल्टे जो पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार के समय प्रदेश के आदिवासी परिवारों को वन अधिकार पट्टा जारी किए गए थे उन्हें भी दुर्भावना पूर्वक गायब किया जा रहा है.
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