नायब तहसीलदार रमेश कुमार ने हड़ताल से खुद को किया अलग, 5 पटवारी हल्कों में मुझे सिर्फ 2 हल्के मिले तब संगठन मौन क्यों था?

Naib Tehsildar Ramesh Kumar distanced himself from the strike, I got only 2 areas out of 5 Patwari areas then why was the organization silent?

नायब तहसीलदार रमेश कुमार ने हड़ताल से खुद को किया अलग, 5 पटवारी हल्कों में मुझे सिर्फ 2 हल्के मिले तब संगठन मौन क्यों था?

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही : छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ शाखा इकाई गौरेला द्वारा 28 जुलाई को घोषित हड़ताल को लेकर मरवाही के नायब तहसीलदार रमेश कुमार ने विरोध दर्ज करते हुए एक कड़ा संदेश प्रशासन और छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ दोनों को भेजा है.
नायब तहसीलदार रमेश ने गौरेला–पेंड्रा–मरवाही कलेक्टर लीना कमलेश मंडावी को पत्र लिखकर न सिर्फ हड़ताल से खुद को अलग किया. बल्कि यह भी साफ कर दिया कि यह आंदोलन स्वार्थ से प्रेरित है और विधि के खिलाफ है.
मरवाही नायब तहसीलदार रमेश कुमार ने अपने पत्र में सवाल उठाया है कि जब वे अकेले पूरे मरवाही तहसील के अधिकांश कामकाज को संभाल रहे थे. जब उन्हें सिर्फ दो हल्कों में सीमित कर दिया गया था. तब यही प्रशासनिक सेवा संघ उनके साथ न्याय के लिए खड़ा क्यों नहीं हुआ?
उन्होंने लिखा कि “मैं पिछले 10 साल से शपथपूर्वक और पूर्ण निष्ठा भाव से अपने कर्तव्यों का निर्वाहन कर रहा हूँ. जब मुझे मरवाही में 15 में से सिर्फ 2 हल्कों की पदस्थापना दी गई और बाकी कार्यों का भार भी मुझ पर ही रहा. तब संघ ने मेरे ‘न्याय पक्ष’ में क्या किया?”
रमेश कुमार ने यह भी उल्लेख किया कि उन्हें हड़ताल की सूचना 28 जुलाई को दोपहर 12:30 बजे मिली. लेकिन उनका स्पष्ट मत है कि इस तरह की हड़तालें न सिर्फ शासकीय दायित्वों के खिलाफ हैं, बल्कि इनमें व्यक्तिगत स्वार्थ की बू आती है. इसीलिए उन्होंने इस हड़ताल से खुद को पूरी तरह से अलग कर लिया है.
रमेश कुमार की यह चिट्ठी अब सिर्फ एक प्रशासनिक दस्तावेज नहीं रही. बल्कि एक बड़ा सवाल बन गई है. क्या एक ईमानदार और कर्मठ अधिकारी को इसलिए अकेले काम करना पड़ेगा क्योंकि वह संगठनात्मक राजनीति से दूर है?
उनकी चुप्पी अब एक शब्द बन चुकी है — और यह शब्द है विरोध, जो शोर नहीं मचाता… लेकिन झकझोर जरुर देता है.
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