रविशंकर विश्वविद्यालय ने परीक्षा समय बदला, छात्रों को नहीं दी गई जानकारी, इधर तीन निजी कॉलेजों पर 10-10 लाख का जुर्माना

Ravishankar University changed the exam time, students were not informed, on the other hand three private colleges were fined Rs 10 lakh each, action taken on recovery from students

रविशंकर विश्वविद्यालय ने परीक्षा समय बदला, छात्रों को नहीं दी गई जानकारी, इधर तीन निजी कॉलेजों पर 10-10 लाख का जुर्माना

रविशंकर विश्वविद्यालय ने परीक्षा समय बदला, छात्रों को नहीं दी गई जानकारी

रायपुर : रविशंकर विश्वविद्यालय की लापरवाही एक बार फिर सामने आई है. एमए इंग्लिश फाइनल ईयर के छात्रों को बिना सूचित किए परीक्षा का समय बदल दिया गया. परीक्षा सुबह 8 बजे के बजाय 7 बजे से शुरु हो गई, लेकिन छात्रों को इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई.
इसका नतीजा यह हुआ कि कई छात्र तय समय से एक घंटा देर से परीक्षा केंद्र पहुंचे। इससे उनका काफी नुकसान हुआ. क्योंकि उन्हें पूरा समय नहीं मिल पाया और वे अधूरी परीक्षा देकर ही लौट गए.
छात्रों ने इस लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय उनके फोन नंबर और अन्य जरुरी जानकारियां रखता है. क्योंकि ऑनलाइन फीस भरते समय ये सभी डिटेल्स जमा करवाई जाती है. इसके बावजूद छात्रों को परीक्षा समय बदलाव की सूचना न तो मैसेज से दी गई और न ही किसी अन्य जरिए से जानकारी दी गई.
छात्रों ने इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब मांगा है और उचित कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि ऐसी गलतियों से छात्रों का भविष्य प्रभावित हो सकता है. इसलिए प्रशासन को इस लापरवाही की जिम्मेदारी लेनी चाहिए.
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तीन निजी कॉलेजों पर 10-10 लाख का जुर्माना, छात्रों से वसूली पर कार्रवाई

रायपुर : प्रवेश और फीस विनियामक समिति छत्तीसगढ़ ने प्रदेश के तीन निजी मेडिकल कॉलेजों पर 10-10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है. यह कार्रवाई छात्रों से ट्रांसपोर्ट, हॉस्टल और मेस के नाम पर ज्यादा रकम लिए जाने की शिकायत सही पाए जाने पर की गई है. मेडिकल कॉलेजों को छात्रों से ली गई ज्यादा रकम एक महीने के भीतर 7% वार्षिक ब्याज सहित छात्रों को लौटाने के निर्देश भी दिए गए हैं.
प्रवेश व फीस नियामक समिति के अध्यक्ष जस्टिस प्रभात कुमार शास्त्री ने बताया कि शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साईंस, जुनवानी भिलाई, बालाजी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस मोवा रायपुर एवं रायपुर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस भानसोज ग्राम-गोढ़ी रायपुर में एमबीबीएस, एमडीएमएस पाठ्यक्रमों के संचालन में ट्रांसपोर्ट, हॉस्टल और मेस के नाम पर ज्यादा रकम हर छात्र से लिए जाने की शिकायत मिली थी. जांच में शिकायत सही पाई गई है.
उन्होंने बताया कि तीनों निजी मेडिकल कॉलेजों को जुर्माने की राशि शासन के पक्ष में एक महीने के भीतर जमा करने कहा गया है. अगर एक महीने के भीतर रकम जमा न की गई तो शासन को तीनों ही मेडिकल कॉलेजों की मान्यता निरस्त करने की अनुशंसा भी की गई है.
जस्टिस शास्त्री ने बताया कि इन तीनों निजी मेडिकल कॉलेजों द्वारा छात्रों से ज्यादा रकम वसूलने की बहुत सी शिकायतें मिलने पर समिति ने संबंधित तीनों मेडिकल कॉलेजों को सुनवाई का पूरा मौका भी दिया. उनसे खाते के विवरण आदि की जानकारी लेने के बाद समिति ने यह पाया कि तीनों ही कॉलेज ट्रांसपोर्ट, हॉस्टल और मेस के लिए जिसे वे सिर्फ ‘न लाभ-न हानि’ के रूप में ही संचालित कर सकते हैं. यानी वास्तविक खर्च को ही लेने की अधिकार उन्हें हैं. लेकिन उनकी तरफ से मनमानी रकम छात्रों से ली जा रही है.
श्री शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस जुनवानी भिलाई द्वारा ट्रांसपोर्टेशन मद में 2.50 लाख रुपए की रकम ली जा रही है. जबकि वास्तविक राशि 4,635 रुपए है. इसी तरह हॉस्टल मद में 2.46 लाख रुपए की रकम ली जा रही है. जबकि वास्तविक राशि 53,337 रुपए है. मेस चार्ज के रुप में 56,700 रुपए की रकम ली जा रही है. जबकि वास्तविक रकम 51,015 रुपए है. इस तरह छात्र से 4,43,713 रुपए ज्यादा रकम ली जा रही है.
इसी तरह बालाजी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस मोवा रायपुर द्वारा तीनों मद में 5.50 लाख रुपए रकम ली जा रही है. जबकि ट्रांसपोर्टेशन मद में वास्तविक रकम 13,719 रुपए, वास्तविक रकम 50,583 रुपए और मेस चार्ज की वास्तविक रकम 27,476 रुपए है. इस तरह 4,58,222 रुपए ज्यादा रकम छात्रों से ली जा रही है.
रायपुर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस भानसोज, ग्राम गोढ़ी रायपुर द्वारा तीनों मद में 5.50 लाख रुपए की रकम ली जा रही है. जबकि ट्रांसपोर्टेशन मद में वास्तविक रकम 13,384 रुपए, वास्तविक राशि 37,748 रुपए और मेस चार्ज की वास्तविक रकम 45,275 रुपए है. इस तरह 4,53,593 रुपए ज्यादा रकम छात्रों से ली जा रही है.
तीनों मेडिकल कॉलेजों को छात्रों से ली गई ज्यादा रकम को एक महीने के भीतर 7% वार्षिक ब्याज सहित छात्रों के खाते में जमा करने और तीनों ही कॉलेजों पर 10-10 लाख रुपये का जुर्माना भी आरोपित किया गया है. जो शासन के पक्ष में एक महीने के भीतर जमा करना होगा. अगर एक महीने के भीतर रकम जमा नहीं की जाएगी तो शासन को तीनों ही मेडिकल कॉलेजों की मान्यता निरस्त करने की अनुशंसा भी की गई है.
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