दंतैल हाथी के हमले में ग्रामीण की मौत, इलाके में चीख-पुकार और दहशत का माहौल, नाराज लोग बोले- बंगले में बिजली-एसी नहीं इसलिए नहीं रुकते अधिकारी
Villager Killed in Attack by Tusker; Atmosphere of Panic and Outcry Grips the Area; Angry Residents Allege: "Officials Refuse to Stay Here Because Their Bungalows Lack Electricity and AC."
बलौदाबाजार/कसडोल : बलौदाबाजार जिले के बारनवापारा अभयारण्य क्षेत्र एक तरफ खूंखार दंतैल हाथी के आतंक से दहला हुआ है. यहां एक दंतैल हाथी के हमले की घटना में एक ग्रामीण की मौत हो गई. 24 मई 2026 की रात करीब 8:30 से 9 बजे के बीच बारनवापारा अभयारण्य अंतर्गत ग्राम दोंद में ग्राम के ही जहरु राम नेताम उम्र करीब 55 साल को की एक दंतैल हाथी ने पटक-पटक कर मौत के घाट उतार दिया. घटना के बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार और दहशत फैल गई.
मिली जानकारी के मुताबिक दंतैल हाथी पिछले कुछ दिनों से मुरुमडीह क्षेत्र के आसपास लगातार विचरण कर रहा था. और खेत-खलिहानों की तरफ उसकी आवाजाही देखी जा रही थी. रविवार को हाथी ग्राम दोंद क्षेत्र की तरफ पहुंचा. जिसके बाद वन विभाग की टीम, हाथी मित्र दल एवं स्थानीय ग्रामीणों द्वारा सतर्कता एवं समन्वय के साथ प्रयास करते हुए हाथी को आबादी वाले क्षेत्र से ट्रैक किया गया जिसके बाद वह जंगल की तरफ चला गया. घटना के बाद हाथी खलिहानों के रास्ते पहाड़ी क्षेत्र की तरफ बढ़ गया. जिसकी वन विभाग द्वारा लगातार निगरानी की जा रही है.
हाथी की संभावित आवाजाही को देखते हुए वन विभाग द्वारा ग्राम मुड़पार, दोंद, सुरबाय, पांडादाह, गुढ़ागढ़, भिभौरी, बफरा, बार, हरदी सहित आसपास के सीमावर्ती गांवों में हाई अलर्ट जारी किया गया है. वन विभाग एवं हाथी मित्र दल द्वारा ग्रामीणों को सतत निगरानी, मुनादी और अलर्ट सिस्टम के जरिए हाथी की गतिविधियों की जानकारी लगातार दी जा रही है.
घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम द्वारा तत्काल मौके पर पहुंचकर जरुरी कार्रवाई की गई. मृतक के परिजनों को वन विभाग द्वारा तात्कालिक सहायता राशि 25,000 रुपए प्रदान किया गया और शासन के नियमानुसार आगे की क्षतिपूर्ति राशि प्रदान की जाएगी.
इस बारे में वनमण्डलाधिकारी बलौदाबाजार धम्मशील गणवीर ने कहा कि वन विभाग एवं हाथी मित्र दल द्वारा हाथियों की गतिविधियों की जानकारी मुनादी और अलर्ट सिस्टम के जरिए लगातार ग्रामीणों तक पहुंचाई जा रही है. उन्होंने ग्रामीणों से अपील किया कि सभी लोग सतर्क रहें, वन विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करें हाथी दिखाई देने पर उसे किसी भी तरह से उकसाने या उसके पास जाने की कोशिश न करें और किसी भी इमरजेंसी में फौरन वन विभाग या हाथी मित्र दल को खबर दें. किसी भी हालत में अकेले जंगल या हाथी प्रभावित क्षेत्रों की तरफ जाने से बचें. ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोका जा सके.
पूर्व जनपद सदस्य दिनेश ठाकुर ने वन विभाग और छत्तीसगढ़ वन विकास निगम की व्यवस्थाओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने बताया कि बारनवापारा परियोजना मंडल के अंतर्गत रवान रेंज में अधिकारियों और कर्मचारियों के ठहरने के लिए शासकीय बंगला तो बना है. लेकिन वहां आज तक बिजली और एसी जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई गईं. भीषण गर्मी और असुविधाओं की वजह से अधिकारी मुख्यालय में रात रुकना पसंद नहीं करते.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब जंगलों और हाथी प्रभावित क्षेत्रों में तैनात अधिकारी ही मौके पर मौजूद नहीं रहेंगे. तो आपातकालीन स्थिति में त्वरित कार्रवाई कैसे होगी? ग्रामीणों का कहना है कि अगर वन अमला लगातार क्षेत्र में सक्रिय और मौजूद रहता. तो शायद स्थिति इतनी भयावह नहीं बनती. अब ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति भारी नाराजगी है. लोगों ने मांग किया कि हाथी प्रभावित गांवों में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की जाए और रवान रेंज सहित सभी वन मुख्यालयों में अधिकारियों के रुकने के लिए जरूरी सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं. ग्रामीणों का कहना है कि जंगल में हाथियों का खतरा बढ़ता जा रहा है. लेकिन विभागीय लापरवाही और बदहाल व्यवस्थाएं लोगों की जान पर भारी पड़ रही हैं.
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