₹2000 से ज्यादा UPI Payment पर लगेगा चार्ज? वायरल खबर ने बढ़ाई टेंशन, राहुल- मोदी सरकार ने चुपचाप UPI पर फ़ीस लगाने का रास्ता खोल दिया
Will charges apply to UPI payments exceeding ₹2,000? Viral news sparks concern; Rahul claims the Modi government has quietly paved the way for imposing fees on UPI.
अगर आप यूपीआई से पेमेंट करते हैं तो 2000 रुपये की ये सीमा आपके लिए समझना जरूरी है. केंद्र सरकार ने 14 सितंबर 2026 को एक नया गजट नोटिफिकेशन जारी किया है. इसमें 2000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन को बिना चार्ज वाला इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट माध्यम तय किया गया है.
फ़िलहाल किसी यूपीआई पेमेंट पर नई फीस लागू नहीं हुई है. 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई लेनदेन को पहले वाली कानूनी सुरक्षा से बाहर कर दिया गया है. यानी आगे चलकर इन पर फीस लगाने का रास्ता खुल गया है.
क्या है नया नियम?
नए नोटिफिकेशन में सरकार ने दो इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट माध्यम तय किए हैं. जिन पर चार्ज नहीं लगाया जा सकता. पहला RuPay से किया गया डेबिट कार्ड पेमेंट और दूसरा 2000
क्या 2000 रुपये से ऊपर यूपीआई करने पर फीस लगेगी?
नए नोटिफिकेशन में 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर कोई नई फीस तय नहीं की गई है. यानी अगर आप 5000 रुपये का यूपीआई पेमेंट करते हैं. तो सिर्फ इस नोटिफिकेशन की वजह से आपके खाते से कोई चार्ज नहीं कटेगा. अभी सिर्फ इतना हुआ है कि सरकार ने बड़े यूपीआई पेमेंट पर फीस लगाने की संभावना के लिए कानूनी रास्ता खोल दिया है. फीस लगेगी या नहीं, कितनी लगेगी और किस तरह वसूली जाएगी. इस पर अभी अंतिम फैसला होना बाकी है.
क्या ग्राहक से पैसे लिए जाएंगे?
सरकार की तरफ से जो बात सामने आई है उसके मुताबिक अगर यूपीआई पर कोई फीस आती भी है तो फीस MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट के रूप में दुकानदार या कारोबारी से ली जा सकती है. इसे और आसान भाषा में ऐसे समझिए कि आपने किसी दुकान पर यूपीआई से 5000 रुपये का पेमेंट किया. अगर भविष्य में उस तरह के लेनदेन पर MDR लागू किया जाता है तो फीस ग्राहक से नहीं बल्कि पेमेंट स्वीकार करने वाले कारोबारी से ली जाएगी.
MDR क्या होता है?
MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वो फीस है जो दुकानदार या कारोबारी डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने के बदले बैंक या पेमेंट कंपनी को देता है. डेबिट और क्रेडिट कार्ड के मामले में ऐसी फीस लगती है. लेकिन दिसंबर 2019 से यूपीआई पर यह फीस खत्म थी. अब बड़े कारोबारी यूपीआई पेमेंट को कानूनी सुरक्षा से बाहर किए जाने के बाद इस बात की संभावना बनी है कि कुछ बड़े लेनदेन पर MDR जैसी फीस लगाई जा सके.
यूपीआई का कारोबार कितना बड़ा है?
यूपीआई को NPCI चलाता है और ये देश में डिजिटल पेमेंट का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है. अगस्त 2026 में यूपीआई पर करीब 2451 करोड़ लेनदेन हुए. इन सभी लेनदेन की कुल कीमत करीब 29.82 लाख करोड़ रुपये रही. इनमें से करीब तीन-चौथाई लेनदेन गूगल पे और वॉलमार्ट की कंपनी फोन पे के जरिए हुए. यानी यूपीआई पर होने वाले पेमेंट का आकार इतना बड़ा है कि अगर बड़े कारोबारी लेनदेन पर छोटी सी फीस भी लागू होती है तो पेमेंट इंडस्ट्री के लिए यह बड़ी रकम बन सकती है.
कितनी फीस लग सकती है?
अभी कोई अंतिम दर तय नहीं है. इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के अनुमान के मुताबिक यह फीस 25 से 40 बेसिस पॉइंट के बीच हो सकती है. अगस्त में 2000 रुपये या उससे ज्यादा के लेनदेन पर 0.3 प्रतिशत की दर पर विचार किए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई थी. लेकिन इसे फिलहाल तय फीस नहीं माना जा सकता.
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राहुल गांधी- मोदी सरकार ने चुपचाप UPI पर फ़ीस लगाने का रास्ता खोल दिया
कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि ₹2,000 से ज्यादा के UPI भुगतान पर 0.5 प्रतिशत शुल्क लगाने की तैयारी की जा रही है. पार्टी के मुताबिक, अगर ऐसा हुआ तो ₹5,000 की UPI पेमेंट पर ₹25 और ₹10,000 के भुगतान पर ₹50 एक्स्ट्रा देने पड़ सकते हैं.
राहुल गांधी ने कहा कि अब ₹2,000 से ऊपर के merchant UPI लेन-देन पर MDR लगाया जा सकता है. इन ट्रांजैक्शंस की संख्या भले ही सिर्फ़ 5% हो. लेकिन UPI के कुल transaction value का करीब 65% इन्हीं में है. सरकार कहती है कि ग्राहक से कोई फ़ीस नहीं ली जाएगी. लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फ़ीस आखिर आएगी कहां से? कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से...
अमेरिकी payment कंपनियां लंबे समय से भारत की zero-MDR नीति का विरोध करती रही हैं. अब मोदी सरकार ने ठीक उसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है. US Trade Deal की तरह ही, Compromised PM मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के सामने surrender कर रहे हैं.
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