17 बार चाकू से वार, फटा फेफड़ा-कटी आंत, मौत के दरवाजे से लौटा 19 साल का युवक, डॉक्टरों ने लिखी जिंदगी की नई कहानी
17 times stabbed, lungs burst, intestines cut, 19-year-old boy returned from the brink of death, doctors wrote a new story of his life
बिलासपुर : मामूली कहासुनी का अंजाम 17 बेरहम चाकू वार में निकला. आरोपी ने युवक पर बेरहमी से वार कर उसे खून से लथपथ कर दिया और 19 वर्षीय युवक मौत के दरवाज़े तक जा पहुंचा. लेकिन डॉक्टरों की जद्दोजहद ने उसकी सांसें थमने नहीं दीं.
मिली जानकारी के मुताबिक घटना चोरभट्टी के पास एक विवाद ने अचानक हिंसक रुप ले लिया. आरोपी ने युवक के सीने, पेट और शरीर के कई हिस्सों पर ताबड़तोड़ 17 बार चाकू से वार कर दिए. खून से लथपथ युवक को नाजुक हालत में सिम्स लाया गया.
जब उसे इमरजेंसी में लाया गया, तो हालत बेहद नाज़ुक थी. छाती में गहरे घाव, जिससे फेफड़े फट चुके थे. त्वचा के नीचे हवा भर चुकी थी. पेट के अंदरुनी अंग कट चुके थे.
एक सेकंड की देरी उसकी जिंदगी खत्म कर सकती थी.
इमरजेंसी में तैनात असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विनोद तामकनंद और पीजी डॉक्टर गरिमा ने बिना समय गंवाए सर्जरी शुरु की. एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. भावना रायजादा, डॉ. शीतल, डॉ. प्राची और नर्सिंग स्टाफ की सिस्टर मीना ने मिलकर ऑपरेशन को अंजाम दिया.
कई घंटे चले इस ऑपरेशन में कटी हुई आंत को जोड़ा गया. फटे डायफ्राम की मरम्मत की गई. फेफड़ों को सांस लेने लायक बनाया गया. इस दौरान सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने हर ज़रुरी दवा और उपकरण तत्काल उपलब्ध करवाए.
लंबी जद्दोजहद के बाद ऑपरेशन कामयाब हुआ और युवक ने होश में आते ही फिर से जिंदगी को महसूस किया. वह पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुका है और नई जिंदगी की शुरुआत करने को तैयार है.
यह कहानी सिर्फ एक मेडिकल केस नहीं. बल्कि साहस, टीमवर्क और मानवीय संवेदनाओं की मिसाल है. जहां 17 चाकू वार के बाद भी जिंदगी जीत गई, क्योंकि कुछ लोग हार मानना जानते ही नहीं.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LNzck3m4z7w0Qys8cbPFkB



