सब इंजीनियर की बलि चढ़ाकर पल्ला झाड़ने की नाकाम कोशिश, असली जिम्मेदार CMO पर कब होगी FIR?, सरकारी आदेश के प्रावधानों का उल्लंघन

A futile attempt to wash one's hands of the matter by making the Sub-Engineer a scapegoat; when will an FIR be lodged against the CMO, who is truly responsible? Violation of the provisions of government orders.

सब इंजीनियर की बलि चढ़ाकर पल्ला झाड़ने की नाकाम कोशिश, असली जिम्मेदार CMO पर कब होगी FIR?, सरकारी आदेश के प्रावधानों का उल्लंघन

​विशेष रिपोर्ट | रायपुर / कटघोरा
नगर पालिका क्षेत्रों के अटल परिसर में स्थापित भारतरत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री स्व अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा निर्माण में धांधली की खबर प्रमुखता से उठाने के बाद शासन हरकत में आया.
उप अभियंता (सब इंजीनियर) चन्द्र प्रकाश जायसवाल को निलंबित तो कर दिया गया, लेकिन शासन की यह कार्रवाई केवल एक “मोहरा” बलि चढ़ाने और मुख्य जिम्मेदार को बचाने की लिपापोती नजर आ रही है.
​इस पूरे मामले में असली जिम्मेदार मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO), कटघोरा हैं, जिन्हें बचाने का असफल प्रयास किया जा रहा है.
जनहित में यह सवाल उठाना जरुरी है कि इतने बड़े भ्रष्टाचार और महापुरुष की प्रतिमा के अपमान के मामले में सिर्फ निलंबन ही क्यों?
मुख्य जिम्मेदार पर FIR दर्ज क्यों नहीं होनी चाहिए?
​संचालनालय का स्पष्ट पत्र:
CMO ही मुख्य रूप से जिम्मेदार
​संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास, छत्तीसगढ़ (अटल नगर नवा रायपुर) के जारी आदेश File No. PROj-4109/430/2025/76620 (दिनांक 21-07-2025) की शर्तें इस पूरे घोटाले की पोल खोलती हैं.
(यह पत्र माननीय उप मुख्यमंत्री एवं भारसाधक मंत्री द्वारा अनुमोदित है और कार्यालय अभियंता – अनुदान द्वारा जारी किया गया है.
​इस आधिकारिक पत्र की शर्त क्रमांक 01, 03, 07 एवं 08 में साफ और स्पष्ट आदेशित किया गया है कि :
​”अटल परिसर एवं प्रतिमा निर्माण के नियमों व प्रावधानों के उल्लंघन की दशा में सीधे तौर पर मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) उत्तरदायी और जिम्मेदार होंगे.”
​जब शासकीय आदेश में स्पष्ट तौर पर प्रशासनिक एवं वित्तीय जिम्मेदारी CMO की तय की गई है, तो फिर सिर्फ सब इंजीनियर पर कार्रवाई करके मामले को रफा-दफा करने की कोशिश क्यों की जा रही है?
​बड़ा सवाल:
एक प्रशासनिक अधिकारी का जनता के पैसे से जुड़ी धांधली और महापुरुष के स्मारक से हुए खिलवाड़ पर ऐसा असंवेदनशील रवैया क्या उनके पद की गरिमा के अनुकूल है?
​क्या ऐसे अधिकारी का इतने महत्वपूर्ण पद पर बने रहना उचित है?
अब यह सीधे तौर पर राज्य शासन की नीयत, विवेक और प्रशासनिक छवि से जुड़ा संवेदनशील विषय बन चुका है।
​निलंबन पर्याप्त नहीं; FIR और कड़ी कार्रवाई की मांग
​भारतरत्न स्वर्गीय अटल जी की प्रतिमा में कांस्य के नाम पर घटिया सामग्री का इस्तेमाल करना सिर्फ वित्तीय भ्रष्टाचार (घोटाला) नहीं है, बल्कि यह जनभावनाओं और महापुरुष की प्रतिमा के साथ घोर खिलवाड़ एवं आपराधिक कृत्य है.
​’तहलका पत्रिका’ का तहलका:
अटल जी की प्रतिमा में धांधली की खबर से हिला प्रदेश, शासन अलर्ट; सब इंजीनियर सस्पेंड
​कांस्य के नाम पर घटिया निर्माण का खुला था पोल;
संयुक्त संचालक की जांच में पुष्टि के बाद नगरीय प्रशासन विभाग का बड़ा एक्शन
​विशेष रिपोर्ट:
​’ताजा खबर’ द्वारा जनहित और भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाई गई आवाज का असर अब पूरे छत्तीसगढ़ में साफ नजर आने लगा है.
कटघोरा नगर पालिका क्षेत्र के अटल परिसर में स्थापित भारतरत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री स्व अटल बिहारी वाजपेयी जी की कांस्य प्रतिमा निर्माण में हुई गंभीर अनियमितता पर प्रकाशित खबर एवं शिकायत ने प्रशासनिक गलियारों से लेकर राज्य शासन तक हलचल मचा दी थी.
​खबर के प्रकाशित होते ही शासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया। मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग (संचालनालय) ने त्वरित कार्रवाई की है. प्रतिमा निर्माण में गुणवत्ता की अनदेखी और गंभीर अनियमितताओं के दोषी उप अभियंता (सब इंजीनियर) चन्द्र प्रकाश जायसवाल को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है. इस संबंध में विभाग द्वारा शुक्रवार को निलंबन का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया.
​’ताजा खबर’ के खुलासे के बाद बैकफुट पर आया प्रशासन
कटघोरा अटल परिसर में स्थापित पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा को लेकर स्थानीय स्तर पर काफी आक्रोश था.
‘ताजा खबर’ ने जब इस पूरे मुद्दे पर प्रदेश स्तर पर पड़ताल की, तो पता जला की महापुरुषों के सम्मान और जनता के पैसे (सरकारी फंड) के साथ घिनौना खिलवाड़ किया जा रहा है. तब ताजा खबर ने जमीनी हकीकत जानने और साक्ष्य इकट्ठे करने की मुहिम शुरु की और बेबाकी से खबर प्रकाशित करना शुरु किया.
​खबर सामने आने के बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के बिलासपुर क्षेत्रीय कार्यालय के संयुक्त संचालक द्वारा मामले की उच्चस्तरीय और विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए थे.

​जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा:
‘कांस्य’ के मानकों पर पूरी तरह फेल
​संयुक्त संचालक द्वारा कराई गई विस्तृत जांच की रिपोर्ट प्रस्तुत होते ही भ्रष्टाचार की परतें उखड़ गईं.
जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट हुआ कि: ​एस्टीमेट को ठेंगा:
प्रतिमा का निर्माण स्वीकृत प्राक्कलन (एस्टीमेट) के नियमों और प्रावधानों को ताक पर रखकर किया गया.
​परत उखड़ी, उधड़ा गुणवत्ता का ढोंग:
स्थापना के कुछ ही समय भीतर प्रतिमा के विभिन्न हिस्सों से परतें उखड़ने लगी थीं और प्रतिमा लगातार क्षतिग्रस्त हो रही थी.
​मानकों से समझौता:
जिसे कांस्य (Bronze) प्रतिमा बताकर पास किया गया था, वह निर्धारित तकनीकी मानकों पर जरा भी खरी नहीं उतरी.
निगरानी में घोर लापरवाही:
निर्माण प्रक्रिया के दौरान टेक्निकल सुपरविजन (तकनीकी पर्यवेक्षण) और क्वालिटी कंट्रोल (गुणवत्ता नियंत्रण) में जिम्मेदार इंजीनियर द्वारा भारी लापरवाही बरती गई.
​उप अभियंता पर गिरी निलंबन की गाज,
निलंबन अवधि में बिलासपुर मुख्यालय नियत
​जांच रिपोर्ट में गंभीर लापरवाही और तकनीकी निष्ठा न बरतने का दोषी पाए जाने पर विभाग ने उप अभियंता चन्द्र प्रकाश जायसवाल पर कड़ा एक्शन लिया है. निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय क्षेत्रीय कार्यालय, नगरीय प्रशासन एवं विकास, बिलासपुर निर्धारित किया गया है।
​जनहित में ‘ताजा खबर’ का स्पष्ट संदेश:
‘ताजा खबर’ हमेशा जनता के अधिकारों, पारदर्शिता और सार्वजनिक धन के सही उपयोग के पक्ष में मुस्तैदी से खड़ी रही है. महापुरुषों के स्मारकों के निर्माण में किसी भी तरह की धांधली और भ्रष्टाचार बर्दाश्त से बाहर है. शासन द्वारा की गई यह सख्त कार्रवाई यह साबित करती है कि जब पत्रकारिता निष्पक्ष और तथ्यात्मक हो, तो तंत्र को घुटने टेकने ही पड़ते हैं. आगे भी इस मामले से जुड़ी हर छोटी-बड़ी अपडेट हम अपने पाठकों तक पहुंचाते रहेंगे.