गरियाबंद पुलिस ने आदिवासी समाज के देवी देवताओं का अपमान करने वाले कथावाचक युवराज पांडेय और तुषार मिश्रा को गिरफ्तार कर भेजा जेल
Gariaband police arrested storytellers Yuvraj Pandey and Tushar Mishra who insulted the gods and goddesses of tribal society and sent them to jail
गरियाबंद/देवभोग : आदिवासी समाज के पुरखोती देवी देवताओं और झाखर, पुजारी के ऊपर डंडे से पीटने और उनकी आस्था को ठेस पहुंचाने वाले कथा वाचक युवराज पांडेय को आखिर पुलिस कल देर रात धर दबोचा और गिरफ्त में ले लिया.
मिली जानकारी के मुताबिक 14 अक्टूबर 2024 को देव दशहरा के मौके पर ग्राम अमलीपदर में आदिवासी देवी देवता संस्कृति और आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले कथावाचक युवराज पांडेय और तुषार मिश्रा के खिलाफ उचित कार्यवाही के लिए 20 अक्टूबर 2024 को लिखित आवेदन थाना में दिया गया था. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए गरियाबंद पुलिस कप्तान निखिल अशोक कुमार राखेचा के द्वारा आरोपियों के खिलाफ जुर्म दर्ज करने के निर्देश दिए. जिस पर उक्त आरोपियों के खिलाफ थाना अमलीदार में धारा 126(2), 299, 3(5) BNS Act एवं 3(1) (न) SC,ST Act के तहत जुर्म दर्ज किया गया.
घटना दिनांक से दोनो आरोपी फरार थे. जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस कप्तान के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जितेंद्र चंद्राकर और SDOP मैनपुर बाजी लाल सिंह के द्वारा गिरफ्तारी के लिए टीम गठित कर पतासाजी किया गया. जो पुलिस टीम एवं साइबर सेल की मदद से उक्त दोनों आरोपी युवराज पांडेय उर्फ राजेश पांडे और तुषार मिश्रा को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया.
नाम आरोपी
01. युवराज पांडे उर्फ राजेश पांडे पिता मदन प्रसाद पांडे उम्र 34 वर्ष निवासी अमलीपदर
02. तुषार मिश्रा उर्फ अंशु पिता नरेंद्र मिश्रा उम्र 21 वर्ष निवासी अमली पदर थाना अमलीपदर जिला गरियाबंद
ये है मामला
देव दशहरा आयोजन करने के लिए गांव के पुजारी, गोटिया और पटेल और सिरहा के द्वारा फूल डोबला देकर निमंत्रण दिया जाता है. ये उनके पुरखों के द्वारा बनाया गया नियम है. लेकिन बोल कलिया सार्वजनिक नवदुर्गोत्सव समिति अमलीपदर के संकायोजनकार्ता युवराज पांडेय द्वारा 14 अक्टूबर 2024 को ग्राम अमलीपदर में देव दशहरा का आयोजन किया गया था.
उनकी संस्कृति के मुताबिक सबसे पहले कुलेश्वरिन माता और खम्बेश्वरिन माताओ की नयी देवताओं का आगमन 84 गढ़ को मुख्य पुजारी गोटिया उमेश पटेल के घर जाने का होता है. यही प्रथा सालों से चली आ रही है. लेकिन पंडित युवराज पांडेय द्वारा गोटिया के घर देवी देवताओ को जाने से रोक दिया गया और मंदिर में भेंट मुलाकात कराया गया.
जबकि सालों से चली आ रही रिती रिवाज परम्परा में देवी देवता गोटिया के घर सबसे पहले आते हैं. झांकर पुजारी गोटिया को पूजा करने का अधिकार है. वहीं धुप दिया जलाते हैं. लेकिन युवराज पांडेय द्वारा बलपूर्वक धुप आरती को छीनते हुए खुद ही धुप जलाने लगा और बेद देवी देवता को मारा व अभद्र शब्द से संबोधित करने का आरोप है. युवराज पांडेय द्वारा जान बूझकर किया गया कृत्य से पूरे आदिवासी समाज में रोस व्याप्त था. जिससे पूरा आदिवासी समाज बहुत दुखी था. आस्था को शर्मशार करते हुए सभी माता के कुर्सी में बैठकर गांव भ्रमण किया गया. जबकि देवी देवता की कुर्सी में बैठने का अधिकार सिर्फ गोटिया पुजारी को है. युवराज पांडेय द्वारा मडा़ई के दिन सूखा भोग दिया गया. जबकि उनके समाज में बली प्रथा है. देवी देवता को मुर्गा बकरा और चॉवल खिलाकर बली दिया जाता है.
इस पूरा घटनाक्रम में युवराज पांडे आदिवासी संस्कृति सालों से चली आ रही परम्परा आस्था रिती रिवाज पर आधीपत्य जमाकर नीचा दिखाने की कोशिश करने का आरोप लगा था. एफआईआर होने के बालजूद गिरफ्तार नही होने के स्थिती में नेशनल हाईवे में चक्का जाम कर विरोध करने से पहले ही कथावाचक की गिरफ्तारी हो चुकी थी.
विरोध प्रदर्शन में दिखे आम आदिवासी जनता बृजलाल सोरी, लोकनाथ सोरी सूरज नागेश, जयलाल पाथर, विजय मांझी, लोकेश्वरी नेताम, धनसिंह मरकाम, दीक्षित मांझी, भोले मांझी, तुलसी मरकाम, दीपचंद मरकाम, प्रभुलाल ध्रुव, समुंदर मांझी, दयाराम मांझी, वेद पाथर, पूनीराम मरकाम, रूद्र सोम समेत बड़ी तादाद में आदिवासी समाज के लोग मौजुद रहे.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LEzQMc7v4AU8DYccDDrQlb



