पत्रकार उमेश राजपूत हत्याकांड जांच में नया मोड़, गृह ग्राम में लगी प्रतिमा तोड़े जाने से उठे सवाल, परिजनों के घाव फिर से हरे, जताया गहरा संदेह
A new twist in the investigation into the murder of journalist Umesh Rajput, the destruction of a statue in his home village raises questions, rekindling family's wounds and expressing deep suspicion.
गरियाबंद/छुरा : पत्रकार उमेश राजपूत हत्याकांड मामले में एक बार फिर नया मोड़ आने की संभावना जताई जा रही है. 25 सितंबर की रात उनके गृह ग्राम हीराबतर में स्थापित प्रतिमा (स्टेच्यू) को अज्ञात व्यक्ति द्वारा क्षतिग्रस्त कर दिया गया. गौरतलब है कि 23 जनवरी 2011 को छुरा नगर के पत्रकार उमेश राजपूत की उनके ही निवास पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस घटना ने पूरे प्रदेश सहित मीडिया जगत को हिलाकर रख दिया था. हत्याकांड की जांच सीबीआई के हाथों में है.
मिली जानकारी के मुताबिक छुरा नगर के पत्रकार उमेश राजपूत की 23 जनवरी 2011 को उनके छुरा स्थित निवास पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. वे मुलत: छुरा नगर से करीब 15 किलोमीटर दूर ग्राम हीराबतर के रहने वाले थे. उनका जन्म इसी गांव हुआ था और उनका बचपन और प्राथमिक पढ़ाई भी यहीं हुआ था. वे पत्रकारिता के क्षेत्र में जाने के बाद छुरा नगर में रहने लगे थे. लेकिन उनका आना-जाना अपने जन्म स्थान गांव हीराबतर में भी होते रहता था और जिस दिन उनकी हत्या हुई. उस दिन भी अपने गृह ग्राम हीराबतर गये हुए थे. वहां से लौटने के कुछ घंटे बाद शाम को उनकी हत्या हुई थी. इस बारे में सीबीआई के द्वारा उनके गांव के भी कुछ लोगों को पुछताछ कर बयान दर्ज किया गया था और आज भी उनकी चांज और सुनवाई सीबीआई के द्वारा जारी है.
वहीं 25 सितंबर की रात उनके गृह ग्राम हीराबतर में पत्रकारों के स्थापित उनके स्टेच्यू को तोड़कर उन्हें नुकसान पहुंचाया गया. जिसके बाद राजपूत के परिजनों का कहना है कि उनके स्थापित स्टेच्यू को इस तरह नुकसान पहुंचाने के पीछे क्या कारण है? किसको इस स्टेच्यू से तकलीफ हो सकता है?. यह स्टेच्यू आखिर भु स्वामी भूमि पर पिछले करीब दो साल से स्थापित है और इस तरह नुकसान पहुंचाने के पीछे कहीं उनके हत्या से जुड़े कुछ लोग तो शामिल नहीं है?. ऐसी आशंका जताई जा रही है.
हालांकि स्थानीय पुलिस द्वारा पता चलने पर उस व्यक्ति को थाने बुलाकर पुछताछ की जा रही है. जिसके चलते आने वाले दिनों में सीबीआई से इस पहलु की जांच की मांग परिजन कर सकते हैं. हालांकि इस हत्याकांड में दो लोगों को आरोपी बनाया गया था. जिसमें सीबीआई की मानें तो एक आरोपी के द्वारा सीबीआई की हिरासत में आत्महत्या करना बताया गया. और मामले की सुनवाई विशेष सीबीआई अदालत रायपुर में जारी है.
मामले की गहराई का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2022 में उमेश राजपूत के छोटे भाई को भी धमकी मिली थी. अज्ञात लोगों ने उनके घर तक पर्चा फेंक कर गोली मारने की चेतावनी दी थी. इससे परिवार अब भी दहशत में है. ऐसे में परिजन आने वाले दिनों में इस पहलू की भी सीबीआई जांच की मांग कर सकते हैं.
पत्रकार उमेश राजपूत की हत्या को एक दशक से ज्यादा बीत चुका है. लेकिन आज भी उनका परिवार न्याय की आस लगाए बैठा है. अब स्टेच्यू तोड़फोड़ की घटना ने परिजनों के घाव फिर से हरे कर दिए हैं और इस केस को एक नई दिशा देने की संभावनाएं भी प्रबल हो गई हैं. यह मामला न सिर्फ पत्रकारिता जगत बल्कि लोकतंत्र की आवाज़ को दबाने की कोशिश से जुड़ा है. ऐसे में प्रदेशभर की निगाहें एक बार फिर इस केस और सीबीआई जांच की दिशा पर टिकी हुई हैं.
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