ऑनलाइन उपस्थिति के आधार पर वेतन रोकने के आदेश का सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन का विरोध, बोले- नेटवर्क फाल्ट का खामियाजा शिक्षकों पर डालना अन्याय
Assistant Teachers/Samagra Teachers Federation opposes order to withhold salaries based on online attendance; calls it unjust to penalize teachers for network faults.
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही : ऑनलाइन उपस्थिति के आधार पर केवल दर्ज उपस्थिति वाले दिनों का ही वेतन भुगतान किए जाने संबंधी आदेश का सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन, जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) ने कड़ा विरोध किया है. फेडरेशन ने इस आदेश को शिक्षक विरोधी, अव्यावहारिक और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए तत्काल वापस लेने अथवा संशोधित करने की मांग की है.
फेडरेशन के जिला अध्यक्ष दिनेश कुमार राठौर ने जारी प्रेस वक्तव्य में कहा कि अगर ऑनलाइन उपस्थिति के आधार पर वेतन निर्धारण की व्यवस्था लागू की जाती है. तो इसका सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव उन शिक्षकों पर पड़ेगा जो दूरस्थ, वनांचल एवं नेटवर्क विहीन क्षेत्रों के विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं होने, सर्वर की तकनीकी समस्या और ऐप के सुचारु रूप से कार्य नहीं करने जैसी परिस्थितियों की वजह से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती है. जबकि शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय में उपस्थित रहकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं.
फेडरेशन ने साफ किया कि किसी शिक्षक की उपस्थिति का आकलन केवल तकनीकी माध्यम से नहीं, बल्कि उसके वास्तविक कार्य, विद्यालय में उपस्थित रहने और शैक्षणिक दायित्वों के निर्वहन के आधार पर किया जाना चाहिए. तकनीकी खामियों की वजह से शिक्षकों का वेतन रोकना न्यायसंगत नहीं है. और इससे शिक्षकों का मनोबल प्रभावित होगा.
फेडरेशन ने शासन एवं शिक्षा विभाग से मांग किया कि ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली में आ रही तकनीकी समस्याओं का पहले स्थायी समाधान किया जाए. साथ ही किसी भी शिक्षक का वेतन सिर्फ तकनीकी त्रुटि या ऐप में दर्ज नहीं हो सकी उपस्थिति के आधार पर न रोका जाए. अगर किसी तरह की विसंगति सामने आती है तो उसका सत्यापन संबंधित संस्था प्रमुख एवं सक्षम अधिकारियों के माध्यम से कराया जाए. संगठन ने यह भी मांग किया कि शिक्षकों के हितों के प्रतिकूल जारी इस आदेश पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए.
जिला अध्यक्ष दिनेश कुमार राठौर ने कहा कि शिक्षक समाज सदैव गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध रहा है. लेकिन तकनीकी कमियों की जिम्मेदारी शिक्षकों पर डालकर दंडात्मक कार्रवाई करना उचित नहीं है. फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि अगर आदेश में आवश्यक संशोधन नहीं किया गया. तो शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा.
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