BJP विधायक पार्टी छोड़ी, रामचंद्र को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की खबर से नाराज, कहा- यह कार्यकर्ताओं के लिए सदमा
BJP MLA left the party, angry with the news of making Ramchandra the state president, said- this is a shock for the workers
तेलंगाना में भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लगा है. गोशामहल से तीन बार विधायक रह चुके टी. राजा सिंह ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से सोमवार को इस्तीफा दे दिया. गोशामहल विधायक टी राजा ने पूर्व एमएलसी रामचंदर राव को तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष बनाने की खबरों पर कड़ी नाराजगी जताते हुए भाजपा की प्राथमिक सदस्यता छोड़ दी. रामचंदर राव को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की अटकलों से नाराज टी. राजा ने अपने त्यागपत्र में केंद्रीय नेतृत्व से फैसले पर पुनर्विचार की अपील की है.
टी. राजा सिंह ने प्रदेश अध्यक्ष जी. किशन रेड्डी को भेजे त्यागपत्र में लिखा कि यह पत्र मेरी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं. बल्कि लाखों निष्ठावान कार्यकर्ताओं की निराशा की आवाज है. कुछ लोग पर्दे के पीछे से संगठन चला रहे हैं. जिससे कार्यकर्ताओं में हताशा फैल रही है. मैं हिंदुत्व और जनता के लिए समर्पित हूं. लेकिन पार्टी नेतृत्व का यह फैसला अस्वीकार्य है. बहुत सारे लोग चुप हैं. इसे उनकी सहमति न समझा जाए. यह लाखों कार्यकर्ताओं के लिए सदमे जैसा है.
पूर्व एमएलसी एन. रामचंदर राव ने रविवार को प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया था. उनके सामने कोई अन्य उम्मीदवार नहीं है. इसलिए एक जुलाई को उनके निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा लगभग तय मानी जा रही है.
टी. राजा सिंह ने उनके नाम को लेकर खुलकर विरोध जताया है. माना जा रहा है कि राजा को खुद या अपने करीबी को यह पद मिलने की उम्मीद थी. लेकिन पार्टी की रणनीति से वे नाराज हो गए.
राजा सिंह अपने कट्टर हिंदुत्ववादी बयानों के लिए पहचाने जाते हैं. उन पर 105 से ज्यादा आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं. जिनमें 18 सांप्रदायिक घटनाओं से जुड़े हैं. 2022 में पैगंबर मोहम्मद पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में उन्हें निलंबित किया गया था. 2023-24 के बीच उनके कई भड़काऊ भाषण, सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने और जनसंख्या नियंत्रण जैसे मुद्दों पर उग्र बयानों को लेकर विवादों में रहे. फरवरी 2025 में, मेटा (फेसबुक-इंस्टाग्राम) ने उनकी प्रोफाइल्स को हटा दिया था क्योंकि उनके भाषणों में हिंसा भड़काने की बातें पाई गई थीं.
टी. राजा सिंह ने 2009 में टीडीपी से राजनीतिक करियर शुरु किया था. 2013 में बीजेपी में शामिल हुए और 2014, 2018 और 2023 में गोशामहल से लगातार विधायक बने. उन्होंने जीवन की शुरुआत कैसेट बेचने और इलेक्ट्रिक वायरिंग के काम से की थी. उनका समुदाय ‘लोध’ है. जो कई राज्यों में ओबीसी वर्ग में आता है.
रामचंदर राव का नाता एबीवीपी और वकालत से रहा है। 2015 में MLC चुने गए. और हैदराबाद बीजेपी अध्यक्ष तथा विधान परिषद में पार्टी के फ्लोर लीडर भी रहे. उनकी छवि पार्टी के भीतर संगठनात्मक समझ रखने वाले सौम्य नेता की है.
BJP की राज्य इकाइयों में संगठन चुनाव की प्रक्रिया जारी है. सोमवार को उत्तराखंड और मिजोरम में नए अध्यक्षों की घोषणा के बाद 1 जुलाई को तेलंगाना में नए अध्यक्ष की घोषणा होनी है. रामचंदर राव अकेले उम्मीदवार हैं.
गोशामहल बारे में दिलचस्प बात यह है कि ये निर्वाचन क्षेत्र हैदराबाद संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है, जो ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के कब्जे में है. हैदराबाद संसदीय क्षेत्र में सात विधानसभा सीटें हैं- मलकपेट, कारवान, चारमीनार, बहादुरपुरा, याकूतपुरा, चंद्रयानगुट्टा और गोशामहल. गोशामहल को छोड़कर ये सभी सीटें AIMIM के कब्जे में हैं. गोशामहल इनमें से एकमात्र हिंदू बहुल सीट भी है, जिसमें ज्यादातर हिंदी, मराठी और मारवाड़ी भाषी लोग हैं. राजा सिंह लोध राजपूत जाति से हैं, जो मूल रूप से उत्तर भारत से हैं. इस समुदाय के लोग निजाम काल के दौरान हैदराबाद चले गए थे- और गोशामहल में लोध राजपूतों की अच्छी खासी आबादी है.
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