चित्रसेन साव का जुलूस निकालने को बेटी ने बताया अमानवीय और संविधान विरोधी, पुलिस पर FIR की मांग, एसपी से निष्पक्ष जांच की अपील

Chitrasen Saav's daughter called the procession inhuman and unconstitutional, demanded an FIR against the police, and appealed to the SP for a fair investigation.

चित्रसेन साव का जुलूस निकालने को बेटी ने बताया अमानवीय और संविधान विरोधी, पुलिस पर FIR की मांग, एसपी से निष्पक्ष जांच की अपील

रायगढ़ : रायगढ़ जिले के तमनार में जेपीएल कोयला खदान के विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला पुलिसकर्मी के साथ हुई अमानवीय घटना को लेकर पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य आरोपी पर सार्वजनिक कार्रवाई की है. गिरफ्तार मुख्य आरोपी चित्रसेन साव को सोमवार को अर्धनग्न हालत में चप्पलों की माला पहनाकर, चेहरे पर लिपस्टिक लगाकर सिग्नल चौक से अदालत तक जुलूस निकाला गया. इस दौरान महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में आरोपी से ‘महिला पुलिस जिंदाबाद’ और ‘बहन हमको माफ करो’ के नारे लगवाए गए, कान पकड़कर माफी मंगवाई गई और सड़क पर उठक-बैठक भी करवाई गई.
उल्लेखनीय है कि 27 दिसंबर को तमनार में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान उग्र भीड़ ने ड्यूटी पर तैनात महिला पुलिसकर्मी के साथ मारपीट करते हुए अभद्रता की थी. इस मामले में अब तक चित्रसेन साव सहित छह आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. जबकि एक अन्य आरोपी फरार हैं. जिसकी तलाश जारी है.
इधर तमनार मामले में कथित मुख्य आरोपी के साथ की गई जुलूस की कार्रवाई को लेकर एक नया मोड़ सामने आया है. आरोपी पिता को इंसाफ दिलाने की मांग को लेकर उसकी बेटी पूनम साव कलेक्टर कार्यालय पहुंची और प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की गुहार लगाई. बेटी ने आरोप लगाया कि सार्वजनिक रुप से अपमानजनक तरीके से जुलूस निकालना कानूनन गलत है. और इससे परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है.

इससे आरोपी की मानसिक स्थिति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है. उसका यह भी कहना है कि आगे भविष्य में चित्रसेन साव का मानसिक संतुलन बिगड़ता है या किसी भी तरह की कोई घटना होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित पुलिस अधिकारियों की होगी.
पूनम साव के अधिवक्ता राजीव कालिया का कहना है कि महिला पुलिस आरक्षक के साथ जो घटना हुई, वह निंदनीय है और कानून के अनुसार उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि पुलिस कानून अपने हाथ में ले. चित्रसेन साव ने अगर कोई जुर्म किया है, तो उसकी सजा अदालत तय करेगी. लेकिन पुलिस द्वारा दी गई सामाजिक सजा पूरी तरह अनुचित है और इस पर विधिसम्मत कार्रवाई होनी चाहिए. वे इस मामले में कोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी कर रहे हैं.
पूरा मामला अब कानून-व्यवस्था, पुलिस कार्रवाई की सीमाओं और मानवाधिकारों के दृष्टिकोण से भी चर्चा में आ गया है. प्रशासनिक स्तर पर शिकायत पर विचार किए जाने की बात कही जा रही है. वहीं पुलिस अपने कदम को महिला पुलिसकर्मी के सम्मान और अनुशासन बनाए रखने के लिए जरुरी कार्रवाई बता रही है.

एसपी से मिले कांग्रेस दिग्गज
जनसुनवाई के दौरान हुई हिंसक झड़प का मामला अब राजनीतिक मोड़ ले चुका है. पूर्व मंत्री उमेश पटेल और लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार ने इस मुद्दे को लेकर पुलिस अधीक्षक (SP) दिव्यांग पटेल से मुलाकात की. कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने साफ किया कि पुलिस की कार्रवाई सिर्फ ठोस सबूतों पर आधारित होनी चाहिए और किसी भी निर्दोष ग्रामीण को परेशान नहीं किया जाना चाहिए.
पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने कहा कि तमनार की घटना दुर्भाग्यपूर्ण थी. लेकिन अब इसकी आड़ में उन लोगों के नाम भी सामने आ रहे हैं. जो घटना के वक्त मौके पर मौजूद ही नहीं थे. उन्होंने आशंका जताई कि व्यक्तिगत रंजिश के चलते निर्दोष ग्रामीणों को फंसाने की कोशिश की जा रही है. पटेल ने प्रशासन पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अगर समय रहते ग्रामीणों से संवाद किया जाता. तो हालात इतने नहीं बिगड़ते.
लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार ने कहा कि इस आंदोलन में कुछ बाहरी और असामाजिक तत्वों की भूमिका भी संदिग्ध है. उन्होंने मांग किया कि पूरी जांच निष्पक्ष हो ताकि असली गुनहगार पकड़े जाएं. सिदार के मुताबिक आंदोलन में शामिल सभी महिलाओं और ग्रामीणों को सामूहिक रुप से आरोपी मानना इंसाफ के खिलाफ है.
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