134 साल पुराने 'लाल चर्च' में क्रिसमस की धूम, जमकर हई आतिशबाजी, फायर शो का आयोजन, की गई विशेष प्रार्थना, भाई चारे का दिया संदेश
Christmas celebrations at the 134-year-old Red Church include fireworks, a fire show, special prayers, and a message of brotherhood.
जगदलपुर : नगर एवं अंचल में क्रिसमस धूमधाम से मनाया गया. चर्चों को आकर्षक फूलों और लाइटों से सजाया गया था. जगदलपुर शहर के सबसे पुराने और प्रमुख चर्च लाल चर्च में फायर शो का आयोजन सोशल कमेटी के अध्यक्ष मनीष सीरिल और सदस्यों द्वारा किया गया. रंग बिरंगे पटाखे लाल चर्च के ऊपर से छोड़े गए और शानदार आतिशबाजी की गई.
सुबह 9 बजे क्रिसमस की आराधना शुरु की गई थी. विभिन्न चर्चो के पास्टर्स ने आराधना का संचालन कर देश, छत्तीसगढ़ और बस्तर में शांति अमन-चैन के लिए विशेष आराधना की गई. लाल चर्च में आराधना का संचालन रेवरेंट लॉरेंस दास द्वारा किया गया. उपदेश बिशप एस सुना द्वारा दिया गया.
उन्होंने मसीही समुदाय के साथ छत्तीसगढ़ और बस्तर में अमन चैन के लिए प्रार्थना की. लाल चर्च में क्रिसमस केक काटा गया और उन सभी लोगों को वितरित किया गया. जो श्रद्धालु चर्च में मौजूद थे और जो बाहर से आए हुए थे. फादर द्वारा क्रिसमस के उपलक्ष में विशेष गीत गाए गए. लोकल प्रिचरों द्वारा भी विशेष गीत गाए गए. अर्पण की विधि भी पूरी की गई. इसी तरह बकावंड, नगरनार, बस्तर एवं अन्य स्थानों में भी क्रिसमस की धूम रही.
कांग्रेस परिवार के पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं ने मैरी क्रिसमस डे के पावन अवसर पर शहर के विभिन्न चर्चों मेथोंडिस्ट चर्च, ऐपिस्कोपाल चर्च,लूथरान चर्च, बाईबिल मिशन फिला लाडेल्फीया गोस्पेल चर्च,चर्च ऑफ़ किंगडम,बिशप हाउस, निर्मल सदन पंहुचकर मसीह समाज के सदस्यों को क्रिसमस डे की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं प्रेषित की गई.
शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य ने मसीह समाज के समाज प्रमुख व सदस्यों को बधाई देते हुए कहा यह पर्व प्रेम, शांति और भाईचारे का संदेश देता है. यह लोगों को आपसी सहयोग, दया और करुणा की भावना को अपनाने के लिए प्रेरित करता है. मौर्य ने प्रभु ईसा मसीह सभी लोगों के खुशहाली की कामना की.
पूर्व विधायक रेखचंद जैन ने कहा प्रभु यीशु मसीह का जन्मदिन सबके जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली लेकर आए. प्रभु यीशु ने सामाजिक समानता पर बल दिया और मानव जाति के कल्याण का मार्ग दिखाया. उन्होंने सत्य, करुणा और प्रेम की शिक्षा दी और कमजोर और गरीबों की मदद के लिए प्रेरित किया. यीशु के संदेश दीन-दुखियों की मदद और समाज के उत्थान के लिए अनुकरणीय है. आप सभी को मैरी क्रिसमस डे पर हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं प्रेषित करता हूं.
इस दौरान पूर्व महापौर जतिन जायसवाल, उदयनाथ जेम्स, अनवर खान, कुलदीप भदौरिया, विजय सिंह, युवा कांग्रेस अध्यक्ष निकेत राज झा, पार्षद सूर्यापानी, शुभम यदू,अफरोज बेगम, जस्टिन भवानी, कमलेश पाठक, नीतीश शर्मा, अभय सिंह आदि मौजूद रहे.
बता दें कि बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर शहर में मौजूद चंदैय्या मेमोरियल मेथोडिस्ट एपिस्कोपल चर्च संभाग का सबसे पुराना चर्च है. जो लाल चर्च के नाम से जाना जाता है. सीबी वार्ड मिशनरी ने सन 1890 ई में इस चर्च की नींव रखी थी. तब बस्तर के तत्कालीन महाराजा प्रवीर चंद्र भंजदेव ने सीबी वार्ड को करीब 1 हजार एकड़ जमीन दान में दी थी. जिसके बाद इस कैंपस में हॉस्टल, स्कूल और चर्च बनाया गया. लाल चर्च 1933 ई में पूरी तरह से बनकर तैयार हुआ था.
मसीह समाज के सदस्य और चर्च प्रॉपर्टी के अध्यक्ष रत्नेश बेंजविन ने बताया कि "जब इस गिरजाघर को बनाया गया, तब इसमें बेल, गोंद, लुई और चूना से ईंट की जुड़ाई की गई. यह जुड़ाई इतनी मजबूत है कि आज भी चर्च की दीवार में कहीं भी कोई दरार नहीं पड़े हैं. हालांकि हर साल जरूर इस चर्च की रंग रोगन की जाती है, लेकिन 19वीं सदी के चर्च में आज तक कोई रिकंस्ट्रक्शन नहीं किया गया है. इसकी दीवारों से लेकर इसकी नींव 100 साल पुरानी है. चर्च में किसी तरह का कोई प्लास्टर नहीं किया गया है, ना ही इस चर्च को बनाने के लिए कोई मशीन का उपयोग किया गया है.
इस चर्च की दीवार यहां पहुंचने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र होती है. इसके अलावा यहां लगे झूमर भी 100 साल पुराने हैं. इस चर्च की ऊंचाई इतनी है कि कई किलोमीटर दूर से भी इस गिरजाघर के ऊपर लगी क्रॉस नजर आती है. इसके अलावा चर्च की बेल को भी कई किमी दूर तक लोगों को सुनाई देती है. खासकर क्रिसमस के मौके पर भाईचारे का परिचय देते हुए हर धर्म और हर समाज के लोग इस गिरजाघर में पहुंचकर भगवान यीशु से प्रेयर करते हैं और इस चर्च की भव्यता को भी निहारते हैं.
क्रिसमस में चर्च की सजावट से लेकर कैरोल सिंगिंग, आराधना, ड्रामा, गीत-संगीत प्रतियोगिता भी आयोजित की जाती है, ताकि छोटे बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्ग इस कार्यक्रम का लुफ्त उठा सके. क्रिसमस पर्व की खुशियों में कैरोल सिंगिंग का खास महत्व होता है. कैरोल सिंगिंग आराधना को एक अलग ही मोड़ दे देती है. ये गीत क्रिसमस की खुशियों को दुगनी कर देती है. रात के समय दर्जनों की संख्या में कैरोल सिंगिंग के सदस्यों के द्वारा घर-घर जाकर गीत संगीत के माध्यम से प्रभु यीशु की आराधना की जाती है. इस दौरान सांता क्लॉज बनकर घर के लोगों को तोहफा दिया जाता है. कैरोल सिंगिंग के सदस्यों के द्वारा नाचते गाते और झूमते हुए मसीह समाज के प्रत्येक लोगों के घरों तक पहुंचते हैं. गीत संगीत के माध्यम से आराधना करने के बाद परिवार के सदस्यों के लिए प्रभु यीशु मसीह से विशेष प्रार्थना की जाती है.
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