बलात्कार के दोषी सिद्ध अपराधी आसुमल उर्फ आसाराम को गुजरात हाईकोर्ट से स्वास्थ्य आधार पर तीन महीने की मिली जमानत
Convicted rape convict Asumal alias Asaram got three months bail from Gujarat High Court on health grounds
अहमदाबाद : गुजरात हाई कोर्ट ने रेप के दोषी आसाराम को राहत दी है. चिकित्सा आधार पर गुजरात हाई कोर्ट ने आसाराम को तीन महीने की जमानत दी है. सुनवाई के दौरान जस्टिस इलेश वोरा की राय का जस्टिस एएस सुपेहिया ने समर्थन किया और आसाराम की तीन महीने की जमानत मंजूर की गई.
गौरतलब है कि रेप का दोषी आसाराम गुजरात और जोधपुर में सजा काट रहा है. फिलहाल वह अंतरिम जमानत पर बाहर है. हाल ही में उसने 6 महीने की स्थायी जमानत के लिए अप्लाई किया था. गुजरात हाई कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई की और गुरुवार 27 मार्च को फैसला सुरक्षित रख लिया था. जमानत की मांग करते हुए आसाराम ने कोर्ट में अपनी मेडिकल रिपोर्ट पेश की थी.
इस दौरान उसने कहा था कि वह 86 साल का हो चुका है और दुनिया में बहुत कम ही लोग हैं जो 75 की उम्र के बाद मेजर सर्जरी सहन कर पाते हैं. इससे पहले जनवरी 2025 में आसाराम को सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च तक के लिए मेडिकल ग्राउंड पर जमानत मिली थी.
जानकारी के लिए बता दें कि आसाराम अपने गुरुकुल की एक युवती से रेप के मामले में आखिरी सांस तक जेल की सजा काट रहा है. यह मामला साल 2013 का है. बताया जा रहा है कि आसाराम हार्ट पेशंट है और उसे जेल में रहते हुए हार्ट अटैक भी आ चुका है. पीड़िता की बहन ने ही आसाराम के बेटे नारायण साईं के खिलाफ भी रेप केस दर्ज कराया था. साल 2019 में नारायण साईं को भी दोषी पाते हुए कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास की सजा दी थी. यह मामला भी साल 2013 का था.
जानिए मामला
मध्य प्रदेश के परसरिया रोड पर स्थित छिंदवाड़ा आश्रम में एक छात्रा अचानक बेहोश होकर गिर गई थी. जिसके बाद आसाराम की अनुयायी शिल्पी ने उस छात्रा के माता-पिता को कहा कि इस छात्रा पर भूत प्रेत का साया है और उसके निराकरण के लिए बाबा यानी कि आसाराम की मदद लेनी पड़ेगी। नाबालिग छात्रा के माता-पिता घबरा गए और उसे अपने साथ उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर अपने निवास पर लेकर आ गए. इसके बाद उन्हें जानकारी मिली कि आसाराम जोधपुर के मणाई आश्रम में है, अब यहां से शुरु होती है कहानी। जिसके बाद आसाराम की मुश्किलें खड़ी हो गई थी.
तारीख थी 14 अगस्त और साल था 2013...छात्रा के माता-पिता छात्रा को लेकर जोधपुर के मणाई आश्रम पहुंचे. इस छात्रा को आसाराम के पास इलाज के लिए लाया गया था. नाबालिग के माता-पिता का यह कहना था कि इस छात्रा के ऊपर भूत है और आसाराम पर उन्हें विश्वास था कि वह भूत को उतार देंगे.
क्या हुआ था उस दिन मणाई आश्रम में ?
बताया जा रहा है कि आसाराम के कहने पर नाबालिग छात्रा को उसके माता-पिता ने आसाराम की कुटिया में भेज दिया और खुद कुटिया के बाहर जप करने बैठ गए. आसाराम पर आरोप यह था कि कुटिया में जब बच्ची पहुंची तो आसाराम ने उसके साथ करीब डेढ़ घंटे तक दुष्कर्म किया. आसाराम की इन हरकतों से जब छात्रा डर गई तो आसाराम ने उसे डराया-धमकाया और इस घटना के बारे में किसी को भी न बताने की हिदायत दी और कहा कि अगर वह किसी को बताएगी तो उसके माता-पिता की हत्या कर दी जाएगी. इसके बाद पीड़ित छात्रा घबरा गई और उसने किसी को कुछ नहीं बताया. लेकिन जब अपने घर पहुंची तो उसने सारी बात अपने माता-पिता को बताई तो उसके माता-पिता सन्न रह गए.
जोधपुर में हुई घटना की दिल्ली में करवाई गई एफआईआर
इस घटना की जीरो नंबर एफआईआर 19 अगस्त 2013 को दिल्ली के कमला नगर थाने में पेश की गई. मुकदमा दर्ज होने के बाद फौरन पीड़िता का मेडिकल करवाया गया और उसे मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया.
आसाराम को किया गया गिरफ्तार
दिल्ली के कमला नगर थाने से एफआईआर जोधपुर ट्रांसफर की गई. इसके बाद जोधपुर पुलिस हरकत में आई और 31 अगस्त और 1 सितंबर की मध्य रात में आसाराम को इंदौर के आश्रम से गिरफ्तार कर जोधपुर लाया गया. जहां कोर्ट में पेश करने के बाद कोर्ट ने आसाराम को जेल भेज दिया.
जमानत के लिए नामचीन वकीलों की कर दी फौज खड़ी
इसके बाद आसाराम ने जमानत हासिल करने के लिए अधीनस्थ न्यायालय, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक कई याचिकाएं पेश की. लेकिन आसाराम को कभी भी अंतरिम जमानत तक नहीं मिली. आसाराम ने जमानत हासिल करने के लिए दिग्गज वकीलों की फौज खड़ी कर दी. जिसमें राम जेठमलानी, सुब्रमण्यम स्वामी, मुकुल रोहतगी, केटीएस तुलसी और सिद्धार्थ लूथरा सहित कई नामी गिरामी विधि विशेषज्ञ वकीलों ने आसाराम की पैरवी अधीनस्थ न्यायालय से लेकर सुप्रीम कोर्ट में की लेकिन आसाराम को कभी आंशिक राहत तक नहीं मिली.
सुप्रीम कोर्ट में पेश कर दिया झूठा स्वास्थ्य प्रमाण पत्र
आसाराम को जमानत दिलाने के लिए आसाराम के पैरोकार रवि राय वागे ने सुप्रीम कोर्ट में जोधपुर सेंट्रल जेल डिस्पेंसरी का एक झूठा स्वास्थ्य प्रमाण पत्र पेश कर सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आसाराम का स्वास्थ्य ठीक नहीं है. ऐसे में उसे जमानत दी जानी चाहिए. लेकिन जांच में वह स्वास्थ्य प्रमाण पत्र झूठा पाया गया. जिसके बाद आसाराम के खिलाफ जोधपुर में एक और केस दर्ज किया गया. लेकिन आसाराम ने इस मामले में रवि राय वागे को अपना पैरोकार नियुक्त करने को लेकर मना कर दिया. आसाराम ने कोर्ट को बताया कि वह रवि राय वागे से कभी नहीं मिले और ना ही उसे पैरोकार नियुक्त किया.
जज मधुसूदन शर्मा की कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला
करीब 5 सालों तक लंबी सुनवाई चलने के बाद एससी एसटी कोर्ट जज मधुसूदन शर्मा की कोर्ट ने आसाराम के मामले में 453 पेज का ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आसाराम को जिंदगी की आखिरी सांस तक जेल में रहने की सजा सुना दी.
दो बार मिली आसाराम को पैरोल
आसाराम को 5 महीने पहले 7 दिन की पैरोल मिली थी, जिसे 5 दिन और बढ़ाया गया था. इसके बाद आसाराम को 10 दिसंबर 2024 को 17 दिन की पैरोल मिली. इस दौरान आसाराम ने कई बार सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और अधीनस्थ न्यायालय के दरवाजे खटखटाया. लेकिन आसाराम को कहीं भी राहत नहीं मिली.
आखिर सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी अंतरिम राहत
आखिर मंगलवार को वह दिन आ गया. जब सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम के मेडिकल रिकॉर्ड को देखते हुए अंतरिम जमानत 31 मार्च तक स्वीकार की है. लेकिन इस आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने साफ निर्देश दिए कि आसाराम इस दौरान सबूत के साथ छेड़छाड़ करने का प्रयास नहीं करेगा. इसके अलावा अपने अनुयायियों से नहीं मिलेगा.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/CvTzhhITF4mGrrt8ulk6CI



