विकलांगता प्रमाणपत्र का दुरुपयोग, टीचर ने दो दशकों तक उठाया फायदा!, प्रधान पाठक लवकेश साहू पर लगा गंभीर आरोप, जांच शुरु

Disability certificate misused, teacher took advantage for two decades! Serious allegations against head teacher Lavekesh Sahu, investigation launched

विकलांगता प्रमाणपत्र का दुरुपयोग, टीचर ने दो दशकों तक उठाया फायदा!, प्रधान पाठक लवकेश साहू पर लगा गंभीर आरोप, जांच शुरु

सूरजपुर : उमेशपुर के सरकारी स्कूल में कार्यरत प्रधान पाठक लोकेश साहू पर गंभीर आरोप लगे हैं कि एक्सीडेंट के बाद विकलांगता प्रमाण पत्र बनवाकर पिछले करीब 20 साल से शासन के नियमों का कथित रुप से दुरुपयोग किया जा रहा है. जबकि लोकेश साहू कुछ ही दिन में एकदम स्वस्थ हो गए थे? मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप की स्थिति है.
सूत्रों के मुताबिक संबंधित शिक्षक ने एक्सीडेंट के बाद दिव्यांग श्रेणी में प्रमाण पत्र हासिल कर लिया. जो कुछ ही महीनों में एकदम स्वस्थ हो गए. आरोप है कि इसी आधार पर न सिर्फ सेवा में बने रहे. बल्कि शासन द्वारा दिव्यांग कर्मियों को मिलने वाली विभिन्न सुविधाओं और लाभों का भी लाभ उठाते रहे.
मिली जानकारी के मुताबिकअगर कोई व्यक्ति एक्सीडेंट होने पर विकलांग प्रमाण पत्र बनवा कर नौकरी कर रहा तो उसे समय-समय पर जांच करवाते रहना चाहिए. जिसे अस्थाई प्रमाण पत्र कहा जाता है.
स्थाई विकलांग प्रमाण:– अगर वह व्यक्ति कुछ महीनों में एकदम स्वस्थ हो जाता है तो फिर स्थाई प्रमाण पत्र कैसे बना, कई सवाल खड़े हो जाते हैं.
लोगों का कहना है यदि नियमों को दरकिनार कर लाभ लिया गया है तो यह शासन व्यवस्था और अन्य पात्र दिव्यांग अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है.
विशेषज्ञों के मुताबिक दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में चिकित्सकीय बोर्ड की स्पष्ट रिपोर्ट जरुरी होती है. अगर प्रमाण पत्र नियमों के खिलाफ या गलत तथ्यों के आधार पर जारी हुआ है, तो इसकी जांच कराई जानी चाहिए.
मामले को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारी ने कहा है कि नियमानुसार जांच कराई जा रही है. अगर किसी तरह की अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी.
अब सवाल उठ रहा है कि:
क्या प्रमाण पत्र जारी करते समय सभी नियमों का पालन हुआ था?
क्या सेवा में बने रहने और सुविधाओं के लाभ लेने में पारदर्शिता बरती गई?
क्या विभागीय स्तर पर निगरानी में कमी रही?
क्या अस्थाई प्रमाण पत्र बना तो समय – समय पर जांच हुआ?
क्या स्थाई प्रमाण पत्र बना तो व्यक्ति एकदम स्वस्थ कैसे हो सकता है?
क्या आरोप सही साबित होता है तो नौकरी के साथ रिकभरी और जेल,जुर्माना होगा?
क्या नेताओं के दबाव में ये फाइलों के नीचे दब कर रह जाएगा?
मिली जानकारी के अनुसार इनकी पहुंच बड़े बड़े नेताओं तक है?
विश्वसनीय सूत्र का कहना है – वास्तविकता में सही से जांच की जाए तो प्रमाण तो गलत है ही साथ में लोकेश साहू अचल संपत्ति के मालिक भी हैं और इनकी पहुंच ऊपर तक है. जरूरत पड़ी तो पैसों के दम पर नेता से लेकर अधिकारी तक को चुप करा सकता है?
अगर आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रमाण पत्र जारी करने और विभागीय निगरानी प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा.
(नोट: मामले की निष्पक्ष जांच जरुरी है. आरोपों की पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद ही मानी जानी चाहिए.)
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