हाथियों का बेखौफ आतंक, हाथी के हमले से महिला की दर्दनाक मौत, छत-विक्षत मिली लाश, ग्रामीणों का वन विभाग पर फूटा गुस्सा
Fearless terror of elephants, woman dies a painful death due to elephant attack, body found mutilated, villagers' anger erupts on forest department
सूरजपुर : हाथी और मानव द्वंद को लेकर सुर्खियों मे रहने वाला सूरजपुर जिले का वन परिक्षेत्र प्रतापपुर फिर से सुर्खियों में आ गया है. सूरजपुर जिले के वन परिक्षेत्र प्रतापपुर अंतर्गत धरमपुर के गौरा जंगल में 25-30 हाथियों का दल पिछले कुछ दिनों से विचरण कर रहा है. जहां प्रतापपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत गौरा निवासी सुबासो जाती पनिका महिला को हाथियों ने कुचलकर मौत के घाट उतार दिया और शव को छत विक्षत कर दिया. यह मामला गौरा गांव के स्कूलपारा बस्ती का है.
मिली जानकारी के मुताबिक रात के करीब 2 बजे हाथियों का दल ग्राम पंचायत गौरा के बीच बस्ती में घुसा और अचानक दहाड़ने लगे. जिसकी आवाज सुनकर घर में सो रही मां और मानसिक रुप से कमजोर बेटे ने भागने की कोशिश की. बेटा पास की सोलर टंकी पर चढ़कर सुरक्षित रहा. लेकिन महिला सुबासो टेकाम उम्र 53 साल हाथियों के चपेट में आ गई और घर से महज 20 कदम दूर हाथियों कुचलकर महिला को दर्दनाक मौत के घाट उतार दिया.
जिससे गांव मे अफरा तफरी का माहौल हो गया। महिला की मौत से गांव में दहशत का माहौल है। वहीं आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ नाराजगी जताई. गांव वालों की नाराजगी को देखते हुए मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने समझाइश दी. तब जाकर माहौल शांत हुआ. वन विभाग ने पीड़ित परिवार को तात्कालिक राहत के रुप में 25 हजार रुपये की सहायता राशि दी. हालांकि ग्रामीणों ने यह मांग दोहराई कि हाथियों की बढ़ती गतिविधियों को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग को तत्काल सुरक्षात्मक कदम उठाने चाहिए. जिससे भविष्य में ऐसे हादसे न हों.
ग्रामीणों ने कहा कि कहा वन विभाग के द्वारा गांव में जब हाथी प्रवेश करता है तो किसी तरह की से कोई सूचना नहीं दी जाती है. जिसकी वजह से हम गांव वालों को यह दर्दनाक दिल दहला दहला देने वाली घटना देखने को मिल रही है. फोन करने पर भी विभाग फॉरेस्ट बिट कार्ड फोन उठाकर हम गांव वालों के बात को गंभीरता से ना लेकर टालमटोल करते हैं. जब हाथी हमारे गांव में आता है तो बिजली गोल कर दिया जाता है. जिससे हम गांव वालों को काफी परेशानी होती है. और रात के अंधेरे में हाथी किस तरफ से हमला कर दे पता नहीं चलता और हम गांव वालों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है.
ग्रामीणों ने तत्काल मुआवजा सहित एक व्यक्ति की नौकरी की मांग किया. ताकि घर में रह रहे मानसिक रुप से कमजोर व्यक्ति का भरण पोषण हो सके. क्योंकि मां के मौत हो जाने पर वह बेसहारा हो गया है. शासन प्रशासन घटना की गंभीरता को देखते हुए फौरन कोई निष्कर्ष निकाले. ताकि गांव के लोग खुद को सुरक्षित और चैन से रह सकें. क्षेत्र में इस तरह से दर्दनाक घटना न घट सके. इस तरफ शासन-प्रशासन को कोई ठोस कदम उठाते हुए लोगों के सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम करें. आखिर कब तक भोले भाले ग्रामीण लोगों जान जाती रहेगी?
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