50 हजार की रिश्वत का वीडियो वायरल होने के बाद कलेक्टर ने की कार्रवाई, पटवारी ऋषिपुरी सस्पेंड, सात दिन में आरोप पत्र पेश करने का फरमान
Following the circulation of a video showing a bribe of 50,000, the Collector has taken action: Patwari Rishipuri has been suspended, and an order has been issued to submit a charge sheet within seven days.
बिलासपुर : सरकारी कामकाज के बदले रिश्वत लेने के आरोपों ने एक बार फिर राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सोशल मीडिया और समाचार पोर्टलों पर 50 हजार रुपये की कथित रिश्वत से संबंधित वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है. कलेक्टर कार्यालय की भू-अभिलेख शाखा ने तत्कालीन पटवारी ऋषिपुरी गोस्वामी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है.
माँमले में प्रशासन ने सात दिनों के भीतर आरोप पत्र पेश करने का निर्देश दिया है. अब विभागीय जांच में यह साफ होगा कि वायरल वीडियो और अन्य सबूतों के आधार पर आरोपों की स्थिति क्या है.
कलेक्टर कार्यालय से 29 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के मुताबिक ऋषिपुरी गोस्वामी पटवारी हल्का नंबर 14 में पदस्थ रहे हैं और उनकी वर्तमान पदस्थापना हल्का नंबर 5 धुर्वाकारी, तहसील चपचपेडी में थी. उनके खिलाफ 50 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेने से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया और समाचार पोर्टलों पर प्रसारित हुआ था. मामले में तहसीलदार चपचपेडी ने 28 अक्टूबर 2026 को जांच प्रतिवेदन पेश किया. जिसके आधार पर प्रशासन ने आरोपों को गंभीर मानते हुए निलंबन की कार्रवाई की.
आदेश में उल्लेख किया गया है कि संबंधित पटवारी के कथित कृत्य से शासन की छवि धूमिल हुई है. इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 के विपरीत गंभीर कदाचरण की श्रेणी में माना गया है. इसके बाद छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए निलंबन आदेश जारी किया गया.
निलंबन अवधि के दौरान ऋषिपुरी गोस्वामी का मुख्यालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), कोटा कार्यालय निर्धारित किया गया है. इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा. वहीं, तहसीलदार चपचपेडी को निर्देशित किया गया है कि संबंधित पटवारी के खिलाफ आरोप पत्र तैयार कर सात दिनों के भीतर कलेक्टर कार्यालय में पेश करें.
पटवारी राजस्व व्यवस्था की अहम कड़ी है. जमीन के रिकॉर्ड, नामांतरण और अन्य राजस्व संबंधी कार्यों के लिए आम नागरिकों को इसी व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ता है. ऐसे में रिश्वतखोरी के आरोप सामने आना सरकारी कामकाज की पारदर्शिता और आम जनता के भरोसे पर सवाल खड़े करता है. लोगों को उम्मीद रहती है कि उनके वैधानिक काम बिना अनावश्यक परेशानी और अनुचित लेन-देन के पूरे हों.
इस मामले में प्रशासन की कार्रवाई ने राजस्व विभाग के कर्मचारियों की जवाबदेही को लेकर स्पष्ट संदेश दिया है. हालांकि अब सबसे अहम सवाल यह है कि विभागीय जांच कितनी तेजी और निष्पक्षता से पूरी होती है और मिले सबूतों के आधार पर आगे क्या फैसला लिया जाता है.
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