मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के कार्यक्रम में दूल्हे बने ‘सामान’, मालवाहक गाड़ियों में ठूंसकर पहुंचाई गई बारात, आयोजन की व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
Grooms were treated as "goods" during the Chief Minister's Kanya Vivah Yojana (Chief Minister's Marriage Scheme), with the wedding procession crammed into cargo vehicles, raising questions about the arrangements.
कबीरधाम : शादी…जहां दूल्हा आमतौर पर घोड़ी, सजी-धजी कार या लग्ज़री गाड़ियों में शान से बारात लेकर पहुंचता है. लेकिन छत्तीसगढ़ में जो दृश्य सामने आया. उसने सरकार की सोच और संवेदनशीलता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया.
बीते 10 फरवरी को मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत प्रदेश भर में 6 हजार से ज्यादा जोड़े एक साथ वैवाहिक बंधन में बंधे. सरकार ने इसे “सामूहिक खुशियों का उत्सव” बताया, दूल्हा-दुल्हन ने मुख्यमंत्री को बधाइयाँ दीं. तस्वीरें खिंचीं. मंच सजा… लेकिन मंच के बाहर हकीकत बेहद शर्मनाक थी.
कबीरधाम में 272 शादियाँ, मगर बारात माल ढोने वाली गाड़ियों में!
कबीरधाम जिले में 10 फरवरी को 272 जोड़ों की शादी कराई गई. यहाँ दूल्हे घोड़ी या बस में नहीं. बल्कि छोटा हाथी, मालवाहक वाहनों में गधे की तरह ठूंस-ठूंस कर विवाह स्थल तक लाए गए.
कपड़े शाही, व्यवस्था अपमानजनक
काला चश्मा, सिर पर पगड़ी, पीला कुर्ता पहने दूल्हे गाजे-बाजे के साथ झूमते जरुर दिखे. लेकिन जिस वाहन में उन्हें बैठाया गया — वह इंसानों के लिए नहीं, सामान ढोने के लिए होते हैं. वही गरीब दूल्हे मुस्कुरा रहे थे. क्योंकि इस सिस्टम ने उन्हें सिखा दिया है —अपमान भी मिले, तो सवाल मत करो...
योजना के नाम पर क्या साबित करना चाहती है सरकार?
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का मकसद आर्थिक रुप से कमजोर परिवारों को सम्मानजनक विवाह उपलब्ध कराना है. लेकिन जब दूल्हे ही मालवाहक गाड़ियों में ठूंसे जाएँ. तो यह योजना सहायता नहीं, व्यवस्था की असंवेदनशीलता बन जाती है.
अब सरकार का ही हिसाब पढ़िए. मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत सरकार खुद मानती है -
कुल सहायता राशि: प्रति कन्या ₹50,000
₹35,000 — वधु के बैंक खाते में (ड्राफ्ट से)
₹7,000 — उपहार सामग्री
₹8,000 — आयोजन और व्यवस्थाओं के लिए
पात्रता:
छत्तीसगढ़ की मूल निवासी
18 साल से ज्यादा उम्र की कन्याएं
BPL या मुख्यमंत्री खाद्यान्न कार्डधारी परिवार
आम जनमानस में सरकार से सीधे सवाल
क्या सरकार के पास बस का किराया देने तक का फंड नहीं था?
क्या मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना सिर्फ कागज़ और प्रचार की योजना है?
क्या गरीब दूल्हे इंसान नहीं, जिन्हें मालवाहक गाड़ी में ढोया गया?
अगर हर दूल्हे को बस में बैठा दिया जाता, तो क्या सरकार दिवालिया हो जाती?
क्या यही है “सुशासन” और “संवेदनशील सरकार” का मॉडल?
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