रिकवरी राशि में MD और पंडरिया विधायक ने किया 23.82 करोड़ का भ्रष्टाचार!, युवा कांग्रेस-एनएसयूआई SDM तहसील कार्यालय का करेगी घेराव

MD and Pandariya MLA committed corruption of Rs 2382 crore in recovery amount Youth Congress NSUI will surround SDM Tehsil office

रिकवरी राशि में MD और पंडरिया विधायक ने किया 23.82 करोड़ का भ्रष्टाचार!, युवा कांग्रेस-एनएसयूआई SDM तहसील कार्यालय का करेगी घेराव

रिकवरी राशि में MD और पंडरिया विधायक ने किया 23.82 करोड़ का भ्रष्टाचार -विधायक नीलू चंद्रवंशी

पंडरिया : सरदार वल्लभभाई पटेल शक्कर कारखाना में हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ जिला कांग्रेस कमेटी के बैनर तले और पंडरिया के पूर्व प्रत्याशी नीलू चंद्रवंशी के नेतृत्व में जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हरि साहू की मौजूदगी में 9 सूत्रीय मांगो को लेकर शक्कर मिल का घेराव किया गया.
घेराव कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पंडरिया विधानसभा प्रत्याशी रहे नीलू चन्द्रवंशी ने कहा कि शक्कर कारखाना पंडरिया के एमडी सतीश पाटले ने पंडरिया विधायक श्रीमती भावना बोहरा के साथ मिलीभगत कर रिकवरी राशि 11.61 करोड़ रुपए और 12.21 करोड़ रुपए की शक्कर को चोरी छिपे बेचकर कुल 23.82 करोड़ का भारी भरकम घोटाला किया है. वहीं इस बात की जानकारी प्रदेश सरकार को होने के बाद भी प्रदेश सरकार द्वारा इस बड़े घोटाले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है.
चन्द्रवंशी ने जानकारी देते हुए बताया कि गन्ना पैराई सत्र 2023-24 में पूरेे देश मे गुड़ और शक्कर के उत्पाद मे बेतहासा वृद्धि हुई. अगर छत्तीसगढ़ राज्य में संचालित सहकारी शक्कर उत्पादक कारखानो की ही बात की जाए तो मां महामाया सहकारी शक्कर कारखाना सरगुजा में पिछले साल शक्कर का उत्पादन 8.99 प्रतिशत हुआ था इस साल 9.95 प्रतिशत उत्पादन हुआ है यानि करीब 1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. भोरमदेव सहकारी शक्कर उत्पादक कारखाना कवर्धा में गन्ना रिकवरी दर पिछले साल 12.31 प्रतिशत दर्ज की गई तो इस साल 12.50 प्रतिशत उत्पादन हुआ है. यानि 0.19 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. दंतेश्वरी सहकारी शक्कर उत्पादक कारखाना बालोद में पिछले साल शक्कर का उत्पादन 10.84 प्रतिशत हुआ था. इस साल 11 प्रतिशत उत्पादन हुआ है. यानि 0.16 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. वहीं दूसरी तरफ सरदार वल्ल्भ भाई पटेल सहकारी शक्कर उत्पादक कारखाना पंडरिया की बात की जाए तो यहां पिछले साल शक्कर का उत्पादन 13.15 प्रतिशत हुआ था. लेकिन इस वर्ष यह अचानक घटकर 12.78 प्रतिशत हो गया. यानि 0.37 की कमी आई है.
चन्द्रवंशी ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब देश सहित प्रदेश के दूसरे शक्कर उत्पादक कारखानो में रिक्वरी दर में वृद्धि हो रही है. तो फिर पंडरिया शक्कर कारखाना में रिकवरी दर में कमी आना किसी के गले नहीं उतर रहा है. उन्होने आरोप लगाते हुए कहा कि निश्चित रुप से दाल में काला नहीं बल्कि पूरी की पूरी दाल काली है. यही वजह है कि आज करोड़ों के इस घोटाले को बारीकी से जांच कर दोषियो के कड़ी से कड़ी कार्यवाही की मांग की गई.
इस कार्यक्रम को होरी साहू राधेलाल भास्कर, ब्लाक अध्यक्ष उतरा दिवाकर, नवीन जयसवाल, रामचरण पटेल, आनंद सींग, सीमा अनंत, चंद्रभान कोशले ईश्वर शरण वैष्णव, तेजस्वी चंद्रवंशी, वाल्मीकि वर्मा, आकाश केशरवानी, मनीष शर्मा, शिव वर्मा घनश्याम साहू संजू तिवारी, सुकचैन भास्कर मणिकांत त्रिपाठी ने सम्बोधित किया कार्यक्रम का संचालन रवि चंद्रवंशी ने किया.
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युवा कांग्रेस-एनएसयूआई घरघोड़ा एसडीएम तहसील कार्यालय का करेगी घेराव

रायगढ़/घरघोड़ा : रायगढ़ ज़िले के सबसे पुराने तहसील/अनुविभाग कार्यालय अपने अनोखे कार्यों/आम जनता के हितों की अनदेखी के मामले में सुर्ख़ियों में रहती है. ताजा मामला में घरघोड़ा की सड़कों पर दर्जनों की तादाद में युवाओं की टोली उस्मान बेग के नेतृत्व में एसडीएम,तहसील व थाना दफ़्तर में कई मांगों और मनमानियो को लेकर स्थानीय प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए 12 दिन का समय देते हुए ज्ञापन दिया है.
पत्र में उस्मान बेग व टीम ने युवा कांग्रेस व एनएसयूआई के बैनर तले लिखा है कि
हमारी मांगे नहीं माने जाने पर 23 अक्टूबर को एसडीएम/तहसील कार्यालय का घेराव कर उग्र प्रदर्शन करेंगे.
वही कहा है कि क्षेत्र की समस्याओं पर उनके निराकरण के लिए हमारे द्वारा लंबे समय से मांग की जा रही है  लेकिन उसके बाद भी आज तक शासन प्रशासन द्वारा कोई सुनवाई नहीं की गई है. बेरोज़गारी और अपराध में जो बढ़ोतरी हुई है. उस पर रोकथाम लगे. क्षेत्र के उद्योगों व खदानों स्थानीय लोगो को रोज़गार में प्राथमिकता मिले और ज़्यादा से ज़्यादा रोजगार मिले.
क्षेत्र में किसानों को जमींनो का वर्तमान रेट से मुवाअज़ा मिले. घरघोड़ा तमनार सड़क पर भारी वाहनो का रोकथाम 24 घंटे रहे. उद्योगों व खदानों की मनमानी बंद हो. क्षेत्र की सड़को की हालत सुधरे, ओवरलोड व फ्लाई ऐश गाड़ियो की मनमानी पर रोक लगे. छोटे दुकानदारों को विस्थापित करने से पहले न हटाया जाए और न नोटिस देकर परेशान किया जाए.
वही कहा कि इन मांगों को फौरन पूरा करे या अमल में लाए वरना 12 दिन के बाद 23 अक्टूबर को घरघोड़ा एसडीएम व तहसील कार्यालय का घेराव कर उग्र प्रदर्शन करेंगे. जिसकी ज़िम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी.
इसकी प्रतिलिपि उस्मान बेग ने लालजीत सिह राठिया धर्मजयगढ़ विधानसभा, कांग्रेस/युवा कांग्रेस/ एनएसयूआई/ प्रदेश, ज़िला, ब्लॉक प्रमुख, कलेक्टर रायगढ़, एसपी रायगढ़, थाना प्रभारी घरघोड़ा को दी.
उस्मान बेग ने कहा है कि बीजेपी शासन काल  में मनमानियो का दौर ज़ोरो से है. गुंडागर्दी चरम पर है. आवाज़ उठाने वालो का गला घोटा जा रहा है. वही आम जनता का कोई काम नहीं हो रहा है. प्रशासन को ये समझना होगा शासन आते जाते रहेगा. लेकिन हर छोटे से छोटे व्यक्ति का सही और जायज काम पूरा होना चाहिए.
अब देखने वाली बात होगी की शासन प्रशासन उस्मान बेग व टीम के मांगों को कब तक पूरा करती है. वरना इनकी टोली हजारों की तादाद में घेराव कर उग्र प्रदर्शन करने तैयार बैठी है. जिसकी तैयारी भी जोरो शोरों से चालू है. वही इनके आंदोलन करने का तरीका भी निराला रहा है. जिसका पूरा रायगढ़ और छत्तीसगढ़ गवाह है.
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श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल और महर्षि शिक्षा संस्थान में भ्रष्टाचार, एनएसयूआई का विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन, भूख हड़ताल की चेतावनी

बिलासपुर : एनएसयूआई जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह के नेतृत्व में एनएसयूआई छात्र प्रतिनिधि मंडल ने बिलासपुर कलेक्टर अवनीश शरण को भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) टी. आर. साहू और दो प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर 15 दिनों के भीतर कोई कार्रवाई नहीं की गई. तो एनएसयूआई भूख हड़ताल पर बैठने को मजबूर होगी.
ज्ञापन में मुख्यतः दो संस्थानों श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल और महर्षि शिक्षा संस्थान (डीएलएड) में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है. एनएसयूआई ने इन दोनों संस्थानों में फर्जीवाड़ा और नियमों के उल्लंघन के कई बिंदुओं पर ध्यान आकर्षित किया. जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह ने बताया कि पहले भी इन मुद्दों को जिला शिक्षा अधिकारी टी. आर. साहू के सामने रखा गया था. लेकिन अब तक कोई उचित कार्रवाई नहीं की गई.
श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल में अनियमितताएं:
1. सीबीएसई मान्यता के बिना ही स्कूल द्वारा सीबीएसई के पाठ्यक्रम, मूल्यांकन और परीक्षाओं का संचालन.
2. बिना सीजीबीएसई या सीबीएसई मान्यता के कक्षा 9वीं का संचालन.
3. छात्र-छात्राओं और उनके परिजनों से शैक्षणिक सामग्री और गणवेश (यूनिफॉर्म) के नाम पर मोटी रकम वसूलना.
4. बिना डीएलएड या बीएड योग्यताधारी शिक्षकों की नियुक्ति.
एनएसयूआई द्वारा इन मुद्दों पर शिकायतें पहले भी दर्ज कराई गईं, जिसके बाद एक जांच समिति का गठन किया गया था। हालांकि जांच समिति की रिपोर्ट को एनएसयूआई ने गलत और पक्षपाती बताया. जांच के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. जिससे संगठन में असंतोष व्याप्त है.
महर्षि शिक्षा संस्थान (डीएलएड) और महर्षि यूनिवर्सिटी में भ्रष्टाचार:
एनएसयूआई ने महर्षि शिक्षा संस्थान (डीएलएड) और महर्षि यूनिवर्सिटी में एक ही भूमि और प्राध्यापकों के दस्तावेजों के आधार पर दो अलग-अलग संस्थाओं का संचालन करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि यह नियमों का साफ उल्लंघन है. और इससे दोनों संस्थान अवैध तरीके से संचालित हो रहे हैं.
एनएसयूआई ने यह भी आरोप लगाया कि महर्षि यूनिवर्सिटी के कुलसचिव डॉ. विजय गारुडिक ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों के नाम का दुरुपयोग करते हुए फर्जी पत्र जारी किए. जिसमें छात्रों को अवैधानिक तरीके से यूनिवर्सिटी में बुलाकर उन्हें मानसिक और आर्थिक तरीके से प्रताड़ित किया गया.
जिला शिक्षा अधिकारी पर आरोप
एनएसयूआई जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह ने डीईओ टी. आर. साहू पर भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए. उनका कहना है कि साहू ने शैक्षणिक संस्थानों से अवैध धनलाभ अर्जित किया और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया. इसके अलावा, एसीबी द्वारा साहू के घर पर छापा मारकर आय से अधिक संपत्ति मिलने के बावजूद वे अभी भी पद पर बने हुए हैं.
एनएसयूआई की मांगें
एनएसयूआई ने निम्नलिखित मांगें कलेक्टर को ज्ञापन के जरिए पेश की:
1. श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल की सभी गतिविधियों की जांच कर उसके संचालन पर रोक लगाई जाए.
2. महर्षि यूनिवर्सिटी और महर्षि शिक्षा संस्थान (डीएलएड) के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए और जांच पूरी होने तक इन संस्थानों में प्रवेश पर रोक लगाई जाए.
3. जांच समिति द्वारा दिए गए गलत प्रतिवेदन और उसके सदस्यों पर कड़ी कार्रवाई की जाए.
4. डीईओ टी. आर. साहू को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए.
भूख हड़ताल की चेतावनी
एनएसयूआई ने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर 15 दिनों के भीतर इन मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. तो संगठन भूख हड़ताल पर बैठने के लिए मजबूर होगा. कलेक्टर अवनीश शरण से मुलाकात के दौरान एनएसयूआई प्रतिनिधि मंडल में कई प्रमुख पदाधिकारी और छात्र-छात्राओं के परिजन भी शामिल थे.
यह ज्ञापन सिर्फ भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने का प्रतीक नहीं है. बल्कि शिक्षा के व्यापारीकरण और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम है. एनएसयूआई का यह कदम बिलासपुर जिले में शैक्षणिक संस्थानों की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक अहम प्रयास साबित हो सकता है.
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भूपेश बघेल का ईवीएम पर सवाल: हरियाणा का परीणाम और छत्तीसगढ़ के रिजल्ट को बताया एक जैसा

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हाल ही में हरियाणा चुनाव परिणामों के संदर्भ में ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) पर सवाल उठाए हैं. उनका मानना है कि चुनावी नतीजों में जो बदलाव देखने को मिला. वह बैलेट पेपर और ईवीएम के बीच का फर्क था.
बघेल के मुताबिक हरियाणा और छत्तीसगढ़ दोनों में बैलेट पेपर की गिनती में कांग्रेस आगे थी. लेकिन जैसे ही ईवीएम की गिनती शुरु हुई. पार्टी पिछड़ने लगी. यह बयान भारतीय चुनाव प्रक्रिया और ईवीएम की विश्वसनीयता पर एक बार फिर बहस को जन्म देता है.
भूपेश बघेल ने ईवीएम की प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है. उन्होंने कहा कि हर जगह ईवीएम में गड़बड़ी नहीं की जाती, बल्कि शंका बनाए रखने के लिए कुछ जगहों पर ही ऐसा होता है. उनका दावा है कि ईवीएम का खेल चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकता है. हालांकि ईवीएम का उपयोग भारत के चुनावों में एक दशक से ज्यादा समय से हो रहा है और इसे लेकर कई बार संदेह उठे हैं. लेकिन चुनाव आयोग हमेशा यह कहता आया है कि ईवीएम सुरक्षित हैं और इनमें गड़बड़ी संभव नहीं है.
बघेल का यह बयान उस समय आया है जब छत्तीसगढ़ और हरियाणा के चुनाव परिणाम लगभग समान दिखे. उन्होंने साफ कहा कि बैलेट पेपर की गिनती में कांग्रेस आगे थी. लेकिन ईवीएम की गिनती ने पार्टी की स्थिति को कमजोर कर दिया. यह टिप्पणी चुनाव प्रक्रिया और तकनीकी हस्तक्षेप पर नए सिरे से चर्चा का आह्वान करती है.
बढ़ते अपराध और महिलाओं की सुरक्षा पर चिंता
रतनपुर स्थित मां महामाया मंदिर में दर्शन करने के बाद भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में अपराध बढ़ने पर भी चिंता व्यक्त की. उन्होंने भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पिछले 10 महीनों में प्रदेश में अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ा है. महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर उन्होंने गहरी चिंता जताई और सरकार की विफलता पर सवाल उठाए. उनका मानना है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सुशासन की बात सिर्फ दिखावा बनकर रह गई है. क्योंकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है.
लोहारीडीह घटना और पुलिस की भूमिका
लोहारीडीह घटना पर बात करते हुए पूर्व सीएम ने पुलिस की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि पुलिस अगर चाहती तो इस घटना को रोक सकती थी. लेकिन उसने ऐसा नहीं किया. उनका आरोप है कि सरकार छत्तीसगढ़ के लोगों की सुरक्षा को गंभीरता से नहीं ले रही है. यहां तक कि उन्होंने मुख्यमंत्री और गृहमंत्री पर आरोप लगाते हुए पूछा कि क्या वे 167 लोगों को मृत्युदंड दिलाने की कोशिश कर रहे हैं?
व्यक्तिगत आरोपों और राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप
अपने बेटे के खिलाफ चल रही जांच और पुलिसिया कार्रवाई को लेकर भी बघेल ने सीधे तौर पर डॉ. रमन सिंह पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि जब डॉ. रमन सिंह मुख्यमंत्री थे. तब से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है. ईडी, आईटी और सीबीआई जैसी एजेंसियों का उपयोग उनके खिलाफ किया गया और अब उनके परिवार को भी निशाना बनाया जा रहा है. यह आरोप भारतीय राजनीति में परिवारवाद और राजनीतिक प्रतिशोध की बहस को फिर से उभारता है.
नक्सलवाद पर विचार
नक्सलवाद पर बोलते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को समाप्त करने की कोशिशें होनी चाहिए. लेकिन भाजपा सरकार का दावा कि 2026 तक नक्सलवाद खत्म हो जाएगा. उन्हें अवास्तविक लगता है. उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीण और आदिवासी लोगों पर फर्जी एनकाउंटर किए जा रहे हैं. जिससे नक्सलवाद की समस्या और बढ़ती जा रही है. हमारे सरकार में एक भी फर्जी एनकाउंटर नहीं हुआ है.
भूपेश बघेल के ये बयान भाजपा सरकार की नीतियों पर सवाल खड़ा करते हैं और ईवीएम के उपयोग से लेकर नक्सलवाद और अपराध तक कई अहम् मुद्दों पर उनकी असहमति को सामने लाते हैं. बघेल का दावा है कि प्रदेश की वर्तमान सरकार प्रदेश के लोगों की सुरक्षा और चुनावी प्रक्रिया दोनों पर सही तरीके से ध्यान नहीं दे रही है. यह देखना दिलचस्प होगा कि इन मुद्दों पर भाजपा सरकार की प्रतिक्रिया क्या होती है और आगामी चुनावों में इन सवालों का क्या असर पड़ता है.
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