रुद्र महायज्ञ में नकली शंकराचार्य अधोक्षजानंद के आने का विरोध, झम्मन शास्त्री बोले- आयोजक पर हो कार्रवाई, सीएम से करेंगे शिकायत
Opposition to arrival of fake Shankaracharya Adhokshajanand in Rudra Mahayagya, Jhamman Shastri said- action should be taken against the organizer, will complain to CM
दुर्ग : दुर्ग जिले के जामुल में रुद्र महायज्ञ में नकली शंकराचार्य के आने का विरोध धर्मसंघ, पीठपरिषद आदित्य वाहिनी और आनंद वाहिनी ने किया है. पीठ परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष झम्मन शास्त्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, 21 से 27 अप्रैल तक दुर्ग में रुद्र महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है. जिसमें नकली शंकराचार्य अधोक्षजानंद को बुलाया जा रहा है. उन्हें गोवर्धन मठ पुरी जगतगुरु शंकराचार्य के रूप में प्रचारित कर आमंत्रित किया जा रहा है. जिसका हम विरोध करते हैं.
मिली जानकारी के मुताबिक इस महायज्ञ में विशेष रुप से श्री वैष्णव पीठाधीश्वर प्रयागराज एवं मध्यप्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री तथा जगद्गुरु शंकराचार्य श्री स्वामी अधोक्षजानंद देव तीर्थ जी महाराज के आगमन की पुष्टि की गई है. इस कार्यक्रम का नेतृत्व स्वामी यदुनंदन सरस्वती महाराज कर रहे हैं. आयोजन का उद्देश्य राष्ट्रीय एकता, अखंडता और विश्व कल्याण को समर्पित बताया गया है. वहीं जगद्गुरु शंकराचार्य श्री स्वामी अधोक्षजानंद देव तीर्थ जी महाराज को आदित्यवाहिनी ने फर्जी शंकराचार्य बताते हुए विरोध जताया है.
श्री स्वामी अधोक्षजानंद के आगमन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. आदित्य वाहिनी नामक एक धार्मिक संगठन ने स्वामी अधोक्षजानंद पर फर्जी शंकराचार्य होने का आरोप लगाते हुए छत्तीसगढ़ में उनके आगमन पर रोक लगाने की मांग की है.
झम्मन शास्त्री ने कहा, यह फर्जी मामला है. इसमें कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए. आयोजक के ऊपर भी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. वर्तमान में पुरी के प्रामाणिक शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज है. दुर्ग में पूरे मामले को लेकर हमने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर जानकारी दी है. आगे मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी बात मुख्यमंत्री रखेंगे.
कबीरधाम में आनंदवाहिनी ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
कबीरधाम में भी धर्ममठ के आनंदवाहिनी और अदित्यवाहिनी के सदस्यों ने इस आयोजन पर आपत्ति जताई है और अधोक्षजानंद के छत्तीसगढ़ प्रवास पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है. कार्यकर्ताओं ने अधोक्षजानंद तीर्थ के ऊपर कार्रवाई करने की मांग करते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा.
इस पूरे मामले ने एक धार्मिक आयोजन को राजनीतिक और धार्मिक बहस का केंद्र बना दिया है. जहां एक तरफ लाखों श्रद्धालु महायज्ञ में भाग लेने की तैयारी कर रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ शंकराचार्य की मान्यता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. यह देखना अब दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस विवाद को कैसे संभालता है और धार्मिक आयोजनों की गरिमा को बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं.
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