शिक्षा के मंदिर में अवैध वसूली के गंभीर आरोप, बीएड छात्रा से वसूले 51 हजार, रसीद दी सिर्फ 31 की, विरोध करने पर कॉलेज छोड़ने की धमकी
Serious allegations of illegal extortion in the temple of education, 51 thousand rupees extorted from a B.Ed student, receipt given for only 31, threat to leave the college if she protested
महासमुंद : छत्तीसगढ़ के महासमुंद में शिक्षा के मंदिर अब सवालों के घेरे में हैं. जहां ज्ञान देने का दावा किया जाता है. वहीं छात्रों से नियमों के खिलाफ फीस वसूली के गंभीर आरोप सामने आए हैं. प्राइवेट स्कूल और कॉलेज संचालकों पर लंबे समय से शिक्षा को सेवा नहीं. बल्कि उद्योग बनाने के आरोप लगते रहे हैं. अब महासमुंद शहर से एक नया मामला इन आरोपों को और मजबूत करता नजर आ रहा है.
बताया जा रहा है कि कुछ निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा शासन-प्रशासन के निर्धारित नियमों की अनदेखी करते हुए मनमानी फीस वसूली की जा रही है. इतना ही नहीं, विरोध करने वाले छात्रों पर मानसिक दबाव डालने और उनके भविष्य से खिलवाड़ करने जैसे आरोप भी लग रहे हैं.
ताजा मामला महासमुंद शहर स्थित श्याम बालाजी कॉलेज से जुड़ा है. बी.एड. की छात्रा कशिश बरकाती ने कॉलेज प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. छात्रा का कहना है कि बी.एड. कोर्स की निर्धारित फीस 31 हजार रुपये बताई गई थी. लेकिन कॉलेज प्रबंधन ने उनसे 51 हजार रुपये वसूल लिए.
जब छात्रा ने जमा की गई पूरी फीस की रसीद मांगी. तो प्रबंधन ने सिर्फ 31 हजार रुपये की रसीद दी. आरोप है कि अतिरिक्त राशि और रसीद को लेकर सवाल उठाने पर छात्रा को कॉलेज छोड़ने की धमकी दी गई.
डरने के बजाय छात्रा ने साहस दिखाया और मामले की ऑनलाइन शिकायत विश्वविद्यालय के कुलपति से की. साथ ही जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर जांच और इंसाफ की मांग की है. छात्रा का कहना है कि अगर छात्रों की आवाज दबाई गई. तो कई और छात्र ऐसे शोषण का शिकार होते रहेंगे.
कॉलेज प्रबंधन ने क्या कहा?
कॉलेज प्रबंधन ने स्वीकार किया है कि कुल 51 हजार रुपये फीस ली गई है. उन्होंने कहा कि एक्स्ट्रा 20 हजार रुपये की राशि का बिल पक्के तौर पर नहीं दिया जाता है. छात्रा के आरोपों पर प्रबंधन का कहना है कि छात्रा के आरोप बेबुनियाद हैं. छात्रा खुद पढ़ाई में ध्यान नहीं देती रही है. कॉलेज में पढ़ाई के दौरान मोबाइल में रील बनाना सहित कई बेवजह की गतिविधियों में शामिल रहती थी. जिस वजह से उसके नंबर कम आए हैं.
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शिक्षा अब सेवा नहीं, बल्कि कमाई का जरिया बन चुकी है? क्या नियमों से ऊपर निजी संस्थान खुद को समझने लगे हैं? और क्या आवाज उठाने वाले छात्रों को ही सजा दी जा रही है? अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं… देखना होगा कि छात्रा को इंसाफ मिलता है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LNzck3m4z7w0Qys8cbPFkB



