दवाई लेकर लौट रहे नदी में बहे तीन युवक, दो ने तैरकर बचाई जान, लहरों में समा गया सरपंच का देवर, आखिर कब बनेगा पुल?

Three youths returning with medicines were swept away in the river, two saved their lives by swimming, the sarpanch's brother-in-law was drowned in the waves, when will the bridge be built?

दवाई लेकर लौट रहे नदी में बहे तीन युवक, दो ने तैरकर बचाई जान, लहरों में समा गया सरपंच का देवर, आखिर कब बनेगा पुल?

गरियाबंद : गरियाबंद जिले के रावनडिग्गी से खरीदी गई दवाई किसी बीमारी को तो क्या बचाती. लेकिन धमतरी की काजल नदी ने इलाज का बिल सीधा ज़िंदगी से वसूल लिया. रविवार शाम को जबर्रा गांव के तीन ग्रामीण दवाई लेकर लौट रहे थे. बीच रास्ते में नदी का उफान मौत बनकर सामने आ गया. दो किसी तरह तैरकर किनारे निकल गए. लेकिन मनिहार मरकाम उम्र 34 साल लहरों में समा गया. दर्दनाक यह भी कि मृतक युवक सरपंच का देवर था.
जबर्रा गांव के सुकलाल, राजकुमार उम्र 35 साल और मनिहार मरकाम बाइक से गरियाबंद जिले के रावनडिग्गी दवाई लेने गए थे. लौटते वक्त शाम सवा पांच बजे काजल नदी का बहाव तेज मिला. तीनों ने बाइक किनारे खड़ी की. और हाथ पकड़कर नदी पार करने लगे. तभी पानी का स्तर अचानक बढ़ा और तीनों बह गए. सुकलाल व राजकुमार ने किसी तरह तैरकर जान बचाई. लेकिन मनिहार की लाश अगले दिन डेढ़ किलोमीटर दूर बरामद हुई.
ग्रामीणों ने बताया कि इस नदी पर पुल की मांग पिछले 24 सालों से चल रही है. बजट में नाम आया. नेताओं ने वादा किया. लेकिन हकीकत यह है कि हर साल बारिश में दर्जनों गाँव मुनईकेरा, रतावाडीह, भोभलाबाहरा, देवगांव, जबर्रा, खरखा और मारागांव मुख्यालय से कट जाते हैं. मजबूरी में ग्रामीणों को इलाज, दवाई या जरुरत की चीज़ों के लिए जान हथेली पर रखकर नदी पार करनी पड़ती है.
नेता जी कहते हैं हर गांव को दवाई, हर घर को इलाज मगर असली हालत यह है कि गरियाबंद की दवाई लेकर लौटे लोग धमतरी की नदी में स्थायी इलाज पा जाते हैं. सवाल उठता है कि आखिर यह पुल कब बनेगा जब अगली बार चुनावी भाषण में नेता जी फिर से कहेंगे आपका वोट दीजिए, पुल जरुर बनेगा?
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