अमलीपदर में 24 घंटे में गूंजी खुशियों की 6 किलकारी, तेज आंधी तूफान से हुए अंधेरे में मोबाइल की रोशनी बन गई जिंदगी की किरण

6 joyous cries resonated in Amlipar in 24 hours, mobile light became a ray of life in the darkness caused by strong storm, doctors created new history

अमलीपदर में 24 घंटे में गूंजी खुशियों की 6 किलकारी, तेज आंधी तूफान से हुए अंधेरे में मोबाइल की रोशनी बन गई जिंदगी की किरण

गरियाबंद : गरियाबंद जिले के अमलीपदर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बीते 24 घंटों के खुशियों की छह किलकारियां गूंजीं. ये किलकारियां सिर्फ नवजात शिशुओं की नहीं थीं. बल्कि मुश्किल हालात में उम्मीद की नई किरण भी बनी. तेज आंधी और बारिश की वजह से अस्पताल में लगातार 18 घंटे तक बिजली बाधित रही. मगर इन मुश्किल हालात में भी डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने हार नहीं मानी. मोबाइल फोन की छोटी-सी रोशनी के सहारे उन्होंने सुरक्षित प्रसव कराते हुए मां और शिशु की जिंदगी बचाई.
सीएमएचओ डॉ गार्गी यदु पाल ने बताया कि रविवार रात आए तेज आंधी-तूफान के चलते पूरे इलाके की बिजली आपूर्ति ठप हो गई थी. स्वास्थ्य केंद्र में सोलर सिस्टम की व्यवस्था थी. लेकिन लगातार 10 घंटे इस्तेमाल की वजह से अंतिम प्रसव के ठीक पहले ही उसकी बैटरी पूरी तरह डाउन हो गई. बिजली न होने की वजह से अस्पताल का ऑपरेशन थिएटर और प्रसव कक्ष अंधेरे में डूब गया. ऐसे मुश्किल हालात में भी डॉक्टरों और स्टाफ ने हार नहीं मानी. मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट के सहारे प्रसव कराया. स्वास्थ्यकर्मियों ने पूरी सजगता और सूझबूझ के साथ प्रसव संपन्न कराया. एक हाथ में मोबाइल और दूसरे हाथ से जिंदगी को थामने की जद्दोजहद-  यह नजारा अस्पताल में मौजूद हर किसी के लिए यादगार बन गया.
इस दौरान सीएचसी में लीलाबाई निषाद, सदराई बाई गोड़, हीरा बाई, बुनादी बाई निषाद, रुखमणी बाई और उलसो बाई टंकेश्वर गोड़ ने नवजात को जन्म दिया. डिलीवरी के बाद सभी नवजात शिशु और उनकी माताएं स्वस्थ हैं.
अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर इंद्रजीत भारद्वाज ने बताया कि सीमित संसाधनों और अंधेरे के बीच स्टाफ ने जिस सेवा भावना और समर्पण का परिचय दिया. वह अनुकरणीय है.
उन्होंने कहा कि पांच प्रसव के बाद सोलर की बैटरी डाउन होने से अंधेरा हो गया था. अगर डॉक्टरों और नर्सों ने फौरन मोबाइल लाइट के भरोसे प्रसव का फैसला न लिया होता. तो महिला और उनके परिजनों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ सकता था. कामयाब ऑपरेशन में लीला, खुशबू और चित्रा सिस्टर का योगदान रहा.
वहीं स्थानीय लोगों ने भी डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के इस अदम्य साहस और सेवा-भावना की जमकर सराहना की है. उनका कहना है कि संकट की इस घड़ी में अमलीपदर सीएचसी में जो जज्बा और समर्पण देखने को मिला, वह पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LNzck3m4z7w0Qys8cbPFkB