भाजपा नेता व कोयला व्यापारी ने की खुदकुशी, सुसाइट नोट में चार कारोबारियों पर गंभीर लगा आरोप, कुछ दिन पहले लगाई थी इंसाफ की गुहार
A coal trader close to a senior BJP leader committed suicide names of some people were written in the suicide note created panic police engaged in investigation
बिलासपुर/सरगांव : भाजपा नेता और बिल्हा के कोयला कारोबारी नरेंद्र कौशिक ने तिफरा स्थित अपने घर में सल्फास खाकर खुदकुशी कर ली.कौशिक बीते 6-7 महीनों से मानसिक और आर्थिक दबाव में थे, उन्होंने एक सुसाइड नोट छोड़ा. जिसमें उन्होंने अपनी खुदकुशी के लिए चार कोयला कारोबारियों और एक भाजपा के वरिष्ठ नेता को जिम्मेदार ठहराया.
मिली जानकारी के मुताबिक नरेंद्र कौशिक कोयला व्यापार में लाखों रुपये की धोखाधड़ी की वजह से आर्थिक संकट में फंस गए थे. धोखाधड़ी करने वालों ने उनके कोयले और लोडर को बेचकर पैसे हड़प लिया. जिससे उसकी आवक खत्म हो गई थी और इसके चलते उनका कर्ज बढ़ गया और वह लगातार मानसिक दबाव में थे.
मंगलवार को सरगांव में उन्होंने अपनी गाड़ी में बैठे-बैठे सल्फास खा लिया. नाजुक हालत में उन्हें अपोलो अस्पताल ले जाया गया. जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.खुदकुशी से पहले नरेंद्र ने एक सुसाइड नोट लिखा. जिसमें कुछ लोगों के नाम दर्ज हैं।
नरेंद्र कौशिक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक के करीबी माने जाते थे. वे कोयला व्यापार से जुड़े थे और बड़े स्तर का कारोबार करते थे. नरेंद्र ने कुछ कोयला व्यापारियों और अन्य लोगों के खिलाफ लेनदेन से जुड़ी धोखाधड़ी की शिकायत सरगांव थाना, मुंगेली एसपी और आईजी तक पहुंचाई थी. यही नहीं नरेंद्र ने लिखित शिकायत सीएम, गृह मंत्री और डीजीपी के पास भी की थी.
घटना से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है. इस घटना के बाद कोयला व्यापार जगत में सनसनी फैल गई है.
नरेन्द्र कौशिक ने सुसाइड नोट लिखा कि कोयला व्यवसायी राजेश कोटवानी, देवेन्द्र उपपेजा ऊर्फ लकी, सूरज प्रधान और संजय भट्ट को अपना कोयला डीपो किराया पर दिया था. इसके अलावा लोन में उठायी गयी गाड़ियों को भी दिया. आरोपियों को शर्तों के मुताबिक दो लोडर समेत ट्रेलर का किश्त चुकाना था. लेकिन राजेश कोटवानी और उसके साथियों ने लोडर समेत ट्रक और ट्रेलर का एक भी किश्त बैंक में जमा नहीं किया. और ना ही जीएसटी का भुगतान किया. बैंक और जीएसटी से भुगतान को लेकर लगातार दबाव था. लगातार कहने के बाद भी आरोपियों ने ना तो बैंक का लोन जमा किया और ना ही जीएसटी का भुगतान ही किया.
करीब पन्द्रह दिन पहले नरेन्द्र कौशिक ने कलेक्टर, पुलिस और आलाधिकारियों के सामने गुहार भी लगे थी कि राजेश कोटवानी ने उसके प्लाट के साथ दो लोडर समेत ट्रेलर और ट्रक पर कब्जा कर लिया है. इस मामले में एफआईआर भी दर्ज कराया. बावजूद इसके किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई और आरोपियों ने ना ही कर्ज का भुगतान किया. पुलिस और प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने की वजह से राजेश कोटवानी और उसके साथियों ने कुछ ज्यादा ही परेशान करने लगे. इन्साफ नहीं मिलने पर नरेन्द्र कौशिक हिम्मत हर गए और उन्होंने खुदकुशी जैसा गलत कदम उठा लिया.
सुसाइड नोट में नरेन्द्र कौशिक ने लिखा है कि राजेश कोटवानी संजय भट्टा, देवेन्द्र उपबेजा और सूरज के खिलाफ जिले के एक दिग्गज भाजपा नेता से भी मदद मांगा. लेकिन मदद नहीं मिली. जिसकी वजह से मजबूरी में खुदकुशी जैसा गलत कदम उठा रहा हूं.
नरेन्द्र कौशिक की खुदकुशी ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था, न्याय प्रणाली और राजनीतिक नेतृत्व की जिम्मेदारियों पर सवाल खड़े किए हैं. ऐसे मामलों में अगर समय रहते कार्रवाई की जाती तो शायद नरेन्द्र की जान बचाई जा सकती थी. इस घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है. ताकि भविष्य में कोई और व्यक्ति इस तरह के दुखद अंत तक न पहुंचे.
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