छत्तीसगढ़ के अस्पतालों में बड़ा संकट शुरु, सरकारी डॉक्टरों का ऐलान, आज से OPD और 28 से इमरजेंसी सेवायें बंद, मरीजों की बढ़ीं मुश्किलें
A major crisis has erupted in Chhattisgarh's hospitals; government doctors have announced the suspension of OPD services starting today and emergency services from the 28th, adding to the woes of patients.
रायपुर : छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में इलाज कराने आने वाले मरीजों की परेशानियां आज से बढ़ने वाली हैं. अपनी तीन सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) छत्तीसगढ़ ने आंदोलन के नए चरण का आगाज कर दिया है. संगठन के फैसले के अनुसार 24 सितंबर से प्रदेश के सभी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों और उनसे संबद्ध अस्पतालों में ओपीडी सेवाओं का पूर्ण बहिष्कार किया जा रहा है.
7 दिन की मोहलत खत्म होने के बाद लिया फैसला
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने बताया कि 18 सितंबर को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के साथ संगठन की विस्तृत वार्ता हुई थी. बैठक के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने मांगों के न्यायसंगत समाधान के लिए एक हफ्ते का समय मांगा था. शासकीय चिकित्सकों ने मंत्री के आश्वासन का सम्मान करते हुए अपना प्रस्तावित आंदोलन स्थगित कर दिया था और सेवाएं सुचारू रखी थीं. हालांकि सात दिन का समय पूरा होने के बावजूद शासन की तरफ से कोई आधिकारिक आदेश या ठोस फैसला जारी नहीं किया गया. जिससे नाराज होकर डॉक्टरों को हड़ताल पर जाने का कदम उठाना पड़ा.
मरीजों की सहूलियत के लिए चलेगी पैरेलल ओपीडी
हड़ताल के बावजूद मरीजों को होने वाली असुविधा को कम करने के लिए संगठन ने एक वैकल्पिक व्यवस्था बनाई है. जेडीए के पदाधिकारियों का कहना है कि वे ओपीडी का बहिष्कार करेंगे. लेकिन अस्पताल परिसरों में ही पैरेलल ओपीडी का संचालन किया जाएगा. इस वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए दूर-दराज से आने वाले जरूरतमंद और गंभीर मरीजों को प्राथमिक चिकित्सकीय परामर्श और परामर्श पर्ची उपलब्ध कराई जा सकेगी
शासन के ढुलमुल रवैये से डॉक्टरों में नाराजगी
हड़ताल का नेतृत्व कर रहे डॉ. पियूष श्रीवास्तव ने मीडिया से चर्चा करते हुए साफ किया कि चिकित्सकों का मकसद आम जनता या मरीजों को संकट में डालना नहीं है. वे लंबे समय से लंबित अपनी जायज प्रशासनिक और वित्तीय मांगों का समयबद्ध नीतिगत समाधान चाहते हैं. उन्होंने कहा कि संगठन ने अब तक संयम, संवाद और शांतिपूर्ण माध्यमों का ही सहारा लिया है. ऐसे में राज्य सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह मरीजों और चिकित्साकर्मियों दोनों के हित को ध्यान में रखते हुए जल्द सकारात्मक कदम उठाए.
28 सितंबर से इमरजेंसी सेवाएं भी ठप करने का अल्टीमेटम
हड़ताल की घोषणा के साथ ही एसोसिएशन ने शासन को कड़ा अल्टीमेटम भी जारी किया है. डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया गया तो 28 सितंबर से आंदोलन को और उग्र किया जाएगा. इस चरण में प्रदेश भर के पीजी रेजिडेंट्स, एमबीबीएस इंटर्न्स, बॉन्डेड मेडिकल ऑफिसर्स और सीनियर रेजिडेंट्स आपातकालीन (इमरजेंसी) सेवाओं और ट्रॉमा सेंटर के काम से भी खुद को अलग कर लेंगे.
आंदोलन को सफल बनाने के लिए एकजुटता की अपील
स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को देखते हुए जेडीए छत्तीसगढ़ ने प्रदेश भर के सभी यूजी छात्रों, इंटर्न्स, पीजी रेजिडेंट्स और वरिष्ठ डॉक्टरों से इस विरोध प्रदर्शन में एकजुट रहने का आह्वान किया है. अगर आगामी दिनों में शासन और डॉक्टरों के बीच सहमति नहीं बनती है. तो पूरे राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है.
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