शहीद हजरत इमाम हुसैन के चालीसवें पर रायपुर शहर में निकला मातमी जुलूस, बरसते पानी में हुआ इमाम हुसैन का मातम, शहादत को किया याद

A mourning procession was taken out in Raipur city to mark Chehlum (the 40th day of mourning) for the martyr Hazrat Imam Hussain; the mourning for Imam Hussain took place amidst pouring rain, honoring his martyrdom.

शहीद हजरत इमाम हुसैन के चालीसवें पर रायपुर शहर में निकला मातमी जुलूस, बरसते पानी में हुआ इमाम हुसैन का मातम, शहादत को किया याद

रायपुर : हैदरी मस्जिद ट्रस्ट मोमिनपारा द्वारा हज़रत इमाम हुसैन के चालीसवें के मौके पर दोपहर बाद विशाल मातमी जुलूस निकाला गया. हैदरी मस्जिद ट्रस्ट शीआ अस्ना अशरी मोमिन जमात के मुतवल्ली हैदर अली ने बताया कि मातमी जुलूस मोमिनपारा से शुरु होकर हांडीपारा, आज़ाद चौक, आमापारा, विवेकानंद आश्रम, राजकुमार कॉलेज, जी.ई. रोड, होते हुए देर रात ऐतिहासिक करबला तालाब पहुंचकर खत्म हुआ.
मोमिन पारा रायपुर हैदरी मस्जिद ट्रस्ट के मुतवल्ली हैदर अली ने बताया कि हज़रत इमाम हुसैन के चालीसवें के मौके पर हर साल मोमिनपारा से विशाल मातमी जुलूस निकाला जाता है. जुलूस में कलात्मक ताज़िये और अलमे मुबारक भी शामिल हुए. राजधानी में हुसैनी मातमदारों ने जुलूस में शामिल होकर हज़रत इमाम हुसैन को अश्रुपूरित श्रद्धांजली अर्पित की गई.
सुबह मोमिनपारा में कई स्थानों पर हज़रत इमाम हुसैन की याद में नज़रो न्याज़ का आयोजन हुआ|. न्याज़ का सिलसिला दोपहर बाद तक चलता रहा. हैदरी मस्जिद से 2:30 बजे परंपरागत रूप से मातमी जुलूस निकाला गया. शुरु में हज़रत इमाम हुसैन की शहादत  पर केन्द्रित दर्द भरे मरसिये पेश किये गए.
शोक का प्रतीक काले कपड़े पहने हुए मातमदारों का विशाल जनसमूह जुलूस में शामिल हुआ. हुसैनियों ने मातम करके, हुसैन के ग़म में आंसू बहाकर श्रद्धा सुमन अर्पित किये .
मातमी जुलूस में बहुत से कलात्मक ताज़िये और बड़ी तादाद में अलमे मुबारक (हुसैनी ध्वज) शामिल हुए, जो आकर्षण का केन्द्र रहे. जुलूस में अंजुमने अकबरिया, अंजुमने इमामिया और हुसैनी ग्रुप के नौहाख़्वानों ने नौहे पेश किए. 
मातमी जुलूस के दौरान जगह-जगह हज़रत इमाम हुसैन की याद में सबील, शरबत, ठंडा पानी, तबर्रूक, प्रसाद, नज़रो न्याज़,फलआदि का वितरण विभिन्न समितियों और स्थानीय नागरिकों की तरफ से श्रद्धापूर्वक किया गया. जुलूस के दौरान जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और नगर निगम की तरफ से समुचित व्यवस्था की गई. 
मातमी जुलूस को कामयाब बनाने में हैदरी मस्जिद ट्रस्ट  के सभी पदाधिकारियों, कार्यकारिणी सदस्यों, गणमान्य नागरिकों और अंजुमनों का विशेष योगदान रहा.
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