राजिम की चेतना गंजीर ने अंचल का बढ़ाया मान, आरबीआई द्वारा आयोजित पेंटिंग प्रतियोगिता में जीता मेरिटोरियस अवॉर्ड, मिला 1 लाख का पुरस्कार

While studying for PhD in Cinema Nikhil from Chhattisgarh won the meritorious award in painting competition Rajim consciousness increased the prestige of the region

राजिम की चेतना गंजीर ने अंचल का बढ़ाया मान, आरबीआई द्वारा आयोजित पेंटिंग प्रतियोगिता में जीता मेरिटोरियस अवॉर्ड, मिला 1 लाख का पुरस्कार

राजिम/बलौदाबाजार : AAFT विश्वविद्यालय, मीडिया और कला में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के साथ राजिम की रहने वाली बीएफए वर्ष 5 की छात्रा चेतना गंजीर ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा आयोजित पेंटिंग प्रतियोगिता के फाइनल राउंड में पहुंचकर कामयाबी का नया आयाम स्थापित किया. यह प्रतियोगिता आरबीआई के 90वें वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित की गई थी. नई दिल्ली में आयोजित इस प्रतियोगिता में देश भर से 71 प्रतिभागियों ने भाग लिया.
विश्वविद्यालय को प्रतिष्ठित मेरिटोरियस अवार्ड मिला. जिसने इसे देश के शीर्ष 15 कला संस्थानों में जगह दिलाई. चेतना को ₹1 लाख का पुरस्कार मिला. और विश्वविद्यालय को एक डिजिटल डिवाइस भी प्रदान की गई. चेतना की कलाकृति को आरबीआई द्वारा भविष्य में उपयोग के लिए चुना गया. जो AAFT की स्कूल ऑफ फाइन आर्ट्स के लिए गर्व का पल है.
 बलौदाबाजार विकासखंड के अंतर्गत अर्जुनी गांव के रहने वाले मशहूर कलाकार और कला शिक्षक, निखिल तिवारी ने AAFT विश्वविद्यालय, माठ, खरोरा में स्कूल ऑफ फाइन आर्ट्स के प्रमुख के रुप में अपनी कला और शिक्षा के प्रति समर्पण से राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा हासिल की है. हाल ही में आरबीआई की 90वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित पेंटिंग प्रतियोगिता में उन्होंने अपने छात्र-छात्राओं को मार्गदर्शन दिया. जिसमें उनकी बीएफए वर्ष 5 की राजिम की छात्रा चेतना गंजीर की उत्कृष्ट कृति का चयन फाइनल राउंड के लिए हुआ. चेतना की इस कामयाबी और निखिल तिवारी की मेहनत ने विश्वविद्यालय को मेरिटोरियस अवार्ड दिलाया, जिसके अंतर्गत AAFT विश्वविद्यालय को देश के शीर्ष 15 कला शैक्षणिक संस्थानों में शामिल किया गया है. इस प्रतिष्ठित जीत के अंतर्गत चेतना गंजीर को 1 लाख रुपये का नकद पुरस्कार मिलेगा और विश्वविद्यालय को एक कंप्यूटर डेस्कटॉप पुरस्कार स्वरुप मिला.
बता दें कि निखिल तिवारी का कला के प्रति रुझान बचपन से ही रहा है. उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर अर्जुनी व अंबुजा विद्या पीठ, रवान से उच्चतर माध्यमिक शिक्षा हासिल की और खैरागढ़ के इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय से चित्रकला में स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्री स्वर्ण पदक के साथ हासिल की. वर्तमान में वह AAFT विश्वविद्यालय से सिनेमा में पीएचडी कर रहे हैं. कला के प्रति अपने जुनून और समर्पण के साथ, निखिल तिवारी का मकसद ज्यादा से ज्यादा लोगों को रचनात्मक क्षेत्रों की तरफ प्रेरित करना है. उनका मानना है कि “कला सीखने का अर्थ जीवन सीखना है.
उनकी यह उपलब्धि न केवल उनकी निजी सफलता है. बल्कि कला के प्रति उनके समर्पण और शिक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है. जिसने उनके विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाई है. उनके इस उपलब्धि पर स्वस्नेही जन व ग्रामवासियों ने उनके कला के प्रति प्रेम को देखते हुए शुभकामनाएं प्रदान किया.
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