अज्ञात तेज रफ्तार वाहन के टक्कर से एक मासूम हिरण का दर्दनाक मौत, जंगल से गांव तक पसरा सन्नाटा, सवाल फिर वही, जिम्मेदार कौन?

An innocent deer died a painful death after being hit by an unknown high-speed vehicle, silence spread from the forest to the village, the question remains the same, who is responsible?

अज्ञात तेज रफ्तार वाहन के टक्कर से एक मासूम हिरण का दर्दनाक मौत, जंगल से गांव तक पसरा सन्नाटा, सवाल फिर वही, जिम्मेदार कौन?

गरियाबंद : गरियाबंद जिले में NH130C तौरेंगा के पास आज सुबह देवोभोग-गरियाबंद मार्ग पर एक मर्मांतक हादसे में एक बेकसूर हिरण की जान चली गई. अज्ञात वाहन की तेज टक्कर से मौके पर ही उसकी मौत हो गई. टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि हिरण का एक पैर पूरी तरह अलग हो गया. यह नजारा किसी को भी विचलित कर सकता है.
वन विभाग की जवाबदेही और अगला कदम वन विभाग मौके पर पहुंच चुका है. मृत हिरण का पोस्टमार्टम किया गया और आगे की कार्रवाई जारी है. अंदाजा लगाया जा रहा है कि टक्कर तेज रफ्तार वाहन से हुई होगी. जिससे जानवर को संभलने का भी मौका नहीं मिला.
मगर क्या इतनी कार्रवाई काफी है? विशेषज्ञों की राय है कि अब समय है तकनीक का सहारा लेने का. सड़क किनारे सीसीटीवी कैमरे लगाना होगा और जो वन विभाग की स्पेशल सेटेलाइट है उसको भी हमेशा एक्टिव रखना होगा और उन दोषियों को पकड़ कर सख्त कार्रवाई करना होगा. जो इस तरह के काम के लिए दोषी माने जाते हैं. जंगल बचेगा. तो जीवन बचेगा. वन्यजीव हमारे पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ हैं. अगर जंगल उजड़ते रहे. तो न सिर्फ जानवर, बल्कि इंसान भी संकट में आएगा.
यह हादसा उस कड़वे सच को उजागर करता है. जिसे हम अकसर नजरअंदाज कर देते हैं. जंगल खत्म हो रहे हैं, पानी सूख रहा है, और वन्यजीव इंसानी बस्तियों की तरफ बढ़ने को मजबूर हो रहे हैं. रफ्तार और लापरवाही की मिलीभगत उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व का यह क्षेत्र पहले से ही संवेदनशील घोषित है. जगह-जगह चेतावनी बोर्ड लगे हैं: “धीरे चलें, वन्यजीव क्षेत्र है.” लेकिन सवाल उठता है कि क्या कोई इन बोर्डों को पढ़ता भी है? तेज रफ्तार और असावधानी वन्यजीवों के लिए जानलेवा बन चुकी है.
अवैध कटाई वन अधिकार पेट के नाम पर जंगल की सफाई हो रही है. अगर समय रहते हुए अभी से हम अगर ना बचा पाएंगे तो आने वाले दिनों में सभी तरह का जीव जंतु एक फोटो और तस्वीर में ही सिमट के रह जाएगी. क्या ऐसी हालत में हमारा परिवेश संतुलन सही से बन पाएगा? क्या बिना पेड़ का हमारा जीवन चल पाएगा? पेड़ और वन्यजीवों को सिर्फ तस्वीरो में सिमटने से पहले अगर हम नहीं सुधरे तो, आने वाले हमारे पीढ़ी का भविष्य किस तरह का हो सकता है सोचिएगा जरुर..
जंगलों को बचाना, डाबरी जैसी जल संरचनाओं को भरपूर रखना और इंसानी लालच पर लगाम लगाना अब वक्त की सबसे बड़ी मांग है. यह हादसा सिर्फ एक हिरण की मौत नहीं है. यह एक चेतावनी है.
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