पंचायत चुनाव में हो रही बड़ी गड़बड़ी, हारने वाले प्रत्याशियों को बना दिया विजेता, हारे प्रत्याशी को सौंप दिया जीत का प्रमाण पत्र, मच रहा बवाल

Big irregularities are taking place in Panchayat elections, losing candidates have been declared winners, the winning certificate has been handed over to the losing candidate, causing chaos

पंचायत चुनाव में हो रही बड़ी गड़बड़ी, हारने वाले प्रत्याशियों को बना दिया विजेता, हारे प्रत्याशी को सौंप दिया जीत का प्रमाण पत्र, मच रहा बवाल

हारे प्रत्याशी को मिला प्रमाण पत्र. हो रहा बवाल

डौंडीलोहारा:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला के डौंडीलोहारा ब्लॉक में गांव मुड़खुसरा के ग्राम पंचायत चुनाव में बहुत बड़ी प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है. गणना पर्ची में हारे हुए प्रत्याशी को ज्यादा वोट दिखा कर जीत का प्रमाण पत्र दे दिया वहीं जितने वाले प्रत्याशी को कम वोट अंकित कर हर दिखा दिया गया है. जिला निर्वाचन विभाग की गलती के कारण विजय उम्मीदवार को दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं.
ग्राम पंचायत मुड़खुसरा वार्ड नंबर 02 में पंच पद के लिये 17 फरवरी को मतदान हुआ. तीन प्रत्याशी मैदान में उतरे थे. जिसमें भीषम घरत को – 35 वोट मिले, करुणा ठाकुर को – 44 वोट मिले, सिरमोतीन बाई तारम को – 07 वोट मिला था. इसमें से चुनाव के दिन करुणा ठाकुर ने सबसे ज्यादा 44 वोट पाकर 9 वोटो से विजय घोषित हुई थी. लेकिन प्रशासन और पीठासीन अधिकारियों ने प्रत्याशी सिरमौतिन बाई तारम जो कि सिर्फ 07 वोट ही पाई थी उसे जीत घोषित कर प्रमाण पत्र दे दिया गया है.
इसके चलते सभी वार्डवासी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. कि इतनी बड़ी गलती कैसे हो सकती है. बाकी गांव में कुल 14 वार्ड है 13 वार्ड का रिजल्ट सही है सिर्फ 02 वार्ड के रिजल्ट में गलती हुई है. यह मतदान केंद्र क्रमांक 175 मुड़खुसरा की घटना है और वहीं पीठासीन के द्वारा प्रत्याशी को गणना पर्ची भी नहीं दिया गया है. उक्त  जानकारी वार्ड वासीयो ने खुद दी है
वार्ड नंबर 02 मुड़खुसरा ग्रामीण अचरज और अचंभित है कि लोकतंत्र में ऐसा भी होता है पीठासीन अधिकारी की गलती को छुपाने के लिए जिला प्रशासन भी पुरजोर कोशिश कर रहा है. जबकि शासन प्रशासन का मापदंड है. इस तरह की गलती करने वाले पर तत्काल कार्यवाही की जाती है. लेकिन ऐसा ना करके उल्टा जीते प्रत्याशी को ही दफ्तरों का चक्कर लगवा रहे हैं. यह प्रशासन की घोर लापरवाही को दर्शा रहा है. जिसकी निंदा ग्रामवासी कर रहे हैं.
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दुर्ग जिले में कई जगह बवाल

दुर्ग : छत्तीसगढ़ में दुर्ग जिले के जनपद पंचायत क्षेत्र ग्राम पंचायत अंजोरा ढाबा में पंचायत चुनाव के नतीजों को लेकर बवाल हो गया है. आरोप है कि17 फरवरी को हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में पोलिंग बूथ पर तैनात पीठासीन अधिकारी ने गलत परिणाम जारी कर दिया. इतना ही नहीं. उन्होंने विजेता घोषित प्रत्याशी के बजाय हारे हुए प्रत्याशी को सर्टिफिकेट सौंप दिया.
ग्रामीणों का कहना है कि कुछ वार्डों में हारने वाले प्रत्याशियों को लापरवाही या सुनियोजित साजिश के तहत पोलिंग अधिकारियों द्वारा जीत का प्रमाण पत्र दे दिया गया. जबकि असली विजयी उम्मीदवारों को उनकी जीत से वंचित कर दिया गया. इस गड़बड़ी के खिलाफ ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया और निष्पक्ष जांच की मांग की है.
ग्रामीणों ने बताया कि दुर्ग जिले के ग्राम पंचायत के वार्ड नंबर 7, 9 और 10 में हारे हुए प्रत्याशियों को विजेता का प्रमाण-पत्र जारी करने वाली गड़बड़ी सामने आई है. उनका आरोप है कि इन वार्डों में ज्यादा वोट पाने वाले प्रत्याशियों को जानबूझकर हराया गया और हारने वाले उम्मीदवारों को ही प्रमाण-पत्र थमा दिया गया.
रिपोर्ट के मुताबिक वार्ड नंबर 7 में प्रत्याशी नेतराम साहू को 25 और योगेंद्र साहू को 24 वोट मिले थे. ग्रामीणों के मुताबिक विजयी प्रत्याशी नेतराम साहू को जीत का प्रमाण पत्र मिलना चाहिए था. लेकिन पोलिंग अधिकारी ने गलती या साज़िश के तहत योगेंद्र साहू को प्रमाण पत्र दे दिया.
ऐसा ही मामला वार्ड-9 में देखने को मिला, जहां वार्ड नंबर-9 से विजेता घोषित की गई प्रत्याशी कमलेश्वरी देशमुख के बजाय रामेश्वरी देशमुख को जीत का प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया. जबकि कमलेश्वरी देशमुख को 29 वोटों के साथ स्पष्ट बहुमत मिला था और रामेश्वरी देशमुख को महज 17 वोट मिले थे.
वार्ड नंबर 10 में भी ऐसा ही कुछ हुआ जहां 52 वोट पाने वाले प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा है. जबकि 24 वोट पाने वाले प्रत्याशी को जीत का प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया. पोलिंग अधिकारियों द्वारा की गई गड़बड़ी के खुलासे के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है.
पोलिंग अधिकारियों पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, जांच की मांग
दुुर्ग जिले में तीन वार्ड में हुई गंभीर अनियमितता से नाराज होकर ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर सौंप ज्ञापन में दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई साधारण चूक नहीं है. बल्कि एक सोची-समझी साज़िश है, जिसके तहत गलत उम्मीदवारों को जीतने का सर्टिफिकेट दिया गया है.
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