विद्यालय में छात्रों से बर्बरता, मोबाइल रखने के शक में रॉड और डंडे से पिटाई, हॉस्टल में हड़कंप, जांच के घेरे में अध्यापक और केयरटेकर
Brutality with students in school, beating with rods and sticks on suspicion of having mobile phones, commotion in hostel, teacher and caretaker under investigation
रायपुर : माना जवाहर नवोदय विद्यालय में 10वीं कक्षा के छात्रों के साथ हुए दुर्व्यवहार ने शिक्षा के मंदिरों में सुरक्षा और अनुशासन के तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. देर रात हॉस्टल में मोबाइल रखने के मामूली शक पर एक अध्यापक और केयरटेकर ने चार छात्रों के साथ बर्बरतापूर्ण मारपीट की. जिसमें एक छात्र के हाथ में गंभीर चोटें आईं. इस घटना ने न सिर्फ छात्रों और उनके अभिभावकों में भय और आक्रोश पैदा किया है. बल्कि स्कूल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं.
मिली जानकारी के मुताबिक घटना शुक्रवार की दरमियानी रात 12 बजे से 1 बजे के बीच की है. बताया जा रहा है कि स्कूल के अध्यापक डी.के. सिंह को गुप्त खबर मिली थी कि हॉस्टल में रह रहे कक्षा 10वीं के छात्र अहसाज लारी, जितेश बंजारे, पोषेन्द्र सिंह और आनंद ध्रुव के पास मोबाइल फोन हैं. जो हॉस्टल के नियमों के खिलाफ है. इस खबर के बाद डी.के. सिंह ने केयरटेकर के साथ मिलकर छात्रों के कमरों की तलाशी ली.
छात्रों से मोबाइल के बारे में पूछताछ की गई. लेकिन उनके जवाब से डी.के. सिंह संतुष्ट नहीं हुए. आरोप है कि छात्रों के “गोलमोल जवाब” देने की वजह से अध्यापक गुस्से में आ गए और उन्होंने अपना आपा खो दिया. इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर लोहे की रॉड और डंडों से छात्रों पर हमला कर दिया. छात्रों ने बताया कि मारपीट इतनी बेरहमी से की गई कि वे नीचे गिर गए और उन्हें गंभीर चोटें आईं.
पीड़ित छात्रों ने मीडिया को बताया कि मोबाइल रखने के शक में उन पर शिक्षक और केयरटेकर द्वारा न सिर्फ शारीरिक हमला किया गया. बल्कि उन्हें गालियां भी दी गईं. वे लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि यह पूरी घटना हॉस्टल में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है. छात्रों का कहना है कि अगर सीसीटीवी फुटेज की जांच की जाए. तो पूरा सच सबके सामने आ जाएगा और दोषियों के खिलाफ ठोस सबूत मिल जाएंगे.
इस घटना में छात्र अहसाज लारी के हाथ में ज्यादा चोट आई है. जबकि अन्य तीन छात्रों को भी मामूली चोटें लगी हैं. यह घटना जवाहर नवोदय विद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की प्रतिष्ठा पर एक बड़ा दाग लगाती है. जहां छात्रों को एक सुरक्षित और पोषणयुक्त वातावरण देने का वादा किया जाता है.'
घटना की जानकारी मिलते ही अहसाज लारी के पिता जो रायपुर में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर तैनात हैं. तत्काल विद्यालय पहुंचे. उन्होंने अपने बेटे और अन्य छात्रों की चोटें देखीं और स्कूल प्रशासन के इस क्रूर व्यवहार पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया. उन्होंने फौरन स्कूल के प्राचार्य को एक औपचारिक शिकायत सौंपी और आरोपी अध्यापक और केयरटेकर के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने की मांग की.
इस मामले में एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी का हस्तक्षेप यह दर्शाता है कि यह मामला सिर्फ एक सामान्य घटना नहीं है. बल्कि यह स्कूल प्रशासन की लापरवाही और छात्रों के प्रति असंवेदनशीलता का प्रतीक है.
घटना के बाद जब मीडिया ने नवोदय विद्यालय की प्राचार्य लक्ष्मी सिंह से संपर्क किया तो वे शुरु में पत्रकारों से बचती दिखीं. हालांकि बाद में उन्होंने सामने आकर इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कबूल किया कि अध्यापक डी.के. सिंह और केयरटेकर ने “आवेश में आकर” चार छात्रों के साथ मारपीट की. जिसे उन्होंने “गलत” बताया.
प्राचार्य ने आश्वासन दिया कि इस मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी. उन्होंने कहा कि सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा की जाएगी और सभी छात्रों से गहन पूछताछ कर तथ्यों का पता लगाया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि जांच पूरी होने के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा. उसके खिलाफ “उचित कार्रवाई” की जाएगी.
यह घटना छात्रों की सुरक्षा, शिक्षकों के व्यवहार और आवासीय विद्यालयों में अनुशासन के तरीकों पर एक बड़ी बहस को जन्म देती है. क्या अनुशासन के नाम पर शारीरिक हिंसा को उचित ठहराया जा सकता है? क्या इस तरह की घटनाएं भविष्य में भी होंगी. या प्रशासन इस पर लगाम लगाने के लिए सख्त कदम उठाएगा? इन सवालों का जवाब आने वाले समय में ही मिल पाएगा.
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