किसान के खाते 8 लाख पार, सहकारी बैंक और समिति की मिलीभगत जांच में हुई उजागर, नहीं हुई कोई कार्रवाई, पीड़ित ने दी भूख हड़ताल की चेतावनी

Farmer's account crossed 8 lakhs, investigation exposed collusion between cooperative bank and committee, no action taken, victim threatens hunger strike

किसान के खाते 8 लाख पार, सहकारी बैंक और समिति की मिलीभगत जांच में हुई उजागर, नहीं हुई कोई कार्रवाई, पीड़ित ने दी भूख हड़ताल की चेतावनी

गरियाबंद : तीन महीने से इंसाफ के लिए भटक रहे किसान खेमा पांडे के धैर्य का बांध अब टूटने के कगार पर है. दीवान मूड़ा सहकारी समिति के सदस्य खेमा पांडे के खाते से 7.91 लाख रुपये की फर्जी निकासी के मामले में सहकारी बैंक और समिति के कर्मचारियों की मिलीभगत की पुष्टि हो चुकी है. लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.
खेमा पांडे के मुताबिक उन्होंने बीते सीजन में 255.20 क्विंटल धान बेचा था. जिसकी रकम उन्हें अब तक नहीं मिली. वह 15 एकड़ ज़मीन के मालिक है और पिछले तीन महीने से अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं. पिछली फसल पर उनका ₹1.57 लाख का कर्ज भी अब तक नहीं पट पाया है. जिसके चलते उन्हें इस बार नया कृषि लोन भी नहीं मिला.
खेमा ने चेतावनी दी है कि अगर मुझे हफ्ते भर में मेरा पैसा नहीं मिला तो मैं देवभोग सहकारी बैंक के सामने परिवार सहित भूख हड़ताल पर बैठ जाऊंगा. अब खेती करना भी मुश्किल हो गया है.
बैंक और समिति की साजिश का जांच में हुआ खुलासा
29 अप्रैल को खेमा पांडे ने जनदर्शन में अपनी शिकायत दर्ज कराई थी. इस पर जून में उप पंजीयक कार्यालय द्वारा जांच शुरु की गई. उप पंजीयक महेश्वरी तिवारी द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के मुताबिक गोहरापदर ब्रांच से चार बार में यह रकम निकाली गई और इस निकासी में तत्कालीन बैंक मैनेजर बी.एम. ठाकुर, लेखा अधिकारी दीपराज मसीह और कैशियर की भूमिका संदिग्ध पाई गई है. समिति के ऑपरेटर ने इन बैंक अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर यह गड़बड़ी की. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह निकासी बैंकिंग प्रक्रिया के खिलाफ और फर्जीवाड़े की श्रेणी में आती है.
लापरवाही का सिलसिला जारी
मार्च में ही डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए यह साफ हो गया था कि किसकी ID से रकम निकाली गई. इसके बावजूद दोषियों पर न कोई एफआईआर हुई, न निलंबन.. उल्टा, जवाबदारी सहकारी समिति पर डालते हुए उसे ही भरपाई का नोटिस थमा दिया गया. अब तक न जिला कार्यालय ने रायपुर मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी. न ही मीडिया में कोई स्पष्ट बयान आया. नोडल अधिकारी शिवेश मिश्रा की चुप्पी और बार-बार जांच टालने की रणनीति, मामले को दबाने की कोशिश मानी जा रही है. हैरानी की बात है कि जिला कार्यालय ने अब तक रायपुर स्थित मुख्यालय में इस गड़बड़झाले की रिपोर्ट नहीं भेजी है. जबकि यह पूरा मामला अपराध की श्रेणी में आता है जिसे पुलिस को दे दिया जाना चाहिए था.
सीईओ का जवाब: रिपोर्ट आएगी तो करेंगे कार्रवाई
इस मामले में जिला सहकारी बैंक की सीईओ अपेक्षा व्यास ने कहा है कि मामला संज्ञान में आने के बाद जांच के निर्देश दिए गए हैं. रिपोर्ट आए तो उचित कार्रवाई करेंगे. दोषियों से वसूली कर किसान को रुपये दिलाए जाएंगे.
गौरतलब है कि खेमा पांडे जैसे किसान आज भी सिस्टम की लापरवाही और भ्रष्टाचार के बीच पिस रहे हैं. अगर समय रहते प्रशासन हरकत में नहीं आया तो यह सिर्फ एक किसान की लड़ाई नहीं रहेगी. बल्कि पूरी व्यवस्था पर सवाल उठाने वाली लड़ाई बन जाएगी.
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