गृहमंत्री शाह के दौरे पर पूर्व गृहमंत्री कंवर हाउस अरेस्ट, सीएम और बीजेपी अध्यक्ष से चर्चा के बावजूद धरना देने पर अड़े कंवर, आज शाम मिलेंगे BJP प्रदेश अध्यक्ष
Former Home Minister Kanwar is under house arrest during Home Minister Shah's visit. Despite discussions with the Chief Minister and BJP President, Kanwar is adamant on staging a sit-in protest. He will meet the BJP State President this evening.
रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजनीति आज एक अजीब मोड़ पर खड़ी है. एक तरफ देश के गृहमंत्री अमित शाह प्रदेश में मौजूद हैं, तो दूसरी तरफ उनकी ही पार्टी के सबसे वरिष्ठ और अनुभवी नेता, पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर को रायपुर में हाउस अरेस्ट कर दिया गया है. विडंबना देखिए जो कभी राज्य के गृहमंत्री रह चुके हैं. आज उन्हीं को गृह विभाग की पुलिस ने अपने ही समर्थकों से घेर लिया.
ननकी राम कंवर इस भवन से निकलने की कोशिश कर रहे थे और इस बीच मीडिया कर्मियों की यहां भीड़ लग गई. इस दौरान कंवर ने एक कुर्सी लगाकर बाहर फांदने की कोशिश की. मगर कामयाब नहीं हो सके. यहां मीडिया कर्मियों से बातचीत में उन्होंने कहा कि जिस तरह उन्हें रोका गया था है. वह मानकर चल रहे हैं कि उन्हें अरेस्ट कर लिया गया है.
इस दौरान कंवर ने बताया कि उनकी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से चर्चा हुई, मगर उन्होंने कलेक्टर को हटाने की मांग पर कोई जवाब नहीं दिया। उनके अलावा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव सिंह से भी उनकी बात हुई है. वे शाम को बस्तर से लौटकर उनसे मिलेंगे.
कंवर ने इस दौरान कहा कि आज धरना देने का उन्होंने ऐलान किया था, आज नहीं तो कल धरना दे देंगे. मीडिया कर्मियों द्वारा कंवर की कलेक्टर से नाराजगी के सवाल पर उन्होंने कहा कि कलेक्टर के खिलाफ काफी शिकायतें हैं. वे जनसेवा के लिए वहां भेजे गए हैं. जनता अपनी समस्याओं के लिए उनके पास नहीं जाए तो कहां जाएगी. कंवर ने कलेक्टर के कई कार्यों का उल्लेख करते हुए अपना विरोध जताया. शायद भाजपा अध्यक्ष किरण देव सिंह से चर्चा के बाद वे अगले कदम का फैसला करेंगे.
3 अक्टूबर को कोरबा कलेक्टर अजीत बसंत को हटाने की मांग को लेकर ननकी राम कंवर कोरबा से रायपुर पहुंचे. रायपुर एम्स के नजदीक टाटीबंध स्थित गहोई वैश्य भवन में रात गुज़ारी. 4 अक्टूबर की सुबह वे समर्थकों के साथ मुख्यमंत्री निवास की तरफ कूच करने वाले थे. मकसद था कोरबा कलेक्टर के कारनामों की कथा जनता और सरकार के सामने रखना.
मगर सरकार को डर था कहीं कलेक्टर को बचाने की कीमत पूरी पार्टी को न चुकानी पड़ जाए. लिहाज़ा रायपुर पुलिस ने एडिशनल एसपी, एसडीएम और सीएसपी की अगुवाई में फोर्स तैनात कर दी और गहोई भवन को ही अस्थायी जेल बना दिया.
कंवर जी के करीबी सूत्र बताते हैं कि बीती रात मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मोबाइल पर उनसे निवेदन किया आप धरना पर मत बैठिए. मैं कार्यवाही कर रहा हूँ.
इस पर कंवर जी ने साफ़ कहा बहुत अच्छी बात है, आदेश की कॉपी भेज दीजिए, मैं वापस चला जाऊँगा. मौखिक पर भरोसा नहीं करूंगा. नहीं तो धरने पर बैठूँगा, आप चाहें तो फोर्स से रोक लीजिए. क्योंकि आप सरकार के मुखिया हैं.
लेकिन लिखित आदेश नहीं आया. और सुबह होते ही फोर्स ने कंवर जी को भवन से बाहर निकलने से रोक दिया.
अब बड़े सवाल
क्या भाजपा सरकार अपने ही सबसे सीनियर लीडर की आवाज़ दबाने पर उतर आई है? क्या एक कलेक्टर की रक्षा इतनी अहम हो गई है कि इसके लिए पूर्व गृहमंत्री को ही कैद करना पड़े? और क्या वाकई अब अमित शाह को खुद कंवर जी से मिलकर वस्तुस्थिति समझनी होगी?
यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि सरकार कलेक्टर को हटाने का साहस नहीं दिखा पा रही, लेकिन सीनियर लीडर को रोकने का दुस्साहस जरुर कर रही है.
आज सवाल जनता का ही नहीं, पार्टी के भीतर का भी है. आख़िर इस सरकार में फैसले कौन ले रहा है?
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