छुरा में शासकीय कर्मचारी पर निजी कृषि भूमि से लगी सरकारी जमीन पर मकान बनाने का आरोप, इधर कुर्रा में करोड़ों की जमीन मामले में पुलिस ने लौटाया आवेदन!
In Chhura, a government employee is accused of building a house on government land adjacent to private agricultural land; meanwhile, in Kurra, the police have returned an application regarding a land dispute worth crores.
छुरा में सरकारी जमीन पर कब्जे का खेल! शासकीय कर्मचारी पर निजी कृषि भूमि से लगी सरकारी जमीन पर मकान बनाने का आरोप
गरियाबंद.छुरा : गरियाबंद जिले के छुरा क्षेत्र में शासकीय भूमि की सुरक्षा और राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर मामला सामने आया है. आरोप है कि एक शासकीय कर्मचारी अपनी निजी कृषि भूमि से लगी शासकीय जमीन पर अतिक्रमण कर मकान निर्माण करा रहा है. यह मामला ग्राम पंचायत खरखरा के आश्रित ग्राम पंडरीपानीडीह क्षेत्र का बताया जा रहा है. शिकायत के बाद संबंधित पटवारी द्वारा मौके पर भौतिक सत्यापन किए जाने और कृषि भूमि के मालिक को विभागीय सूचना तामील किए जाने की जानकारी सामने आई है.
मामले की गंभीरता इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि आरोप एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ा है. जो शासकीय सेवा में पदस्थ है. सरकारी सेवा में रहते हुए नियमों का पालन करना हर कर्मचारी की जिम्मेदारी है. ऐसे में अगर निजी कृषि भूमि से लगी शासकीय जमीन पर बिना वैधानिक अनुमति मकान निर्माण किया जा रहा है. तो यह राजस्व नियमों और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है.
शिकायतकर्ता से मिली जानकारी के मुताबिक संबंधित पटवारी ने स्थल का भौतिक सत्यापन किया. जिसमें निर्माणाधीन मकान शासकीय भूमि पर होना पाया गया. हालांकि, इस निष्कर्ष की दस्तावेजी पुष्टि के लिए पटवारी का सत्यापन प्रतिवेदन, खसरा-नक्शा और विधिवत सीमांकन का परीक्षण जरुरी है.
निजी कृषि भूमि से लगी सरकारी जमीन पर निर्माण
इस मामले में आरोप है कि संबंधित शासकीय कर्मचारी अपनी निजी कृषि भूमि से लगी सरकारी जमीन पर मकान का निर्माण करा रहा है. अगर राजस्व अभिलेखों से यह प्रमाणित होता है कि निर्माण शासकीय भूमि पर हो रहा है और इसके लिए आवश्यक वैधानिक अनुमति नहीं है. तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए.
पटवारी के भौतिक सत्यापन और विभागीय सूचना तामील किए जाने की जानकारी के बाद अब मामले की आगे की कार्रवाई अहम हो गई है. सरकारी जमीन की पहचान, सीमांकन और निर्माण की वैधानिकता स्पष्ट किए बिना प्रकरण का समाधान संभव नहीं है.
छुरा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) और संबंधित राजस्व प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में आने वाले इस मामले में भूमि की वास्तविक स्थिति और अब तक की गई कार्रवाई का रिकॉर्ड अहम होगा. शासकीय भूमि की सुरक्षा के लिए आवश्यक है कि शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई हो और सरकारी संपत्ति पर किसी भी अनधिकृत कब्जे की स्थिति को अभिलेखों के आधार पर स्पष्ट किया जाए.
नगर पंचायत के मतदाता, लेकिन निर्माण ग्राम पंचायत क्षेत्र में?
मामले का एक अन्य पहलू स्थानीय निकाय की सीमा से जुड़ा है. बताया जा रहा है कि संबंधित मोहल्ले के निवासी छुरा नगर पंचायत के मतदाता हैं. जबकि निर्माण स्थल ग्राम पंचायत खरखरा के आश्रित ग्राम पंडरीपानीडीह क्षेत्र में स्थित बताया जा रहा है.
इस स्थिति में नगर पंचायत की अधिसूचित सीमा, ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड और राजस्व नक्शे का मिलान जरूरी है. मतदाता सूची में नाम दर्ज होना अपने आप में यह प्रमाणित नहीं करता कि संबंधित जमीन नगर पंचायत की सीमा में आती है. भूमि का स्वामित्व और स्थानीय निकाय की प्रशासनिक सीमा अलग-अलग अभिलेखों से निर्धारित होती है.
अगर निर्माण स्थल नगर पंचायत की सीमा में आता है, तो संबंधित स्थानीय निकाय की भूमिका लागू नियमों के अनुसार निर्धारित होगी. अगर स्थल ग्राम पंचायत क्षेत्र में है. तो संबंधित राजस्व और पंचायत अभिलेखों के आधार पर स्थिति साफ करनी होगी.
कृषि भूमि पर आवासीय कॉलोनी, व्यपवर्तन की स्थिति भी जांच के दायरे में
क्षेत्र में कृषि भूमि से लगे हिस्से में आवासीय कॉलोनी विकसित होने की जानकारी भी सामने आई है. ऐसे में यह जांचना जरूरी है कि संबंधित भूमि का कृषि से आवासीय उपयोग में विधिवत व्यपवर्तन कराया गया है या नहीं और कॉलोनी विकास के लिए आवश्यक अनुमतियां प्राप्त की गई हैं या नहीं.
नगर पंचायत के रिकॉर्ड में किसी मोहल्ले या कॉलोनी का उल्लेख होना अपने आप में भूमि व्यपवर्तन या कॉलोनी विकास की सभी आवश्यक अनुमतियों का प्रमाण नहीं है. इसके लिए संबंधित खसरा नंबर, व्यपवर्तन आदेश, भूमि उपयोग के विवरण और कॉलोनी संबंधी स्वीकृतियों का परीक्षण जरूरी है.
अगर भूमि का व्यपवर्तन हुआ है. तो उसके आदेश और शर्तों से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है. अगर आवश्यक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है. तो लागू नियमों के अनुसार निर्माण और भूमि उपयोग की वैधानिकता की जांच होनी चाहिए
पूर्वजों के कब्जे का हवाला देकर जमीन की टुकड़ों में बिक्री की चर्चा
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक क्षेत्र में एक अन्य व्यक्ति द्वारा पूर्वजों के कब्जे का हवाला देकर जमीन को छोटे-छोटे टुकड़ों में बेचने की चर्चा भी है. इस कथित बिक्री की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण अभी बाकी है.
अगर संबंधित भूमि शासकीय दर्ज है. तो सिर्फ पूर्वजों के कब्जे का हवाला देना अपने आप में मालिकाना हक का निर्णायक प्रमाण नहीं है. वहीं, भूमि निजी स्वामित्व की होने की स्थिति में अधिकार संबंधित वैध दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों के आधार पर निर्धारित होगा.
इसलिए संबंधित जमीन के खसरा नंबर, नक्शा, स्वामित्व संबंधी दस्तावेज और पंजीकृत विक्रय विलेख की जांच आवश्यक है. अगर शासकीय भूमि को बिना वैधानिक अधिकार बेचने या हस्तांतरित करने के प्रमाण मिलते हैं. तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए.
शासकीय भूमि की सुरक्षा अब प्रशासनिक कार्रवाई पर निर्भर
छुरा क्षेत्र का यह मामला शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण, कृषि भूमि से लगी सरकारी जमीन पर निर्माण, स्थानीय निकाय की सीमा और भूमि उपयोग परिवर्तन जैसे कई अहम पहलुओं से जुड़ा है.
ताजा खबर के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LEzQMc7v4AU8DYccDDrQlb
करोड़ों की जमीन मामले में नया पेंच! पुलिस ने तहसील को लौटाया आवेदन, पूछा- आखिर FIR किसके खिलाफ दर्ज करें?
रायपुर/गोबरा नवापारा : रायपुर जिला के ग्राम कुर्रा की विवादित जमीन के मामले में अब नया मोड़ सामने आया है. करोड़ों रुपये कीमत की बताई जा रही जमीन के हस्तांतरण, कथित कूटरचना और धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने तहसील कार्यालय को आवेदन वापस भेजकर स्पष्ट जांच प्रतिवेदन मांगा है. पुलिस ने तहसील कार्यालय से साफ तौर पर पूछा है कि प्रथम सूचना रिपोर्ट यानी FIR आखिर किस व्यक्ति के खिलाफ दर्ज की जानी है. मामले में पहले यह चर्चा थी कि पुलिस ने तहसील कार्यालय से आया आवेदन वापस कर दिया है. हालांकि अब सामने आए पुलिस पत्र से स्थिति स्पष्ट हो गई है. गोबरा नवापारा थाना प्रभारी जितेंद्र दुबे ने 4 अक्टूबर 2026 को नायब तहसीलदार लवण मंडन को पत्र भेजकर जरूरी दस्तावेज और स्पष्ट जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने को कहा है.
पुलिस ने क्यों लौटाया आवेदन?
थाना प्रभारी की तरफ से भेजे गए पत्र में बताया गया कि अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अभनपुर के पत्र के जरिए ग्राम कुर्रा की जमीन से संबंधित शिकायत और दस्तावेज पुलिस को प्राप्त हुए थे. अभिलेखों के अवलोकन के बाद मामले में गंभीर कमियां और विसंगतियां पाए जाने की बात भी सामने आई. राजस्व विभाग की तरफ से संबंधित दोषी व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का उल्लेख किया गया था. लेकिन पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि FIR किस व्यक्ति या किन व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज की जाए. इसी वजह से पुलिस ने तहसील कार्यालय से स्पष्ट जांच प्रतिवेदन मांगा है. साथ ही संबंधित दस्तावेज भी उपलब्ध कराने को कहा गया है. ताकि मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे कार्रवाई की जा सके.
जमीन के हस्तांतरण और कूटरचना के आरोप
पुलिस के पत्र के मुताबिक संबंधित जमीन को लेकर कथित हस्तांतरण, कूटरचना, धोखाधड़ी और सक्षम अनुमति के अभाव में कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है. ऐसे में पुलिस अब यह साफ करना चाहती है कि पूरे मामले में राजस्व जांच के मुताबिक असल दोषी कौन है. यही वजह है कि आवेदन सीधे तौर पर खारिज करने के बजाय पुलिस ने उसे तहसील कार्यालय को वापस भेजकर जरूरी जानकारी और दस्तावेज मांगे हैं.
पहले 18 सितंबर को भेजा गया था आवेदन
इस मामले में नायब तहसीलदार लवण मंडन ने पहले बताया था कि 18 सितंबर को गोबरा नवापारा थाना पुलिस को आवेदन भेजा गया था. 22 सितंबर को थाने से आवेदन प्राप्त होने की रिसीविंग भी तहसील कार्यालय को मिल गई थी. इसके बाद आवेदन को लेकर तरह-तरह की चर्चा शुरू हो गई थी. अब 4 अक्टूबर को थाना प्रभारी की तरफ से भेजे गए पत्र के सामने आने के बाद यह साफ हो गया है कि पुलिस ने आवेदन को वापस लेने के बजाय मामले में कार्रवाई के लिए अतिरिक्त जानकारी मांगी है.
करोड़ों की जमीन, इसलिए मामला गंभीर
ग्राम कुर्रा की विवादित जमीन की मौजूदा कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है. जमीन के पुराने रिकॉर्ड, उसके हस्तांतरण और कथित दस्तावेजी गड़बड़ी को लेकर मामला पहले से ही गंभीर बना हुआ है. ऐसे में पुलिस की तरफ से तहसील कार्यालय से मांगा गया स्पष्ट जांच प्रतिवेदन अहम माना जा रहा है. क्योंकि राजस्व विभाग की जांच में किसे दोषी माना गया है. यह स्पष्ट होने के बाद ही पुलिस FIR में संबंधित व्यक्तियों को आरोपी बना सकेगी
अब तहसील के जवाब पर टिकी अगली कार्रवाई
फिलहाल पूरे मामले में पुलिस की अगली कार्रवाई तहसील कार्यालय से मिलने वाले जवाब और दस्तावेजों पर निर्भर है. पुलिस ने साफ कर दिया है कि विधि सम्मत कार्रवाई के लिए यह जानकारी जरूरी है कि FIR किस व्यक्ति के खिलाफ दर्ज की जानी है. अब देखना होगा कि तहसील कार्यालय की तरफ से पुलिस को क्या जांच प्रतिवेदन दिया जाता है और उसमें जमीन के कथित हस्तांतरण, कूटरचना और धोखाधड़ी के लिए किन लोगों को जिम्मेदार बताया जाता है. इसके बाद ही करोड़ों की इस विवादित जमीन के मामले में FIR और आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ होगा.
ताजा खबर के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LEzQMc7v4AU8DYccDDrQlb



