जन सुनवाई में जेठ ने आयोग के सामने बहू से कान पकड़कर मांगी माफी, ढीमर समाज ने सामाजिक बहिष्कार खत्म करने सार्वजनिक घोषणा‌ की

In the public hearing, the brother-in-law apologized to his daughter-in-law by holding her ears in front of the commission, the Dhimar community made a public announcement to end the social boycott

जन सुनवाई में जेठ ने आयोग के सामने बहू से कान पकड़कर मांगी माफी, ढीमर समाज ने सामाजिक बहिष्कार खत्म करने सार्वजनिक घोषणा‌ की

दुर्ग : छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक, सदस्यगण श्रीमती ओजस्वी मण्डावी, श्रीमती लक्ष्मी वर्मा और दीपिका सोरी ने कार्यालय जिला कार्यकम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रेरणा सभा कक्ष जिला दुर्ग में महिला उत्तपीडन से जुड़े मामलों पर सुनवाई की.
आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में प्रदेश स्तरीय 299 वीं सुनवाई हुई. दुर्ग में 11 वीं सुनवाई  दुर्ग में जनसुनवाई में कुल 32 मामले सुनवाई के लिए रखे गये थे. 8 मामले नस्तीबद्ध किए गइ.
सुनवाई में एक मामले में आवेदिका द्वारा बताया गया कि उसने 2 साल 6 महीने पहले आवेदन दिया. जिसमें प्रधान आरक्षक ने कार्यवाही कुछ नही किया और आवेदन शिकायत के घर पर भेज दिया. गोपनीयता भंग किया. सीएसपी ने प्रधान आरक्षक को समझाईश देकर मामले का हल करा दिया था.
वर्तमान में अनावेदक रिटायर हो चुका है इसलिए अब आवेदिका कार्यवाही नही चाहती है. उसका यह निवेदन है कि आयोग के द्वारा सभी पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया जाए कि आवेदन पर जल्द कार्यवाही करें और गोपनीयता भंग न करें.
डीजीपी छग शासन महिला आवेदिकाओं के मामले पर जल्द कार्यवाही और गोपनीयता भंग न होने निर्देश सभी पुलिस प्रशासन को दिया जाए -डॉ किरणमयी नायक
इस पर आयोग के द्वारा डीजीपी छग शासन को एक पत्र भेजा जाएगा कि महिला आवेदकों के मामले में जल्द कार्यवाही और उनके आवेदनों की गोपनीयता पुलिस गोपनीय रखे. मामला नस्तीबद्ध किया गया.
उभयपक्ष उपस्थित अनावेदन की तरफ से अधिवक्ता सुरेश शुक्ला कहा कि आवेदन उड़ीसा में उन्हे आने के लिये समय दिया जाए. आवेदिका ने बताया कि उन्होने उड़ीसा के दिवानी अदालत में मामला पेश कर दिया है.
उभय पक्ष उपस्थित सभी एक ही परिवार के सदस्य है अनावेदकगण के द्वारा आवेदिका से अशलील गाली गलौच किया गया था. जिसको लेकर थाना उतई में उभय पक्ष का समझौता हो चुका था. जिसके बाद से सभी अनावेदनकगण उस संयुक्त परिवार से अलग रहने चले गये थे. इसकी पुष्टि अनावेदक कमांक 3 ने किया जो कि घर का बुर्जुग है और वर्तमान में अनावेदक के साथ रहता है.
आवेदिका के पास अनावेदक के द्वारा दिये गये गाली का आडियो रिकार्डिंग सदस्यों ने सुना. बहुत आपत्तिजनक था. जिस पर आनावेदक क 1 को समझाईया दिया गया जिस पर उसके द्वारा आवेदक से कान पकड़कर माफी मांगा. और भविष्य में ऐसा दुर्व्यवहार नही करने की बात भी कही.
आवेदक व उभय पक्ष आपस में पति-पत्नि है जिनका मामला कुटुम्ब न्यायालय में चल रहा है… लेकिन ढीमर समाज दुर्ग के अध्यक्ष दासु ढीमर, राजकुमार ढीमर, दीपक कुमार ढीमर, भुपेन्द्र कुमार ढीमर, पुरूषोत्तम ढीमर मौजूद थे उन्होने बताया कि उनके द्वारा आवेदिका का सामाजिक बहिष्कार नही किया गया है और समाज में आने जाने के लिये स्वतंत्र है और इसकी घोषण भी सभी समाजजनो ने किया.
विस्तार से सुने जाने पर यह साफ़ हुआ कि उसकी मुख्य शिकायत यह कि उसके पति को अनावेदन द्वारा परेशान किया गया. तथ्यों और दस्तावेजो के देखने पर यह साफ़ है कि आवेदिका के खिलाफ एकल कार्यवाही करने के कोई सबूत और दस्तावेज पेश नही किया गया है. और विभागीय कार्यवाही के लिये और पति को बचाने के लिये आयोग में शिकायत किया गया है इसलिए मामला किया जाता है.
अनावेदिका के पति अनावेदक के पास है जो डॉक्टर था उसने अनावेदक कमांक 1 को 400 रूपये ऑनलाईन पे किया गया…
उभय पक्ष उपस्थित अनावेद कमांक 1 अनावेदक कमांक 2 राजकुमार देशमुख सहा. उप. निरी. थाना उतई जो वर्तमान में जामगांव जिलाह दुर्ग में पदस्थ है. उनके द्वारा पेशी में हाजिर नहीं हो पाने का आवेदन दिया. मामला काफी गंभीर है अनावेदिका के पति अनावेदक के पास है. जो डॉक्टर था जहाँ उसने अनावेदक कमांक 1 को 400 रुपया ऑनलाईन पे किया गया है.
अनावेदक की मौत हो गई. आधे घंटे के बाद आवेदिका की पति की भी मौत हो गई. उसे जिला अस्पताल भेजा गया था. जहां उसकी मौत की घोषणा हुई. इस पूरे मामले में आवेदिका उसके ससुर का पुलिस बयान बदलने में अनावेदक कमांक-2 की संलिप्पतता की ओर आवेदिका पक्ष ने ध्यान आकृष्ट कराया.
अनावेदक कमांक 1 को चिकित्सीय डिग्री और लाइसेंस व अन्य संबंधित प्रमाण पत्र लेकर आयोग में हाजिर होने का निर्देश दिया गया और अनावेदक कमांक 2 को भी सभी जांच प्रकिया की प्रति लेकर हाजिर हाने की सूचना एस.पी. दुर्ग के जरिए भेजी जाए. ताकि आगामी पेशी में मामले को हल करने की कार्यवाही हो सके.
आवेदिका अपने मामले की जल्द कार्यवाही के लिए मामले की सुनवाई रायपुर में कराना चाहती है. इसलिए मामले की सुनवाई 17 जनवरी 2025 को रखी गई.
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थाना-मोहननगर के जरिए एक महिला इंस्पेक्टर के साथ आयोग में सुनिश्चित कराई जाए…
उभय पक्ष उपस्थित। आवेदक कमांक 1 आवदेक 5 आवेदक 2, 3 4 अनुपस्थित। आवेदक के माता-पिता भी उपस्थित. आगामी सुनवाई में आवेदिका 2, 3 थाना-मोहननगर के जरिए एक महिला इंस्पेक्टर के साथ आयोग में सुनिश्चित कराई जाए. और अनावेदक कमांक 4 पूनम वर्मा जो कोरबा में निवास करती है. कोरबा एस.पी. के जरिए आगामी सुनवाई में हाजिरी सुनिश्चित कराई जाए.
आवे. ने बताया कि आवेदक क्रमांक 1 उसका जो पति है अनावेदिका कमांक 2 भूमिका श्याम कुवर के साथ आवेद रिश्ते में है और अनावेदिका कमांक 2 और 1 मिलकर आवेदिका को घर से निकलवा चुके हैं. घर से अपने मायके में और अनावेदक 1 ने उसे सार्वजनिक रुप से परिवार के सामने अभद्र तरीके से लज्जित करते हुए अपमानित किया गया.
आवेदिका को घर से निकाल दिया है और भरण पोषण नहीं दे रहा. और उसे तलाक अनावेदक कमांक 1 जिला कलेक्टर एनआईसी में कार्यरत संविदा पर कार्यरत जहां उन्हें 25000 रुपया वेतन मिलता है और 10 महीने से आवेदिका को घर से निकाल दिया है और भरण पोषण नहीं दे रहा है. आवेदिका पूर्व में कार्यरत थी. अनावेदक कमांक 1 और 4 की मां तथा अनावेदक कमांक 5 की बीमारी के दौरान नौकरी छोड़कर घर की जिम्मेदारी पूरा करे.
वर्तमान में अनावेदक 1 ने अवैध रिश्तों की वजह से मानसिक तनाव के असहाय अवस्था में माता-पिता आगामी सुनवाई 16 जनवरी 2025 को रायपुर में किया जाएगा.
उभ्य पक्ष उपस्थित। इस मामले में आज आवे और आवे का सुबह नाम कराने का प्रयास कराने वाले ध्रुव कुमार सोनी धारनी घसिया समाज के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष है हाजिर हुए उन्होंने बताया कि उनका समझौता कराने के लिए 17 जुलाई 2022 को बैठक रखी थी. आवे. और बच्चों का साथ रखने से इन्कार कर दिया था. यह जानकारी एवं दस्तावेज उन्होंने दिया था.
कुछ दिन रहने के बाद फिर मायके चली जाती थी उसके पिता का काफी हस्ताक्षेप था…
अना. ने बताया कि आवे. और उसके जरिए 18 अगस्त 2020 को एक लिखित इकरारनामा बना था. जिसमें उसका वापस कर दिया था. इसके बाद वह फिर साथ रहने आई थी. कुछ दिन रहने के बाद फिर मायके चली जाती थी. उसके पिता का काफी हस्ताक्षेप था. 2021 में गई उसके बाद से अब तक वापस नहीं आई है आवे. के पिता उसे मारवाने के लिए लोगों को बोलते थे इस कारण वह आवे. और बच्चें को रखने से मना किया था.
आयोग के द्वारा समझाईस दिये जाने पर अना. ने यह कबूल किया कि उसने आवे. से तलाक लिए बगैर दूसरी महिला से बेटा पैदा कर लिया है जो 15 दिन का इसलिए आवे. के साथ अपने रिश्ते जारी नही कर पाऐगा. अपने 2 साल 6 महीने पूरे परवरिश के एक मुश्त 5 लाख देने के लिए तैयार है. जिस पर आवे. भी सहमत है.
आवेदिका से अपनी आपसी सहमति से तलाक लेने के एवज में 5 लाख रुपये की मांग किया है जिस पर अनावेदक विचार करने के लिए समय की मांग कर रहा है. अगर अना. इंकार करता है तब आवे. उसके खिलाफ बिना तलाक के दूसरे विवाह और बच्चें पैदा करने के लिए मामले को लेकर अना. के खिलाफ मामला दर्ज करने का अधिकार सुरक्षित रखती है.
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