दो सूत्रीय मांग को लेकर मितानिन संघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल, मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन, स्वास्थ्य सेवाएं हो रही प्रभावित

Indefinite strike of Mitanin Sangh over two-point demand, memorandum submitted to Tehsildar in the name of Chief Minister, health services getting affected

दो सूत्रीय मांग को लेकर मितानिन संघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल, मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन, स्वास्थ्य सेवाएं हो रही प्रभावित

दुर्ग: प्रदेश में ग्रामीण स्तर और मोहल्ले में स्वास्थ्य सेवाएं देने वाली मितानिन और संबंधित कार्यकर्ता मितानिन 13 दिसंबर से काम बंद कलम बंद कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं. वही दुर्ग में 2311 मितानिन और ब्लॉक समन्वयक ने सड़क पर उतर प्रदर्शन करना शुरु कर दिया.
प्रदेश स्वास्थ्य मितानिन संघ ने सड़क पर उतर धरना प्रदर्शन शुरु कर दिया है. जिसकी वजह से जिले की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही है. वर्तमान में जिले में 2311 और प्रदेश में 72 हजार मितानिन और संबंधित कार्यकर्ता कार्यरत है. काम बंद कलम बंद हड़ताल की वजह से प्रदेश में टीकाकरण, संस्थागत प्रसव, टीबी, कुष्ठ, गर्भवती एवं नवजात की देखभाल, स्वास्थ्य सर्वे जैसे काम प्रभावित हो रहे हैं.
प्रदेश स्वास्थ्य मितानिन संघ की पदाधिकारी ने कहा कि हमारी दो सूत्रीय मांग वही है.जिसका सरकार ने मेनिफेस्टो में वादा किया था. वहीं मितानिनों का कहना है कि जब गांव में कोई डिलीवरी नहीं होती है. तो इन्हें राशि नहीं मिलती है. ऐसे में इन्हें भी वेतन दिया जाए.
उन्होंने ने कहा कि  एक मितानिन 200 परिवार देखती है. हमारी मांग जायज है. इन्हें पूरा किया जाए. मितानिनों का कहना है कि केन्द्र और राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान की बात करती है. लेकिन दिन-रात मेहनत करने वाली मितानिनों के बारे में नहीं सोच रही है. उनकी आर्थिक हालत ठीक नहीं है. बच्चों की पढ़ाई के लिए फीस तक जुटाना मुश्किल हो जाता है.
मितानिनों के मुताबिक सभी मितानिन, मितानिन प्रशिक्षक, ब्लॉक समन्यवक, स्वास्थ्य पंचायत समन्यवक, एरिया कोऑडिनेटर और मितानिन हेल्प डेस्क फैसिलिटेटर को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) में संविलियन किया जाए. क्योंकि SHRC, NGO के साथ काम करने पर उन्हें आर्थिक लाभ नहीं मिलता है. सरकार ने मितानिनों का मानदेय 50% बढ़ाने का वादा किया था. लेकिन अब तक इस पर कोई कदम नहीं उठाया गया है.
मितानिनों के मुताबिक उनके पदाधिकारी 21 साल से सेवा दे रहे हैं.लेकिन अब तक उन्हें संविलियन से वंचित रखा गया है. लंबा अनुभव होने के बाद भी कम प्रोत्साहन राशि और क्षतिपूर्ति बेस से काम लिया जा रहा है.प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जब तक मांगों को पूरा नहीं करते तब तक हड़ताल जारी रहेगी.
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बलौदाबाजार : प्रदेश स्वास्थ्य मितानीन संघ के आह्वान पर जिला मितानीन संघ अपने दो सूत्रीय मांगों को लेकर 13 दिसंबर से ‘काम बंद-कलम बंद’ हड़ताल पर हैं. बलौदाबाजार में मितानिनों ने जिला स्तरीय प्रदर्शन कर अपनी दो सूत्रीय मांगों को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री के विष्णु देव साय के नाम नायब तहसीलदार अक्षय तिवारी को ज्ञापन सौंपा.
संघ का कहना है कि उन्हें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) में संविलियन किया जाए और दूसरी मांग है कि वे किसी भी एनजीओ के अंदर काम नहीं करेंगे. जब तक उनकी ये मांग पूरी नहीं होगी. वह काम बंद-कलम बंद हड़ताल जारी रखेंगे.
मितानीन संघ की प्रदेश अध्यक्ष सरोजिनी सेंगर ने बताया कि स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में मितानीन संघ का बड़ा योगदान है. आज पूरे देश में मितानीन स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. लेकिन मितानीनों की लगातार उपेक्षा हो रही है. जिसको लेकर चुनाव के समय मोदी जी की गारंटी में कहा गया था कि शासन में आते ही उनकी मांगों को पूरा किया जाएगा. लेकिन आज एक साल हो गया. लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा है. इसलिए मितानीन संघ अपनी दो सूत्रीय मांगों को लेकर 13 दिसंबर से काम बंद कलम बंद हड़ताल शुरु कर दिया है और निश्चित ही इसका असर स्वास्थ्य सेवा पर पड़ेगा. शासन द्वारा कई रोगों को लेकर 100 दिन का सर्वेक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है. निश्चित ही वह काम भी प्रभावित होगा.
सरोजिनी सेंगर का कहना है कि हमारी मांग जायज मांग है. जिसमें हमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में संविलियन किया जाए और दूसरी मांग है कि हम किसी भी एनजीओ के अंदर काम नहीं करेंगे. क्योंकि वे हमारा शोषण ही करते हैं. इसलिए शासन ने चुनाव के वक्त जो वादा हमसे किया था. वह पूरा करे. वरना आने वाले दिनों में और बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा और इस बार हम अपना हक लेकर रहेंगे.
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