धर्मेंद्र, अमिताभ ही नहीं संजीव कुमार भी बनना चाहते थे 'गब्बर', ऐसे रोचक किस्से जो सुने न होंगे...
मुंबई : शोले फिल्म किसी लिए याद की जाती है तो वो है उसके दमदार किरदार गब्बर सिंह की वजह से। अपनी हनकदार आवाज और क्रूर चेहरे से दर्शकों के दिल में खौफ पैदा कर देने वाला गब्बर ही इस फिल्म का असली 'हीरो' माना जाता है। इसी भूमिका को निभाकर उस दौर के नवोदित कलाकार अमजद खान हर दर्शकों के दिल में अमर हो गए।
मुंबई : शोले फिल्म किसी लिए याद की जाती है तो वो है उसके दमदार किरदार गब्बर सिंह की वजह से। अपनी हनकदार आवाज और क्रूर चेहरे से दर्शकों के दिल में खौफ पैदा कर देने वाला गब्बर ही इस फिल्म का असली 'हीरो' माना जाता है। इसी भूमिका को निभाकर उस दौर के नवोदित कलाकार अमजद खान हर दर्शकों के दिल में अमर हो गए।
एक क्रूर खलनायक होने के बावजूद भी यह उस किरदार की लोकप्रियता ही थी कि गब्बर के नाम पर ही शोले के बाद आज तक आधा दर्जन फिल्में बन चुकी हैं। क्या आप जानते हैं कि गब्बर की भूमिका अमजद खान को कैसे मिली। किस तरह एक नए नवेले कलाकार ने जिसके नाम को भी उस फिल्म से पहले तक शायद ही कोई जानता हो इस खतरनाक किरदार को लोकप्रियता के शिखर तक पहुंचा दिया। तो आइए अमजद खास की पुण्यतिथि पर आपको बताते हैं कुछ ऐसे ही किस्से जो गब्बर के बारे में आपने तक शायद ही पहले सुने हों।
चंबल के बीहड़ में 50 के दशक में आतंक मचाने वाले जिस डाकू गब्बर सिंह को लेकर यह फिल्म बनी थी उसके किरदार को निभाने के लिए भी उस समय अलग ही होड़ थी। बताया जाता है कि जिस समय शोले की कास्टिंग हो रही थी और गब्बर सिंह के किरदार के लिए किसी दमदार खलनायक की तलाश की जा रही थी उस समय फिल्म के हीरो धर्मेन्द्र और अमिताभ ने भी गब्बर सिंह का किरदार निभाने की इच्छा जाहिर की थी। खासकर धर्मेन्द्र ने इसके लिए कई बार फिल्म की कहानी लिखने वाले सलीम जावेद से भी सिफारिश की, लेकिन निर्माता रमेश सिप्पी जय वीरु के लिए दोनों का नाम फाइनल कर चुके थे और उन्हें किसी भी सूरत में बदलना नहीं चाहते थे इसलिए उनकी नहीं दाल नहीं गली।

हालांकि कहा ये भी जाता है कि ठाकुर का किरदार निभाने वाले स्वर्गीय संजीव कुमार भी गब्बर बनने की इच्छा रखते थे लेकिन रमेश सिप्पी ने उन्हें यह कहकर मनाया कि ठाकुर के रोल के लिए उन्हें उन जैसा कोई दूसरा अभिनेता नहीं मिल सकता। सिप्पी की इस दलील पर संजीव कुमार भी चुप्पी साध गए। जिस समय सलीम-जावेद इस फिल्म की पटकथा तैयार कर रहे थे उस समय उनके दिमाग में विलेन के तौर पर पहला चेहरा उस समय के स्थापित खलनायक डेनी का था। अपनी दमदार आवाज और भावपूर्ण चेहरे के साथ डेनी उस समय बॉलीवुड (उस समय की मायानगरी) में छाए हुए थे।
निर्माता रमेश सिप्पी भी डेनी को ही अपनी फिल्म में लेना चाहते थे। लेकिन कुछ कारणों से डेनी ने वह फिल्म करने से मना कर दिया जिसके बाद शुरू हुई नए चेहरे की तलाश। इसी बीच किसी ने लेखक जावेद को एक नए कलाकार अमजद खान के बारे में बताया। जावेद ने रमेश सिप्पी के सामने उनका नाम बढ़ाया, जिसके बाद शुरूआती ना नुकुर के बाद रमेश सिप्पी अमजद से मिलने के लिए तैयार हो गए। बताया जाता है कि जब पहली बार अमजद खान रमेश सिप्पी के सामने पहुंचे तो उनकी बारीक आवाज और पतले से बदन को देखकर सिप्पी ने एक झटके में ही उन्हें मना कर दिया।
इरादों के पक्के अमजद खान ने एक बार उन्हें मौका देने की गुजारिश की। जिसके बाद निर्माता रमेश सिप्पी ने उनके सामने शर्त रखी की यदि एक महीने में वो अपना वजन बढ़ाकर दिखाएं तो उन्हें मौका दिया जा सकता है। कहा जाता है कि इसके बाद अमजद खान ने अपना वजन तो बढ़ाया ही अपनी आवाज में भी वो खनक ले आए जिसकी निर्माता को तलाश थी। एक महीने बाद ही अमजद खान का ऑडिशन हुआ और वो चुन लिए गए।



