विशेष पिछड़ी कमार जनजाति के परिवार की दुर्दशा, शासन-प्रशासन से मदद की गुहार, मनोज पटेल- सरकार की योजनाएं कागजों तक ही सीमित
Plight of the family of special backward Kamar tribe, appeal for help from government and administration, Manoj Patel - Government schemes limited to papers
गरियाबंद/छुरा : गरियाबंद के छुरा में सरकार द्वारा “बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ” और गरीबों के उत्थान के लिए चलाए जा रहे दावों की हकीकत जमीनी स्तर पर कुछ और ही बयां करती है. गरियाबंद जिले के छुरा ब्लॉक मुख्यालय से महज 27 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत अमेठी के आश्रित ग्राम बनलोहझर में विशेष पिछड़ी कमार जनजाति का एक परिवार सैलून से टूटी-फूटी झोपड़ी में रहने को मजबूर है. यह परिवार मूलभूत सुविधाओं से वंचित है.
परिवार के मुखिया आसाराम कमार ने बताया कि पक्के मकान के लिए कई बार आवेदन किया. लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ. घर में नल-जल कनेक्शन तो है. लेकिन पानी की एक बूंद तक नहीं मिलती परिवार दूर-दराज से पानी लाने को मजबूर है. रात के समय सर्प, बिच्छू और जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है, जिससे पूरा परिवार भयभीत रहता है.
परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेहद खराब है. बड़ा बेटा महेश काम की तलाश में बाहर गया था. ट्रेन से गिरने की वजह से अपनी जान गंवा बैठा. दूसरा बेटा टकेश मजदूरी कर परिवार का सहारा बन रहा है. बेटी टकेश्वरी ने सातवीं कक्षा तक पढ़ाई की थी. लेकिन गरीबी की वजह से पढ़ाई छोड़नी पड़ी. वहीं, सबसे छोटी बेटी टके पांचवीं कक्षा में पढ़ाई कर रही है. लेकिन उसे भी कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.
समाजसेवी मनोज पटेल ने मौके पर पहुंचकर परिवार की दुर्दशा का जायजा लिया और शासन-प्रशासन तक उनकी तकलीफों को पहुंचाने का वादा किया. उन्होंने बताया कि सरकार की योजनाएं कागजों तक ही सीमित हैं. इस परिवार को न पक्का मकान मिला, न पानी और न ही शिक्षा का अधिकार.. यह बेहद चिंताजनक स्थिति है. उन्होंने शासन-प्रशासन से तत्काल इस परिवार को पक्का मकान, जल सुविधा और बच्चों की शिक्षा के लिए मदद की अपील की है. गांववासियों और समाजसेवियों ने भी गरीब परिवार की मदद के लिए प्रशासन से ठोस कदम उठाने की मांग की है.
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