सुप्रीम कोर्ट ने महिला सरपंच सोनम को किया बहाल, छत्तीसगढ़ सरकार को SC ने लगाई कड़ी फटकार, 1 लाख का लगाया जुर्माना, जशपुर जिले का मामला
Supreme Court reinstated woman sarpanch Sonam SC reprimanded Chhattisgarh government imposed fine of Rs 1 lakh case of Jashpur district
जशपुर : सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के गृह जिले जशपुर की महिला सरपंच सोनम लकरा को उनके पद से हटाने के आदेश को रद्द करते हुए राज्य सरकार पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. कोर्ट ने सरपंच को अनुचित तरीके से परेशान करने और उनके खिलाफ मनमानी कार्रवाई करने वाले अधिकारियों की जांच के निर्देश भी दिए हैं. यह फैसला जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने सुनाया. जिसमें उन्होंने अधिकारियों की सरपंच के प्रति अनुचित व्यवहार पर नाराजग़ी जताई और उन्हें कड़ी फटकार लगाई
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सेजबहार ग्राम पंचायत की 27 साल सरपंच सोनम लकरा को सिर्फ निर्माण कार्यों में देरी का बहाना बनाकर परेशान किया गया. अदालत ने साफ किया कि मौसम, इंजीनियरों, ठेकेदारों और सामग्री की आपूर्ति में देरी जैसी वजह से निर्माण में देरी हो सकती है. जिनके लिए सरपंच को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने कहा कि एक निर्वाचित महिला सरपंच को इस तरह के झूठे बहाने से हटाना अधिकारियों की अत्यधिक मनमानी और उनकी भूमिका का दुरुपयोग है.
अधिकारियों द्वारा दिए गए सुझाव पर कि सरपंच को उच्चाधिकारियों के पास जाना चाहिए था. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि ऐसा करने का मतलब सरपंच को अपमानित करना है. अदालत ने कहा कि अधिकारी अपेक्षा कर रहे हैं कि एक निर्वाचित प्रतिनिधि किसी छोटे अधिकारी के सामने ‘भीख का कटोरा’ लेकर जाए. यह लोकतांत्रिक अधिकारों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है.
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि उन अधिकारियों की पहचान करें जिन्होंने सरपंच को अनुचित तरीके से परेशान किया. राज्य सरकार अब इन अधिकारियों से 1 लाख रुपये की हर्जाने की राशि वसूलने के लिए स्वतंत्र है. कोर्ट ने यह भी साफ किया कि सरपंच सोनम लकरा अब अपना कार्यकाल पूरा होने तक पद पर बनी रहेंगी.
जशपुर जिले की सजबहार ग्राम पंचायत की सरपंच सोनम लकरा. जिन्हें 2020 में निर्वाचित किया गया था उन्होंने अपने गांव में विकास कार्य शुरु कराए थे. लेकिन कार्यों में कुछ देरी होने की वजह से उन पर आरोप लगाए गए और 2024 में भाजपा के शासक काल में उन्हें पद से हटा दिया गया. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अब सोनम लकरा का पद बहाल कर दिया गया है.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/CvTzhhITF4mGrrt8ulk6CI
अपनी याचिका में सरपंच ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि उन्हें हटाने के पूर्व प्राकृतिक न्याय का पालन नहीं किया गया है तथा उन्हें उचित सुनवाई का मौका नहीं दिया गया. पंचायत के किसी भी निर्माण कार्य के लिए सिर्फ सरपंच ही जिम्मेदार नहीं होता है.
इस बारे में सरपंच सोनम लकड़ा ने कहा कि मुझ पर कोई वित्तीय अनियमितता और न ही कोई घोटाले का आरोप था. मुझे लगता है कि राजनीतिक दबाव की वजह से मुझे निकाला गया था. लेकिन सच्चाई की जीत हुई है. मैं सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद देती हूं.
इस बारे जिला पंचायत सदस्य विष्णु कुलदीप और अधिवक्ता ने कहा कि ये मामला सरकार पर सुप्रीम कोर्ट का जोरदार तमाचा है. राज्य में अधिकारी-कर्मचारी बेकाबू हैं. नियम कानून को ताक पर रखकर आदेश करते हैं. इस आदेश के बाद ग्रामीण क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों का हौसला बढ़ेगा. इस आदेश के बाद ऐसे अधिकारियों को सबक लेना चाहिए जो आकाओ को खुश करने के लिए कुछ भी आदेश कर जाते हैं.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/CvTzhhITF4mGrrt8ulk6CI



