अनुशासन का पाठ पढ़ाना पड़ा भारी, दादा ने मोबाइल पर बात करने से टोका, नाबालिग पोती ने कुल्हाड़ी से काट डाला, इलाके में मचा हड़कंप

Teaching a lesson on discipline turned out to be costly, grandfather stopped his granddaughter from talking on mobile, minor granddaughter hacked him with an axe, panic spread in the area

अनुशासन का पाठ पढ़ाना पड़ा भारी, दादा ने मोबाइल पर बात करने से टोका, नाबालिग पोती ने कुल्हाड़ी से काट डाला, इलाके में मचा हड़कंप

बलौदाबाजार : छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले से रिश्तों को शर्मसार और समाज को झकझोर कर रख देने वाली एक घटना सामने आई है. यहां अमेरा गांव में एक 50 साल के बुजुर्ग की हत्या की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है. जांच में जो खुलासा हुआ है, वह बेहद चौंकाने वाला है. बुजुर्ग का कातिल कोई और नहीं, बल्कि उनकी ही एक नाबालिग रिश्तेदार निकली. जिसने महज इसलिए उनकी जान ले ली क्योंकि वह उसे अनुशासन का पाठ पढ़ाते थे और मोबाइल के इस्तेमाल पर रोक-टोक करते थे.
मिली जानकारी के मुताबिक बलौदाबाजार जिले के अमेरा गांव में 50 साल के मृतक पुरुषोत्तम यादव अपनी नाबालिग रिश्तेदार को अक्सर अनुशासन में रहने और सही आचरण की नसीहत देते थे. वह उसे मोबाइल पर ज्यादा बात करने से भी मना करते थे. यह रोक-टोक और डांट-फटकार नाबालिग लड़की के मन में इस कदर चुभ गई कि उसके अंदर गुस्सा और विद्रोह की भावना पनपने लगी. इसी गुस्से में आकर उसने एक दिन खौफनाक कदम उठा लिया.
बता दें कि अमेरा गांव के घर में मंगलवार को एक बुजुर्ग की अपने ही घर में लाश मिली थी. उनकी पत्नी का पहले ही देहांत हो चुका है. बेटा बाहर रहता है. बुजुर्ग अपनी 2 नाबालिग पोतियों के साथ घर में रहते थे. मंगलवार दोपहर बड़ी पोती ने दादा की लाश सबसे पहले देखने की बात परिवार और पड़ोसियों को दी थी. उसने बताया कि लंच टाइम पर घर आई थी, तो दादा को लहुलुहान स्थिति में पड़े देखा.
बीते 12 अगस्त को सुबह 10 से 12 बजे के बीच कत्ल की खबर मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक (FSL) टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरु की. जब पड़ोसियों और रिश्तेदारों से पूछताछ की गई तो शक की सुई नाबालिग पर आकर टिक गई. शुरुआत में नाबालिग लड़की ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की और लगातार अपने बयान बदलती रही. लेकिन जब पुलिस ने मनोवैज्ञानिक तरीके से कड़ाई से पूछताछ की. तो वह टूट गई और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया.
उसने कबूल किया कि लगातार की जा रही डांट से परेशान होकर उसने लोहे की टंगिया से बुजुर्ग के सिर और चेहरे पर वार कर उनकी हत्या कर दी. पुलिस ने आरोपी नाबालिग को 13 अगस्त को हिरासत में लेकर किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश करने की कार्रवाई पूरी की.

समाज के लिए एक गंभीर सबक
यह घटना सिर्फ एक जुर्म की कहानी नहीं है. बल्कि यह बदलते सामाजिक ताने-बाने और पीढ़ी के बीच बढ़ते फर्क पर एक गंभीर चेतावनी भी है. यह मामला दर्शाता है कि अनुशासन जरुरी है, लेकिन बच्चों के साथ संवाद और प्रेम का पुल बनाना उससे भी ज्यादा जरुरी है. कड़े शब्द और लगातार की जाने वाली डांट-फटकार किशोर मन में विद्रोह और गुस्से का ऐसा बीज बो सकती है. जिसके नतीजे इस तरह की त्रासदियों में बदल सकते हैं. समाज और अभिभावकों को यह समझना होगा कि बच्चों की भावनाओं को समझते हुए उन्हें धैर्य और प्रेम से सही-गलत का फर्क समझाना ही सही रास्ता है.
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