मृत हो चुके पंचायत सचिव जीतराम महेश्वरी को ही प्रशासन ने बना दिया धान खरीदी प्रभारी, तैयारियों में लापरवाही पर उठ रहे गंभीर सवाल

The administration appointed deceased Panchayat Secretary Jeetram Maheshwari as in-charge of paddy procurement, raising serious questions about the negligence in preparations.

मृत हो चुके पंचायत सचिव जीतराम महेश्वरी को ही प्रशासन ने बना दिया धान खरीदी प्रभारी, तैयारियों में लापरवाही पर उठ रहे गंभीर सवाल

सक्त्ती : आज की सबसे बड़ी और हैरान करने वाली खबर छत्तीसगढ़ के सक्त्ती जिले के डभरा तहसील क्षेत्र के खरीदी केंद्र बड़े कटेकोनी गांव से है. जहां प्रशासन की एक ऐसी लापरवाही सामने आई है जिस पर यकीन करना मुश्किल है. एक तरफ सहकारी समिति के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. तो दूसरी तरफ सरकार ने धान खरीदी के लिए जो वैकल्पिक व्यवस्था की. उसमें कुछ दिन पहले मृत हो चुके पंचायत सचिव जीतराम महेश्वरी को ही खरीदी प्रभारी बना दिया गया.
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का महापर्व शुरु होने को है. लेकिन इससे ठीक पहले प्रदेश भर के सहकारी समिति प्रबंधक और ऑपरेटर अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं. इससे सोसायटियों में ताले लटके हैं और किसानों की चिंता बढ़ गई है.
हड़ताल से निपटने और धान खरीदी की प्रक्रिया को सुचारु रखने के लिए सरकार ने एक वैकल्पिक रास्ता निकाला. आनन-फानन में प्रदेश के सभी जिलों में पंचायत सचिवों को धान खरीदी प्रभारी और समिति प्रबंधक की ज़िम्मेदारी सौंपने के आदेश जारी कर दिए गए.
लेकिन इसी वैकल्पिक व्यवस्था ने सक्त्ती जिले में प्रशासन की पोल खोलकर रख दी. यह सक्त्ती जिले का बड़े कटेकोनी सहकारी समिति है. यहां के लिए जारी आदेश में एक ऐसे पंचायत सचिव को खरीदी प्रभारी और प्रबंधक नियुक्त कर दिया गया है. जिनकी मौत कुछ दिन पहले ही हो चुकी है. जी हां आपने सही सुना, प्रशासन ने एक मृत व्यक्ति के नाम पर धान खरीदी की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी का आदेश जारी कर दिया.
ये मामला सिर्फ एक लिपिकीय भूल का नहीं है. बल्कि यह धान खरीदी जैसे महाअभियान को लेकर शासन-प्रशासन की गंभीरता पर गंभीर सवाल खड़े करता है. एक तरफ लाखों किसान अपनी फसल बेचने का इंतजार कर रहे हैं. तो दूसरी तरफ प्रशासनिक तंत्र इस कदर बेखबर है कि उसे ये भी नहीं पता कि जिस अधिकारी को वो ज़िम्मेदारी सौंप रहा है. वो अब इस दुनिया में है भी या नहीं. इस एक आदेश ने पूरी व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है.
तो देखा आपने- कैसे एक बड़ी चूक ने धान खरीदी की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सवाल ये है कि जब एक जिले में ऐसी लापरवाही हो सकती है. तो प्रदेश के बाकी हिस्सों में तैयारियां कितनी पुख्ता होंगी? बड़ा सवाल ये भी है कि आखिर इस बड़ी गलती का जिम्मेदार कौन है और उस पर क्या कार्रवाई होगी.
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