रक्षक ही बने भक्षक! जांच के नाम पर आरा मिल में वन विभाग की शराब पार्टी, पत्रकार पहुंचे तो मचा हड़कंप, डीएफ ओ ने कार्रवाई के दिए निर्देश

The protectors themselves became predators! In the name of investigation, the Forest Department had a liquor party at the saw mill, when journalists arrived there was a commotion, the DFO ordered action

रक्षक ही बने भक्षक! जांच के नाम पर आरा मिल में वन विभाग की शराब पार्टी, पत्रकार पहुंचे तो मचा हड़कंप, डीएफ ओ ने कार्रवाई के दिए निर्देश

जांजगीर-चांपा : छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के बम्हनीडीह के खपरीडीह गांव से एक शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है. जहां अवैध कटाई की जांच करने पहुंची वन विभाग की टीम कार्रवाई करने के बजाय आरा मिल में ही शराब की महफिल सजाए बैठी थी. जब कुछ पत्रकारों को इसकी भनक लगी और वे मौके पर पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर हैरान रह गए.
मिली जानकारी के मुताबिक खपरीडीह गांव की आरा मिल की जांच के लिए उड़नदस्ता टीम को भेजी गई थी. लेकिन वहां जांच की बजाय शराब पार्टी करते वन विभाग के कर्मचारी मिले. जब कुछ पत्रकारों को इसकी भनक लगी और वे मौके पर पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर हैरान रह गए.
पत्रकारों को देखकर और कैमरा चलता देख उनमें हड़कंप मच गया और वे आनन-फानन में शराब की बोतलें और ग्लास छिपाने लगे. मौके पर शराब की बोतलों के साथ-साथ चखने का सामान भी बिखरा पड़ा था. जो कैमरे में कैद हो गया.
शराब पीते तस्वीर वायरल होने के बाद कर्मचारियों की डॉक्टरी जांच की गई. जिसमें 5 कर्मचारी द्वारा शराब पीने की पुष्टि हुई है. डीएफ ओ हिमांशु डोंगरे ने कहा है कि मामले में कार्रवाई की जाएगी. कर्मचारियों के द्वारा ड्यूटी के दौरान वर्दी में शराब पार्टी करने वन विभाग की जमकर किरकिरी हो रही है.
यह और भी चौंकाने वाली बात है कि ये सभी अधिकारी-कर्मचारी इस शराब पार्टी के लिए अपनी सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल कर आरा मिल तक पहुंचे थे. जब आरामिल के संचालक सुंदर पटेल से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि टीम जांच के लिए आई थी. उनके कहने पर मैंने बेटे से नाश्ते की व्यवस्था करने को कहा था. शराब कौन लाया और किसने पी. इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है.
मामले की जानकारी मिलते ही डीएफओ हिमांशु डोंगरे ने इसे गंभीरता से लिया और पूरी टीम को मेडिकल जांच (MLC) के लिए स्वास्थ्य केंद्र भेजा. डीएफओ ने साफ निर्देश दिया था कि सभी की जांच ब्रीथ एनालाइजर से की जाए. ताकि शराब पीने की पुष्टि हो सके.
लेकिन यहां भी एक बड़ा खेल हो गया. स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों ने ब्रीथ एनालाइजर से जांच करने के बजाय अपनी रिपोर्ट में सिर्फ “संदिग्ध” लिख दिया. इस गोलमोल रिपोर्ट से ऐसा मालूम हो रहा है कि वन विभाग के कर्मचारियों को बचाने की कोशिश की गई है. डीएफओ हिमांशु डोंगरे ने भी स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट पर असंतोष जताते हुए कहा, “शिकायत मिलने पर टीम को एमएलसी के लिए भेजा गया था. लेकिन डॉक्टरों ने क्लियर रिपोर्ट नहीं दी है. जिससे आगे की कार्रवाई में बाधा आ रही है.
इस मामले के तूल पकड़ने के बाद डीएफ ओ हिमांशु डोंगरे ने कार्रवाई की बात कही है. अब देखना होगा, क्या कार्रवाई की जाती है?
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