जमीन की गाइडलाइन की दरों में कोई कमी नहीं की, जनता से झूठ बोल रही सरकार -सुशील आनंद शुक्ला, पुनर्विचार कर अनुचित वृद्धि वापस की मांग
There has been no reduction in land guideline rates, the government is lying to the public - Sushil Anand Shukla, demanding a reconsideration and rollback of the unjustified increase.
रायपुर : प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने पत्रकारो से चर्चा करते हुए कहा कि जमीन की गाइडलाइन की दरों पर वित्तमंत्री ओपी चौधरी और सरकार जनता से एक बार फिर से झूठ बोल रहे हैं. खुली जमीनों, प्लाटो और किसानों के खेतो के बारे में जो बेतहाशा बढ़ोत्तरी की गयी है. सरकार ने न उसमें कोई कटौती की है और न ही उसको स्थगित किया है. मतबल गाइडलाइन के बढ़े दर यथावत रहेंगे.
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सरकार ने जमीन गाइडलाइन की दरों को बिना जिल मूल्यांकन समिति से प्रस्ताव लिये और बिना दावा आपत्ति कराए अवैधानिक तरीके से लागू किया था. और बढ़ी दरों का अनुमोदन केन्द्रीय मूल्यांकन समिति से भी नहीं लिया था. वर्तमान आदेश में सरकार ने सिर्फ अपनी गलती को सुधारने का काम किया है. सरकार बताए 20 नवंबर जब से नई गाइडलाईन लागू की गयी थी. उसके बाद से अभी तक हुई रजिस्ट्री के स्टांप ड्यूटी का क्या होगा? सरकार स्पष्ट करे कि 31 दिसंबर तक जब तक दावा आपत्ति मंगाई गई है तब तक बढ़ी दरे लागू होगी या वह गाइडलाइन स्थगित रहेगी? 31 दिसंबर तक होने वाली रजिस्ट्री पर कौन सी दर लागू होगी, सरकार स्पष्ट करें.
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सिर्फ बड़े बिल्डरों राहत देने के लिये बहुमंजिलो, भवनों के फ्लैट, दुकानों की गणना में सुधार किया गया है और सम्पूर्ण एफआईआर की गणना को तल के आधार पर 20% कम करने का फैसला लिया गया है. सरकार ने बढ़ी हुई जमीन की दरों में कहीं पर कोई कमी नहीं किया है. ज्यादातर क्षेत्रों में जो 10% से 800% तक गाइडलाइन के रेट बढ़ाये गए थे. वह यथावत हैं.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LEzQMc7v4AU8DYccDDrQlb?mode=ac_t
भाजपा ने आजादी की लड़ाई से लेकर आज तक वंदे मातरम का विरोध किया - कांग्रेस
आजादी की लड़ाई में जब कांग्रेस ने वंदे मातरम का गायन किया। तब भाजपा उसका विरोध करती थी. प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी से लेकर भाजपा का हर छोटा-बड़ा नेता खुद को बड़ा देशभक्त साबित करने वंदे मातरम पर बयान दे रहा. लेकिन यह सिर्फ भाजपाइयों का दिखावा है. कांग्रेस की हर बैठक की शुरुआत में वंदे मातरम के गायन की परंपरा है. वंदे मातरम को लेकर संसद में प्रधानमंत्री बड़ी-बड़ी बात करते हैं लेकिन भाजपा की बैठकों में, कार्यक्रमों में, आरएसएस की बैठकों में, कार्यक्रम में वंदे मातरम का गायन नहीं किया जाता। भाजपा को चुनौती है कि आरएसएस की एक भी बैठक में वंदे मातरम का गायन हुआ हो तो उसका वीडियो जारी करने का साहस दिखाये.
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि वंदे मातरम् पर बात करने के पहले भाजपा को कांग्रेस का धन्यवाद करना चाहिए. कांग्रेस पार्टी ने 1896 में अपने राष्ट्रीय अधिवेशन में सामूहिक गायन करके प्रथम बार इसको मान्यता दी. सम्मान दिया और 1937 में राष्ट्रीय गीत घोषित किया. ये संघी भाजपाई क्या मानेंगे? पहले संविधान और तिरंगा को नकारा और अब झुकना पड़ रहा है. कंपनी राज के दलाल पहले अंग्रेजी की चापलूसी करते थे. अब अडानी के। सत्ता में बने रहने के लिए ये अब गिरगिट की तरह रंग बदल रहे हैं. दरअसल भाजपा नेता अपने पितृ संगठनों के कालिख भरे इतिहास पर पर्देदारी करने का कुत्सित प्रयास कर रहे है.
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि वंदे मातरम आजादी की लड़ाई का अग्र गीत था. आजादी के परवाने वन्दे मातरम गीत गागा के अंग्रेजी हुकूमत का विरोध करते थे. जब देश आजादी की लड़ाई लड़ रहा था तब भाजपा के पितृ संगठन के लोग मुस्लिम लीग के साथ मिल कर अंग्रेजी सरकार की चाटुकारिता करते थे. आरएसएस के उस समय के सभी नेताओं ने आजादी की लड़ाई का विरोध किया था. आरएसएस का मूलतः गठन 1925 में हुआ देश आजाद 1947 में हुआ इन 22 सालों में देश की आजादी की लड़ाई में इनका क्या योगदान था भाजपा बताए. अंग्रेजों की चाटुकारिता करने वाले किस नैतिकता से वंदे मातरम की वर्षगांठ मना रहे.
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि राष्ट्रगीत वंदे मातरम भारतीयों के भावना का प्रतीक है. जन-जन के हृदय में बसा है. यह स्वतंत्रता आंदोलन का नारा था जिसका विरोध भारतीय जनता पार्टी के पितृ संगठनों ने आजादी के आंदोलन के दौरान करते रहे. आरएसएस और महासभा के लोगों ने अंग्रेजों के साथ मिलकर स्वतंत्रता आंदोलन को कुचलने के लिए स्वतंत्रता आंदोलन में नकारात्मक भूमिका निभाई. 1876 में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ सन्यासी विद्रोह की पृष्ठभूमि पर रचित इस देश भक्ति गीत का प्रथम प्रकाशन 1882 में हुआ उसके बाद, 1896 के कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद से ही प्रसिद्धि मिली. जन-जन तक पहुंचा और तब से ही कांग्रेस के प्रत्येक कार्यक्रम में होता है. भाजपा और आरएसएस बताएं कि राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान से उनको इतनी ही हिकारत क्यों है? क्यों भाजपा और आरएसएस अपनी शाखा और भाजपा कार्यालयों में वंदे मातरम गाने से परहेज करते रहे? भाजपा बताएं कि अब तक जिसका विरोध करते रहे उस पर इवेंट आयोजित करना सियासी विवशता है या राजनैतिक पाखंड?
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LEzQMc7v4AU8DYccDDrQlb?mode=ac_t



