सत्ता पक्ष के विधायक की नहीं रह गई पूछ परख, बिना MLA से भूमि पूजन कराए ही महतारी सदन का निर्माण हुआ शुरु, अधिकारी कर रहे मनमानी!

There is no longer any concern for the ruling party MLA, the construction of Mahtari Sadan has begun without the MLA performing the Bhoomi Pujan, officials are acting arbitrarily!

सत्ता पक्ष के विधायक की नहीं रह गई पूछ परख, बिना MLA से भूमि पूजन कराए ही महतारी सदन का निर्माण हुआ शुरु, अधिकारी कर रहे मनमानी!

कोरिया : अगर सत्ता पक्ष की विधायक को ही अधिकारी नजर अंदाज करें तो आप समझ सकते हैं कि अधिकारी अपने आपको सुपर समझ बैठे हैं. जबकि अधिकारियों को सत्ता पक्ष की विधायक के साथ विकास कार्यों को साझा करना चाहिए. क्योंकि सत्ता पक्ष के विधायक की विकास कार्य में रुचि होती है. विकास कार्यों को अपने क्षेत्र के लिए वह स्वीकृत करते हैं. हालाकिं काम निर्माण एजेंसियां करती हैं लेकिन इस समय अधिकारी अपने आपको जनप्रतिनिधियों से अलग कर अपने मन मुताबिक काम कर रहे हैं.
यह बात इसलिए हो रही है क्योंकि अभी कोरिया जिले में चार जगह महतारी सदन का निर्माण होना है. जिसके लिए 98 लाख 80 हजार रुपए कोरिया जिले को मिले हैं. एक महतारी सदन के लिए 24 लाख 70 हजार दिया गया है. यह काम ग्रामीण यांत्रिकी विभाग के पास है. यह काम शुरु भी हो गया और भूमि पूजन भी हो गया. लेकिन इसकी भनक विधायक को नहीं लगी.
वही कोरिया जिले में इसके लिए टेंडर निकाला गया है और यह भी टेंडर कुछ नेताओं को सेटिंग से मिला है. और सभी कम बिलो में किये गए हैं. अब इसके बाद यह बात आ रही है कि क्या इतने कम रेट में काम मिलने पर क्या सही ढंग से काम होगा? आखिर इन निर्माण कार्य को शुरु करने की इतनी जल्दबाजी ग्रामीण यांत्रिक की विभाग के ईई को क्या थी? जो बिना विधायक से भूमि पूजन कराए ही शुरु कर दिया. क्या उसमें वह गड़बड़ी करना चाह रहे हैं या फिर गुणवत्ता की अनदेखी करेंगे?
मिली जानकारी के मुताबिक ग्रामीण यांत्रिकी विभाग कोरिया निर्माण गुणवत्ता को लेकर सुर्खियों में रहता है. कार्यों को चहेते ठेकेदार को उपलब्ध कराने के जुगाड़ और कार्यों की गुणवत्ता भगवान भरोसे होने की शिकायत विभाग की होती रहती है.
अब एक नया मामला सामने आया है जहां शासन द्वारा महतारी सदन योजना अंतर्गत कोरिया जिले के चार भवन की स्वीकृति स्थानीय विधायक भईया लाला राजवाड़े की कोशिश से मिल सकी है. उक्त कार्यों के लिए निर्माण एजेंसी जिला पंचायत और ग्रामीण यांत्रिकी विभाग की सेवा संभाग को बनाया गया है. कोरिया जिले में शहरी क्षेत्र छोड़कर कर ग्रामीण क्षेत्रों में महतारी सदन योजना के अंतर्गत भवन निर्माण करना है. जिनमें ग्राम सरडी, सावांरावां, सरभोका और उमझर ग्राम पंचायत शामिल है. प्रत्येक भवन निर्माण के लिए 24 लाख 70 हजार रुपए के हिसाब से कुल 98 लाख 80 हजार रुपए की स्वीकृति संचालक पंचायत से मिली है.
उक्त काम को शुरु करने से पहले स्थानीय विधायक ने पूर्व में ही व्यवस्थित स्थल चयन के बाद भूमि पूजन कर शुरु करने के निर्देश दिए थे. लेकिन विभाग के अधिकारी ने विधायक के निर्देशों को भी नहीं माना. अनान-फानन में ठेकेदारों को काम सौपकर बिना भी भूमि पूजन कराये काम की शुरुआत भी कर दिया.
भूमि पूजन और निर्माण के बारे बोर्ड तक नहीं
हर निर्माण कार्य शुरु होने से पहले निर्माण संबंधित बोर्ड का होना जरुरी होता है. लेकिन नई सरकार में भी यह रिवाज लग रहा है खत्म हो गया है या फिर विभाग के अधिकारी अपने आपको सुपर समझ बैठे हैं. यही वजह है कि महतारी सदन योजना के तहत भवन निर्माण के काम शुरु हुआ. वहां पर निर्माण संबंधित बोर्ड तक लगाने की जहमत उन्होंने नहीं उठाई.
क्या यह बोर्ड इसलिए नहीं लगाया गया ताकि किसी को पता चल सके कि यह काम किसको मिला है? या फिर इसकी लागत ना पता चले ताकि ठेकेदार को भ्रष्टाचार करने की मौन स्वीकृति विभाग के इंजीनियर व ईई से मिल सके. काम कब पूरा होगा. काम कब खत्म होगा. इस सबका उल्लेख भी लगता है कि जानने की जरुरत किसी को नहीं है?
क्या ग्रामीण यांत्रिक विभाग में चल रही है मनमानी
ग्रामीण यांत्रिक विभाग कोरिया पर मनमानी का आरोप लग रहा है. यह आरोप कई तरीके से लगाए जा रहे हैं. पहले तो कार्यों में गुणवत्ता भगवान भरोसे है. वही मनचाहे ठेकेदारों को सेटिंग से काम देना यह भी सुर्खियों में है. अतिरिक्त कक्ष का काम भी विभागीय अपने चहेते ठेकेदार को विभाग की द्वारा दे दिया गया. पांच अतिरिक्त कक्ष बने थे. जिसके लागत 50 लाख थी. एक कक्षा की लागत 10 लाख बताई जा रही है. वहीं यह काम सिर्फ विभागीय तौर पर चहेते ठेकेदारों को देने का मामला सामने आया है. कहीं ना कहीं ग्रामीण यांत्रिकी विभाग के ईई पर तमाम तरह के गंभीर आरोप हैं. जहां निर्माण में गुणवत्ता पर सवाल तो उठ रहे हैं. साथ ही सेटिंग से काम देने का आरोप भी लग रहा है?
भाजपा समर्थित ठेकेदार भी अपने विधायक से भूमि पूजन करवाना क्या उचित नहीं समझते?
भाजपा समर्थित ठेकेदार भाजपा के नाम से काम तो पाते हैं. लेकिन अपने ही विधायक से वह भूमि पूजन करवाने से परहेज करते हैं. आखिर इसकी वजह क्या है? यह बात अब एक साल की सरकार होने के बाद उठने लगी है. दुसरे ठेकेदारों का तो समझ में आता है लेकिन भाजपा समर्थित ठेकेदार भी अपने विधायक की पूछ परख नहीं रखना चाहते. सिर्फ उनसे काम लेकर पैसा कमा कर किनारे होना चाहते हैं? जबकि काम उनके विधायक द्वारा स्वीकृत कराया जाता है. फिर भी उन्हीं के क्षेत्र में विकास कार्य के लिए उन्हें न पूछना यह बड़ा सवाल बन गया है.
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