रायपुर में दीपावली से पहले 800 कचरा गाड़ियों के थमे पहिये, वेतन नहीं मिला तो धरने पर बैठे सफाईकर्मी, ठेका कंपनी पर शोषण के आरोप
800 garbage trucks in Raipur stopped working before Diwali; sanitation workers staged a strike after not receiving their salaries, accusing the contract company of exploitation.
रायपुर : पूरे प्रदेश में दिवाली की तैयारी जोरों-शोरों से की जा रही है. लोग अपने-अपने घरों की साफ-सफाई में जुटे हुए हैं. लेकिन इसी बीच रायपुर जिले की गलियों और सड़कों की सफाई व्यवस्था ठंडी पड़ गई है. दरअसल, डोर टू डोर कचरा इकठ्ठा करने वाले सफाई कर्मचारी एक बार फिर 5 सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल पर बैठ गए हैं.
रायपुर में सफाई कर्मियों का अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन जारी है. यह प्रदर्शन दलदल सिवनी में किया जा रहा है. जहां लगभग 1000 सफाई कर्मी मौजूद हैं. भीम आर्मी इस प्रदर्शन का समर्थन कर रहा है. यह प्रदर्शन 5 सूत्रीय मांगों को लेकर किया जा रहा है. जिसमें से एक मुख्य मांग वेतन वृद्धि है। मांगे पूरी नहीं होने पर सीएम हाउस और नगर निगम का घेराव कर सकते हैं.
निजीकरण के इस फैसले से आक्रोशित कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो शहर भर में कूड़ा उठाने और सफाई का काम पूरी तरह ठप हो जाएगा. जिससे त्योहारों के बीच गंदगी का अंबार लग सकता है. सफाई कर्मियों का कहना है की वे पिछले 8 साल से काम कर रहें हैं. लेकिन कंपनी हमारा वेतन नहीं बढ़ा रही है. स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर इलाज कराने ली गयी छुट्टियों पर हमारा वेतन काट लिया जाता है.
एक सफाई कर्मी ने कहा कि 10 हजार वेतन मिलता है. 4 हज़ार का किराया देना पड़ता है और इस बार तो बिजली बिल भी 3 हजार के पार आया है. ऐसे में घर चलाना मुश्किल हो रहा है. एक कर्मचारी के हाथों में कचरा बीनते हुए सुई चुभने से हाथ का ऑपरेशन निजी हॉस्पिटल में कराना पड़ा. लेकिन न ही उसका क्लेम मिला और उल्टा अपनी नौकरी गंवानी पड़ी.
कर्मचारियों का कहना है कि, उन्हें कई महीने से वेतन नहीं मिला है, ऊपर से कंपनी के सुपरवाइजर लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं. कर्मचारियों का आरोप है कि, इससे पहले भी उन्होंने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल की थी. उस समय कंपनी प्रबंधन ने वेतन और काम के माहौल सुधारने का आश्वासन दिया था. लेकिन हड़ताल खत्म होने के बाद भी किसी भी मांग पर अमल नहीं हुआ. अब कर्मचारी कहते हैं कि, जब तक उन्हें बकाया वेतन नहीं मिलेगा और शोषण जैसी स्थिति पर रोक नहीं लगेगी. तब तक वे काम पर नहीं लौटेंगे.
इस हड़ताल का सीधा असर शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ा है. कई इलाकों में कचरा नहीं उठाया गया. जिससे गलियों में दुर्गंध फैल रही है. नालियों के पास कचरे का अंबार दिख रहा है. दीवाली से पहले जब लोग साफ-सफाई को लेकर सतर्क होते हैं. ऐसे में शहर का गंदा होना बड़ी परेशानी बन गया है.
शहर की सफाई का जिम्मा रामकी ग्रुप के पास है. कंपनी के अधिकारी सफाईकर्मियों से बातचीत कके मामले को सुलझाने की कोशिश में लगे हुए हैं. लेकिन हड़ताल कब तक चलेगी, इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं है.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LEzQMc7v4AU8DYccDDrQlb?mode=ac_t



