अंधविश्वास से जुड़ी दुखद घटना, जिंदा मुर्गे को निगलने की कोशिश में गले में फसने से युवक और मुर्गा दोनों की हुई मौत, जांच में जुटी पुलिस
A tragic incident related to superstition, both the young man and the chicken died after getting stuck in their throat while trying to swallow a live chicken, police engaged in investigation
अंबिकापुर : छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. जहां एक युवक ने जिंदा चूजा निकल लिया. गले में चूजे के गले में फसने के बाद युवक को सांस लेने में दिक्कत होनी शुरु हुई और वो बेहोश हो गया. परिजनों ने फौरन उसे अस्पताल में भर्ती कराया. जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. डाॅक्टरों की टीम ने पोस्टमार्टम कर गले में फंसे चूजे को बाहर निकाल लिया है.
मिली जानकारी के मुताबिक अंबिकापुर दरिमा थाना क्षेत्र के ग्राम छिंदकालो में आनंद कुमार यादव उम्र 35 साल अपने पूरे परिवार के साथ रहता था. बताया जा रहा है कि शुक्रवार को आंनद बेहोश होकर अपने घर में गिर गया. जिसके बाद परिजनों ने उसे मेडिकल काॅलेज में भर्ती कराया. इलाज के दौरान युवक की मौत हो गई. युवक की मौत पर परिजन भी हैरान थे. डाॅक्टरों ने मृत युवक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा.
शनिवार को पोस्टमार्टम हुआ तो डाॅक्टर भी हैरान रह गए. डाॅक्टरों ने मीडिया को बताया कि पहली बार उन्होंने ऐसा पोस्टमार्टम किया है. गले में जब चीरा लगाया तो मृत युवक के गले से साबूत चूजा निकला. डाॅक्टरों ने बताया कि युवक ने जिंदा चूजा निगला था और गले में फंसने की वजह से उसकी मौत हो गई. डाॅक्टरों ने बताया कि श्वांस नली और खाने की नाली के बीच चूजा फंसा हुआ था.
पुलिस पूछताछ में पता चला है कि आनंद कुमार यादव की शादी को पांच साल हो गये थे. बच्चे नहीं होने से वो तंत्र-मंत्र के फेर में फंसा हुआ था. पुलिस आशंका जता रही है कि किसी तांत्रिक के कहने पर ही उसने जिंदा चूजा निगला होगा. फिलहाल इस पूरे मामले में पुलिस मृत युवक के परिजनों से भी पूछताछ कर रही है.
इस घटना ने जादू-टोना और अंधविश्वास के खतरों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई लोग जादू-टोने के जरिए समस्याओं का समाधान खोजने की कोशिश करते हैं. जो कई बार इस तरह की दुखद घटनाओं की वजह बन जाता है.
यह घटना समाज में व्याप्त अंधविश्वास की गहराई और उसके खतरनाक असर की एक मिसाल है. ग्रामीण इलाकों में शिक्षा और जागरुकता की कमी के चलते लोग आज भी ऐसे तरीकों पर यकीन करते हैं. जिनका कोई वैज्ञानिक आधार ही नहीं है. निसंतान होने की समस्या को हल करने के लिए इस युवक ने जिंदा मुर्गा निगलने की कोशिश की, जो उसकी मौत का कारण बन गया. यह घटना हमें यह याद दिलाती है कि विज्ञान और तर्कसंगतता के बजाय अगर हम अंधविश्वास पर भरोसा करेंगे. तो परिणाम नुकसानदेह हो सकते हैं.
यह दुखद घटना अंधविश्वास और अशिक्षा के घातक परिणामों का प्रतीक है. इस घटना से हमें यह सबक लेना चाहिए कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण और शिक्षा का प्रसार करना कितना ज्यादा जरुरी है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां लोग अभी भी जादू-टोने और अंधविश्वास में फंसे हुए हैं. सिर्फ जागरुकता और तर्कसंगतता के जरिए ही हम समाज को इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं से बचा सकते हैं.
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