एएसआई ने जड़ा तमाचा, थाने में हुआ जोरदार हंगामा, तीन दिन बाद एफआईआर दर्ज, छिपे कई राज!, जांच के बाद होगा साजिश का पर्दाफाश?
ASI slapped him, there was a huge uproar in the police station, FIR was registered after three days, many secrets are hidden! Will the conspiracy be exposed after the investigation?
बिलासपुर/रतनपुर : बिलासपुर जिले के रतनपुर थाने में पहुंचे प्रार्थी को जल्दी जांच रिपोर्ट देने के लिए कहना महंगा पड़ गया. बौखलाए एएसआई ने प्रार्थी को ही 15 से 20 तमाचे जड़ दिए. इस मामले में एसएसपी ने एएसआई को सस्पेंड कर दिया है. वही मारपीट करने पर एएसआई के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करवाई गई है.
मिली जानकारी के मुताबिक पीड़ित विनोद जायसवाल पिता गनपत जायसवाल उम्र 50 साल निवासी बनियापारा रतनपुर अपने पूर्व में लगाए गए परिवाद की जानकारी लेने के लिए 12 अप्रैल 2026 को दोपहर करीब 2 से 3 बजे के बीच थाना रतनपुर पहुंचे थे. पीड़ित का आरोप है कि उन्होंने अपने परिवाद की प्रगति और उसे अदालत में प्रेषित न किए जाने को लेकर जानकारी मांगी. जिस पर एएसआई दिनेश तिवारी नाराज हो गए.
पीड़ित विनोद जायसवाल के मुताबिक एएसआई ने उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए गाली-गलौज की और थप्पड़ों से मारपीट की. आरोप है कि उन्हें करीब 15 से 20 थप्पड़ मारे गए. इस दौरान थाना परिसर में अन्य स्टाफ भी मौजूद थे. एएसआई ने मारपीट के दौरान धमकी देते हुए कहा कि “तू कितना बड़ा नेता है, तेरा सब नेतागिरी निकाल दूंगा, तुझे जेल भिजवा दूंगा।” आरोप है कि मारपीट करने से पीड़ित के सिर में दर्द हो रहा है. कान से सुनाई ठीक से नहीं दे रहा है.
रतनपुर थाना प्रभारी प्रशिक्षु आईपीएस अंशिका जैन को घटना की जानकारी लगने पर उन्होंने पूरे मामले से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) रजनेश सिंह को अवगत करवाया. एसएसपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश जारी किए. साथ ही संबंधित एएसआई दिनेश तिवारी को सस्पेंड कर दिया गया है.
पीड़ित के मुताबिक मारपीट में गंभीर चोंटे आने पर थाने में मौजूद अन्य पुलिस कर्मियों ने प्रार्थी को इलाज के लिए अस्पताल क्यों नहीं पहुंचाया. तीन दिन तक अन्य पुलिस कर्मी और और अधिकारी घटना को लेकर खामोश क्यों रहे. मानवीय संवेदना को लेकर भी सवाल खड़े करता है. स्वत: संज्ञान लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं हुई. इन दिनों रतनपुर थाने का प्रभार प्रशिक्षु आईपीएस के पास है. क्या उनको भी तीन दिन तक घटना की भनक नहीं लगने दी गई. ऐसा है तो ये मामला तो और भी कई सवाल खड़े करता है.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. अभी हाल ही में इसके दायरे को बढ़ावा भी गया है. काफी अरसे तक सीसीटीवी कैमरे के फ़ुटेज को संरक्षित रखने के निर्देश भी है. रतनपुर थाने में लगे सीसीटीवी कैमरे के 12 से 15 अप्रैल तक रिकार्ड फ़ुटेज के अवलोकन से और भी कई रोचक खुलासे होने की संभावनाएं बताई गई है. सच के खुलासे की मंशा पुलिस प्रशासन की है जो पब्लिक डोमेन में तीन दिनों के सीसीटीवी फुटेज के रिकार्ड सार्वजनिक होने चाहिए। इससे ही वर्दी के दामन पर लगे छींटों को साफ करने में मदद मिलेगी.
रतनपुर थाने का प्रभार इन दिनों प्रशिक्षु आईपीएस अफसर के पास है. कथित रुप से मारपीट की घटना थाने के अंदर हुई है. प्रार्थी ने कई अन्य पुलिस कर्मियों के समझ घटना होने का उल्लेख अपने लिखित आवेदन पर किया है. जिस पर भरोसा कर एफआईआर दर्ज करने और निलंबन की कार्रवाई हुई है. ऐसे में घटना को लेकर थाना प्रभारी की भी जिम्मेदारी भी तो तय होगी. जांच से उन्हें अलग कैसे किया जा सकता है.
पुलिस अधीक्षक ने कोटा थाने के प्रभारी निरीक्षक को विवेचना की जिम्मेदारी सौंपी है. ऐसे में भारतीय पुलिस सेवा के अफसर से उसके अधिनस्थ कर्मी की पूछताछ और विवेचना कानून सम्मत होगी? या फिर पहले से ही थाना प्रभारी को क्लीन चिट देकर थाना के अंदर हुई घटना की विवेचना पूरी कर ली जाएगी. वर्दी के दामन पर लगे दाग हटाने है तो जांच का दायरा बढ़ा कर सीनियर आईपीएस अफसर से मामले की विवेचना कराई जानी चाहिए. जिससे की जांच और पूछताछ कानून सम्मत हो.
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