बढ़ा पीलिया का खतरा, शहर में 37 मरीज मिलने से मचा हड़कंप, विभाग ने जारी किया अलर्ट, घर-घर हो रहा सर्वे और सैंपलिंग, पानी सप्लाई पर फोकस

The risk of jaundice has increased, with 37 patients found in the city causing panic. The department has issued an alert, conducting door-to-door surveys and sampling, focusing on water supply.

बढ़ा पीलिया का खतरा, शहर में 37 मरीज मिलने से मचा हड़कंप, विभाग ने जारी किया अलर्ट, घर-घर हो रहा सर्वे और सैंपलिंग, पानी सप्लाई पर फोकस

दुर्ग/भिलाई : छत्तीसगढ़ के भिलाई नगर में पीलिया का बड़ा प्रकोप सामने आया है. जहां वार्ड-67, सेक्टर-7 (सड़क 37ए) में एक साथ 37 मरीज मिलने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है. 14 और 15 अप्रैल 2026 को स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने प्रभावित इलाके का दौरा कर हालात का जायजा लिया। दूषित पेयजल की आशंका के चलते स्वास्थ्य विभाग ने पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी कर दिया है पीड़ितों को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने के साथ-साथ संक्रमण के स्रोतों की जांच के लिए स्वास्थ्य शिविर (कैंप) लगाया गया और प्रभावित परिवारों की लगातार निगरानी की जा रही है.
स्वास्थ्य विभाग की त्वरित कार्रवाई- मामले की गंभीरता को देखते हुए भिलाई स्वास्थ्य विभाग की टीम ने घर-घर जाकर सर्वे शुरु कर दिया है भिलाई में पीलिया का प्रकोप रोकने के लिए चिकित्सा अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्र के पानी के नमूनों को जांच के लिए लैब भेज दिया है वार्ड-67 के सेक्टर-7 में अब तक कुल 37 मरीजों की पुष्टि हुई है, जिनमें से कुछ की हालत को देखते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
दूषित पेयजल बना मुख्य कारण?- शुरुआती जांच में स्थानीय निवासियों ने पेयजल पाइपलाइन में लीकेज और गंदे पानी की आपूर्ति की शिकायत की है. स्वास्थ्य विभाग ने नगर निगम के साथ मिलकर प्रभावित इलाके की पाइपलाइनों की जांच शुरू कर दी है. प्रशासन का कहना है कि भिलाई में पीलिया का प्रकोप पेयजल के दूषित होने की वजह से ही फैला है. जिसके लिए क्लोरीनीकरण और सफाई अभियान तेज कर दिया गया है.
निगम और स्वास्थ्य विभाग का अलर्ट- स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों से अपील किया कि वे पानी उबालकर ही पिएं और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें. भिलाई में पीलिया का प्रकोप न बढ़े. इसके लिए आसपास के वार्डों में भी जल परीक्षण शुरू कर दिया गया है. डॉक्टरों की टीम 24 घंटे निगरानी कर रही है. ताकि गंभीर मरीजों को फौरन उच्च चिकित्सा केंद्रों में स्थानांतरित किया जा सके.
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